उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 9:6 - 9:29
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 9:6 – 9:29
कार्यक्रम : #0027

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प्रिय मित्रों नमस्कार। मुझे पूरा विश्वास है कि आप आज भी हमारे साथ परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने के लिए तैयार है। पिछले प्रसारण में हम ने परमेश्वर द्वारा नूह को दी गई वाचा के 4 मुख्य बातों को देखा था। (1) मानव जाति के विकास और उन्नति, (2) संसार के सभी प्राणियों पर मनुष्य की सुरक्षा और उसका अधिकार, (3) अब पशु मनुष्य का भोजन हो सकते हैं, (4) लहू को खाने की मनाही। अब आती है उस वाचा की पांचवी और अन्तिम बात तो बहुत आश्चर्यजनक है। आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 9वें अध्याय का पद 6 लिखा है।

उत्पत्ति 9:6 “जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा उसका लहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा, क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है।“

यहाँ हम पाते हैं कि परमेश्वर मनुष्य के शासनतंत्र और सुरक्षा के लिए सिद्धांत प्रस्तुत करता हैं। वह सरकार को हत्या करने की सज़ा का अधिकार देता हैं। परमेश्वर द्वारा दी गई इस नई वाचा में हमने देखा है कि मनुष्य को अपना वंश बढ़ाना है, उसे पशुओं का संरक्षण और उन पर शासन करना है, उसे भोजन के लिए पशु के रूप में एक नया प्रावधान दिया गया है और लहु खाने पर रोक लगाई गई है। अब हम देखते हैं कि उसे शासन का सिद्धांत दिया गया है, जो मौत की सज़ा का आधार है।

क्या मैं आपसे कह सकता हूँ कि यह हैरानी की बात नहीं है कि आज की वर्तमान पीढ़ी का रवैया बाइबिल के नियमों से कितना दूर हो चुका है। बाइबिल पर चलने वाले बहुत कम ही पाए जाते हैं। वे एक प्रकार से पूरी तरह परमेश्वर के वचन से अनजान है। नतीजतन, हम देखते हैं कि कई देशों में जज, वकील और नेता सभी मौत की सज़ा को समाप्त करना चाहते हैं। उसी के साथ अपराध बढ़ रहे हैं और सबसे भयानक अपराध आज हो रहे हैं। डॉ वर्णन मैक्गी के द्वारा लिखी पुस्तक, “इज़ केपिटल पनिशमेन्ट क्रिश्चन?“ अर्थात “क्या फंसी की सजा बाइबल के अनुसार है?“ उसमें उन्होंने इस बात पर गहराई से अपने विचार प्रगट किए हैं। मेरे विचार में सरकार द्वारा दी जाने वाली मौत की सजा बाइबल संगत है जो आज सभी सरकारों के लिए आधार है। यदि किसी में हत्या किया है तो सरकार को उसे मौत की सजा सुनाने का अधिकार है। पर ऐसा क्यों? मैं सोचता हूँ कि परमेश्वर ने इसे ऐसा ही बनाया है जिससे कि मनुष्य के जीवन को सुरक्षा दी जा सके।

आज भी हमारे जीवन सुरक्षित नहीं है, चाहे घरों पर या बाहर में। कुछ लोग ऐसा नहीं मानेंगे पर वास्तविकता यही है। जब एक अपराधी जानता है किसी की हम्या करने से पहले यह जानता है कि उसका जीवन भी समाप्त किया जा सकता है, तब वह हत्या करने के पहले कई बार सोचेगा। आज लोग बंदूक के बल पर कानून को नियंत्रित करना चाहते हैं। समस्या बंदमक की नहीं है पर मनुष्य के हृदय और उसकी सोच की है।

लिखा है, “जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा उसका लहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा,“ यह एक ऐसा कानून है जिसे हमें अपनी कानून में बनाए रखने की आवश्यकता है। मानव सरकार वह क्षेत्र है जिसके द्वारा पूरी इंसानियत आगे बढत़ी है। तब आगे पद 7 में लिखा है।

उत्पत्ति 9:7 “और तुम फूला-फलो, और बढ़ो, और पृथ्वी पर बहुतायत से सन्तान उत्पन्न करके उसमें भर जाओ।”

यह पद 1 में दी गई परमेश्वर के निर्देश का दोहराया जाता है। पद 8 और 9 में लिखा है।
उत्पत्ति 9:8 “फिर परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों से कहा,“
उत्पत्ति 9:9 “सुनो, मैं तुम्हारे साथ और तुम्हारे पश्चात् जो तुम्हारा वंश होगा, उसके साथ भी वाचा बाँधता हूँ।“

परमेश्वर ने कहा, “तुम्हारे पश्चात् जो तुम्हारा वंश होगा, उसके साथ भी वाचा बाँधता हूँ।“ आगे पद 10 में लिखा है।

उत्पत्ति 9:10 और सब जीवित प्राणियों से भी जो तुम्हारे संग हैं, क्या पक्षी क्या घरेलू पशु क्या पृथ्वी के सब बनैले पशु, पृथ्वी के जितने जीवजन्तु जहाज से निकले हैं।

इस वाचा में सभी प्राणियों को शामिल किया गया है। यशायाह इसी बात को कहता है कि किसी दिन सिंह और मेम्ना एक साथ वास करेंगे और कोई दूसरे को हानी न पहुँचाएगा। रोमियों की पत्री में पौलुस कहता है कि “सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।“ आप इस बात को याद रखें कि परमेश्वर ने यह वाचा नूह और सारे प्राणियों के साथ पृथ्वी पर आपना राज्य स्थपित करने के समय तक के लिए बांधा है। यह वाचा, नूह और उसे वंश तथा सारे प्राणियो पर लागू होती है। तब पद11 में आगे कहता है।
उत्पत्ति 9:11 और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नष्ट न होंगे: और पृथ्वी का नाश करने के लिये फिर जल-प्रलय न होगा।”

यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा है। उसकी वाचा है कि वह फिर से कभी पृथ्वी को जलप्रलय से नाश न करेगा। अगली बार वह पृथ्वी को आग और गंधक से नाश करेगा, जैसा 2 पतरस अध्याय 3 में लिखा हुआ है।

अगले कुछ पदों में हम उस वाचा का पूरा चित्रण देखते हैं, और मेरे विचार में, इस वाचा का एक आध्यात्मिक पहलू भी है। यह एक तरह का साक्रेमेंत या संस्कार है। जो बात उसे ऐसा बनाती है, वह दिखाई देने वाला एक चिन्ह है जिससे वह वाचा जुड़ी हुई हैं। तब आगे पद 12 और 13 में कहता है।

उत्पत्ति 9:12 “फिर परमेश्वर ने कहा, “जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने जीवित प्राणी तुम्हारे संग हैं उन सब के साथ भी युगदृयुग की पीढ़ियों के लिये बाँधता हूँ, उसका यह चिह्न है।“
उत्पत्ति 9:13 “मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिह्न होगा।“

आकाश में दिखाई देने वाला धनुष एक साक्रेमेंत या संस्कार है जो हमारी वाचा की छाप है।

(धनुष का चित्र)
आगे पद 14 से 16 में लिखा है।
उत्पत्ति 9:14 “और जब मैं पृथ्वी पर बादल फैलाऊँ तब बादल में धनुष दिखाई देगा।“
उत्पत्ति 9:15 “तब मेरी जो वाचा तुम्हारे और सब जीवित शरीरधारी प्राणियों के साथ बन्धी है; उसको मैं स्मरण करूँगा, तब ऐसा जल-प्रलय फिर न होगा जिससे सब प्राणियों का विनाश हो।“
उत्पत्ति 9:16 “बादल में जो धनुष होगा मैं उसे देख के यह सदा की वाचा स्मरण करूँगा, जो परमेश्वर के और पृथ्वी पर के सब जीवित शरीरधारी प्राणियों के बीच बन्धी है।”

यहाँ कृपया ध्यान दें कि परमेश्वर कहता है, “मैं उस धनुष देख कर,“ और “सदा की वाचा स्मरण करूँगा।“ परमेश्वर ने यह नहीं कहा कि जब तुम उसे देखो, परन्तु उसने कहा है कि जब मैं उसे देखुँगा तब वमैं उसे देख के यह सदा की वाचा स्मरण करूँगा, जो परमेश्वर के और पृथ्वी पर के सब जीवित शरीरधारी प्राणियों के बीच बन्धी है।” पर तब हम उस धनुष को देखें तब हमारे लिए भी यीह प्रोत्साहना का कारण होगा। तब आगे पद 17 में कहता है।

उत्पत्ति 9:17 “फिर परमेश्वर ने नूह से कहा, “जो वाचा मैं ने पृथ्वी भर के सब प्राणियों के साथ बाँधी है, उसका चिह्न यही है।”

यह परमेश्वर की वाचा है जो केवल नूह से नहीं पर पृथ्वी भर के सब प्राणियों के साथ बाँधी है।

मैं फिर से इसे इस प्रकार से कहना चाहता हूँ कि धनुष को एक संस्कार कहा जा सकता है क्योंकि संस्कार एक दिखाई देने वाला चिन्ह होता है जिससे कुछ प्रतिज्ञाएं जुड़ी होती हैं। फसह का पर्व, पीतल का साँप, गिदोन का ऊन, और हमारे समय में बपतिस्मा और प्रभु भोज ऐसे ही चिन्ह हैं।

डॉ. जोहन पीटर लैंग जो एक जमर्न धर्मशास्त्री थे उन्होंने कहा था, “परमेश्वर के अनुग्रह की दृष्टि और हमारे विश्वास की दृष्टि इन साक्रेमेंतों या संस्कार में भेंट करती है। जब मनुष्य आकाश में धनुष को देखता है तब ऐसा ही होता है। विश्वास उस चिन्ह से जुड़ी प्रतिज्ञा को थाम लेता है। आप देख सकते हैं कि, लाभ उस चिन्ह द्वारा दिए जाने वाले आश्वासन में हैं। वाचा में कोई विश्वास नहीं होता और न चिन्ह में कोई भरोसा होता है – वचन और चिन्ह साथ-साथ चलते हैं। परमेश्वर ने एक वाचा बांधता है और उसे एक चिन्ह को जोड़ देता हैं। अब, वह धनुष नूह की वेदी के बलिदान के प्रति परमेश्वर का उत्तर है। एक व्यक्ति ने अपना अनुभव साझाा किया, कि जब वह हवाई जहाज से यात्रा कर रहा था तब अचानक ही मौसम बिगड़ गया। जहाज ऊपर हमा में था और सूर्य चमक रहा था तभी अचानक से उसे धनुष दिखाई दिया। मुझे लगता है परमेश्वर भी ऐसे ही इसे देखता है।

नूह और उसके पुत्रों का पाप

इस अध्याय में हम कुछ ऐसा पाते हैं जो बहुत निराशाजनक है। प्रश्न उठता है कि जब मनुष्य जलप्रलय के बाद जहाज से बाहर आया सारे के सारे पापी मनुष्य तो मर चुके थे, तो क्या इसका सह अर्थ निकलता है कि पृथ्वी पर अब पाप नहीं बचा था? आइए हम इस प्रश्न का उत्तर देखने का प्रयास करते हैं और पढ़े अध्याय 9 के पद 18 को, लिखा है।

उत्पत्ति 9:18 “नूह के पुत्र जो जहाज में से निकले, वे शेम, हाम और येपेत थे; और हाम कनान का पिता हुआ।“

यहाँ विचार करने कही बात है कि कनान के पुत्र हाम का नाम क्यों दिया गया है? दो कारणों से, उनमें से एक हम अभी देखेंगे और दूसरा वह है जब मूसा इस बात को अपनी पुस्तक में लिखता है, जब इस्राएल के लोग कनान को यात्रा कर रहे थे और उस समय कनान के ऊपर परमेश्वर के दण्ड को जानना उनके लिए प्रोत्साहन की बात थी ।तब पद 19 से 21 में लिखा है।

उत्पत्ति 9:19 नूह के तीन पुत्र ये ही हैं, और इनका वंश सारी पृथ्वी पर फैल गया।

उत्पत्ति 9:20 नूह किसानी करने लगा। उसने दाख की बारी लगाई;

उत्पत्ति 9:21और वह दाखमधु पीकर मतवाला हुआ; और अपने तम्बू के भीतर नंगा हो गया।

यहाँ हमें नूह के पाप का उल्लेख मिलता है। दुःखद बात यह है कि नूह दाखमधु पीकर मतवाला हो गया, और यह पाप है। यह कोई संतोषजनक बहाना नहीं है, हालाँकि कई टीकाकारों ने उसके लिए बहाने खोजने का प्रयास किया है। एक बहाना यह है कि वह शराब के असर से अनजान था क्योंकि उससे पहले किसी ने शराब नहीं पी थी। आप देखेंगे कि जलप्रलय से पहले, पापों की सूची में शराब पीने को शामिल नहीं किया गया है। फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो बाढ़ के बारे में ऐसे धर्मसिद्धान्त को मानते हैं। ऐसी बहुत सी बातें है जिनका उल्लेख करने का मेरे पास समय नहीं है। एक सिद्धान्त है जो कहता है कि जलप्रलय के पहले, बादल के नीचे बर्फ की एक परत थी जो सूर्य की रौशनी को छन कर आने देती थी जिस कारण अंगूर का रस सड़ता नहीं था और नूह इस कात को जानता था पर जलप्रलय के बाद ऐसा होना बंद हो गाया जिस कारण नूह अज्ञानता में वह दाखमधु पी लिया जो नशा देने वाला था। मैं इस बारे में केवल यह कह सकता हूँ कि नए संसार में भले ही यह नई शुरूआत है, परन्तु पुराना पाप आज भी जीवित है। यह घटना प्रगट करती है और उस बड़े प्रश्न का उत्तर देती है, जिसे हम आगे देखें्रगे। तब पद 22 से 24 में लिखा है।

उत्पत्ति 9:22 तब कनान के पिता हाम ने अपने पिता को नंगा देखा, और बाहर आकर अपने दोनों भाइयों को बतला दिया।

उत्पत्ति 9:23 तब शेम और येपेत दोनों ने कपड़ा लेकर अपने कन्धों पर रखा, और पीछे की ओर उलटा चलकर अपने पिता के नंगे तन को ढाँप दिया, और वे अपना मुख पीछे किए हुए थे इसलिये उन्होंने अपने पिता को नंगा न देखा।

उत्पत्ति 9:24 जब नूह का नशा उतर गया, तब उसने जान लिया कि उसके छोटे पुत्र ने उसके साथ क्या किया है।

अब आप देखते हैं कि परमेश्वर नूह के द्वारा से क्या कहता है, जो स्वयं नूह की वाचा का भाग बन जाता है। पद 25 में लिखा है।

उत्पत्ति 9:25 इसलिये उसने कहा, “कनान शापित हो रू वह अपने भाई बन्धुओं के दासों का दास हो।”

आप भी इस बात को नोट कर के रख लीजिए कि परमेश्वर ने कहा, “कनान शापित हो“, परमेश्वर हाम को शाप नहीं केता है। अब यह प्रश्न उठता है कि क्या हाम का शाप संपूर्ण अश्वेत या काले वर्ण के लोगों पर बना हुआ है? कतई नहीं। एसा सोचना मूर्खता है। धर्मशास्त्र बाइबल ऐसा नहीं सिखाती है। त्वचा का रंग, जो मनुष्य की ऊपरी त्वचा में होता है, वह बाहर से आने वाली सूर्य की किरणो के कारण होता है, न कि अंदर के पाप की वजह से। हाम पर कोई शाप नहीं दिया गया था; शाप उसके बेटे कनान पर था। हमें नहीं पता कि कनान इस घटना में किस तरह शामिल था। हमें यहाँ सिर्फ़ वचन में यह दिया गया है, लेकिन हम जानते हैं कि कनान का ज़िक्र एक बहुत खास उद्देश्य से किया गया है। मैं फिर से कहना चाहता हूँ कि इसका संदर्भ उसके रंग से नहीं है, यह उसकी त्वचा के रंग के कारण से नहीं है जो कुछ मनुष्यो की होती है। यह बहुत ही गलत शिक्षा है जो कुछ लोग काले लोगों के संदर्भ में देते आए हैं। न तो ये अश्वेत लोगों और न ही परमेश्वर के संबंध में उचित है, क्योंकि इसका अर्थ यह नहीं है। इस सब से परे हम जानते हैं की संसार की पहली दो सभ्यताएं हाम से संबंधित थी, बाबुली और यूनानी सभ्यताएं हाम के वंशज ही थे।

यहाँ एक और प्रश्न उठता है: परमेश्वर क्यों हमें नूह के पापों का वर्णन करता है? यदि किसी मनुष्य ने उत्पत्ति की पुस्तक को लिखा है तब, तो वह दो काम कर सकता था। या तो वह नूह के पाप का उल्लेख न करते हुए उसे छिपा का नूह को नायक बना सकता था, या फिर वह नूह के पाप को बढ़ा चढ़ा कर उसे और घिनौना बना देता। परन्तु परमेश्वर अपनी योजना के तहत उसे उत्पत्ति की पुस्तक में अंकित करता है।

जैसा मैंने पहले कहा है कि यह इस्राएल की सन्तानों को मूसा और यहोशू के समय कनान में प्रवेश करने के प्रोत्साहन के लिए था। जिससे मुझे पता चलता है कि परमेश्वर ने कनान पर शाप की घोषणा किया है। परमेश्वर ने उस पूरी जाति पर शाप की घोषणा किया है। आप को पुराने नियम में इससे आगे का वृत्तांत पढ़ कर इस दण्ड की पूर्ती को देखना है। आज बहुत से कनानी विलुप्त हो चुके हैं।

इसके अतिरिक्त नूह के पाप का उल्लेख करने के लिए परमेश्वर के पास और भी कारण है। रोमियों 15:4 में हम पढ़ते हैं कि, “जितनी बातें पहले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा आशा रखें।“ यह इसलिए लिखा गया कि आप और मैं जाने कि हम सभी शरीर में दुर्बल होते हैं। प्रभु यीशु ने कहा था कि, “आत्मा तो तैयार है पर शरीर दुर्बल है।“ गलातियों 2:16 में बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया है कि, “तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं, पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा।“

नूह के लिएउ बहाना बनाने की कोई संभावना नहीं थी क्योंकि उसने दाखमधु पीने का गलत काम किया था।

अब हो सकता कि आप जो मसीही हैं, मदिरापान (नशा) नहीं करते हैं, परन्तु क्या मैं आप से कह सकत हूँ, हो सकता है कि आप और मैं, शरीर में इस कदर जी रहे हैं, जिसके कारण से हम परमेश्वर को अप्रसन्न कर रहे हैं जैसे नूह ने किया था। मैं सोचता हूँ कि इस पृथ्वी पर जीवन जीने के प्रति हमारी कुछ गलत धारणाएँ हैं, जिसमें हम रह रहे हैं। लेकिन परमेश्वर को इसकी चिन्ता है कि वह मुझे और आपको, पृथ्वी पर कैसे रहना चाहता है, उसका प्रशिक्षण दे।

आइए हम उन गलतियों को न दोहराएँ, जो पहले इस घटना के सोच-विचार की गई हैं। हमें इस बात को याद रखना है कि इस कारण नूह ने अपने उद्धार को नहीं खोया। मैं विश्वास करता हूँ कि आप इस बात को समझ रहे हैं। नूह ने जो किया वह एक भयानक बात थी और उसके लिए कोई बहाना भी नहीं दिया जा सकता था। यह उसके शरीर की दुर्बलता थी। लेकिन फिर भी वह एक उद्धार पाया हुआ व्यक्ति था। अब आगे पद 26 और 27 में कहा गया है।

उत्पत्ति 9:26 फिर उसने कहा, “शेम का परमेश्वर यहोवा धन्य है, और कनान शेम का दास हो।

उत्पत्ति 9:27 परमेश्वर येपेत के वंश को फैलाए; और वह शेम के तम्बुओं में बसे, और कनान उसका दास हो।”

मैंने पहले आप से कहा था कि, जब मूसा को यह प्रकाशन दिया गया तब वह इस्राएलियों की अगुआई कनान देश लेजाने में रहा था। तथा सारे इस्राएली शेम के वंशज या सन्तान थे।

उत्पत्ति 9:28 जल-प्रलय के पश्चात् नूह साढ़े तीन सौ वर्ष जीवित रहा।

उत्पत्ति 9:29 इस प्रकार नूह की कुल आयु साढ़े नौ सौ वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।

आइए मित्रों हम परमेश्वर के वचन के अनुसार इमानदारी से जीवन व्यतीत करें। परमेश्वर हमारे जीवन के सभी कार्य और उद्देश्य को जानता है। उसका वचन हमें इसलिए ही दिया गया है कि हम उसके अनुसार चलें। आइए हम इस वचन के केवल पढ़ने, सुनने वाले ही न हो परन्तु उस पर चलने वाले भी बने। आइए धन्यवाद और प्रार्थना करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

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