उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति का परिचय
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 1 परिचय
कार्यक्रम : #0011

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प्रिय मित्रों आप सभी को प्रेम भरा नमस्कार। एक बार पुनः आप का स्वागत है दोस्तों। परमेश्वर पिता का धन्यवाद हो कि आज से हम बाइबल की पहली पुस्तक उत्पत्ति का अध्ययन आरंभ करने जा रहे हैं। तो आए हम उत्पत्ति के प्रस्तावना से आरंभ करते हैं।

उत्पत्ति की पुस्तक का परिचय

उत्पत्ति की पुस्तक बाइबल की दो सब से महत्वपूर्ण पुस्तकों में से एक है। दो महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं उत्पत्ति और मत्ती। उत्पत्ति की पुस्तक जो पुराने नियम का आरंभ करती है तथा मत्ती रचित सुसमाचार जो नए नियम का आरंभ करती है। मेरा अनुमान है कि ये ही दो पुस्तकें है जो परमेश्वर के संपूर्ण वचन को समझने की कुंजी है।

मित्रों इस अध्ययन को आरंभ करने से पहले मैं आपको सलाह देना चाहता हूँ कि आप उत्पत्ति की पुस्तक को आरम्भ से अन्त तक एक बार अवश्य पढ़ लें। यदि आप पूरी पुस्तक को एक बार में ही पढ़ लेते हैं तो यह आप के लिए अधिक लाभकारी होगी। मैं जानता हूँ कि ऐसा करने में आपको बहुत कठिनाई हो सकती है। कुछ के लिए यह असंभव हो सकता है। परन्तु यदि आप सत्य को जानना चाहते हैं, तो यह अच्छा होगा, कि आप एक बार में ही पूरी पुस्तक पढ़ लें। यदि आप ऐसा करते हैं तो वास्तव में आपको इससे लाभ प्राप्त होगा। यद्यपि मेरे लिए भी यह कठिन था, लेकिन आप अवश्य पढ़ सकते हैं।

सब से पहले मैं आप को उत्पत्ति की पुस्तक के बारे में संक्षेप में कुछ बताना चाहता हूँ, जिसके द्वारा उत्पत्ति की पुस्तक का संपूर्ण प्रतिबिम्ब या चित्र आप के लिए स्पष्ट हो जाएगा। यहाँ पर कुछ ऐसी जानकारियाँ है जिन्हें आप को लिख कर रख लेना चाहिए क्योंकि उत्पत्ति की पुस्तक वास्तव में संपूर्ण धर्मशास्त्र बाइबल से संबंधित है। वास्तविकता तो यह है कि उत्पत्ति की पुस्तक हमें बहुत सी बातों की जानकारी पहली बार देती है: जैसे, सृष्टि की रचना, पुरूष, स्त्री, पाप, सब्त का दिन, विवाह, परिवार, परिश्रम, सभ्यता, संस्कृति, हत्या, बलिदान, जातियाँ, भाषाएँ, छुटकारा और नगर या शहर। इन सब बातों के बारे मंे उत्पत्ति की पुस्तक ही हमें जानकारी देती है।

इस के साथ आप को उत्पत्ति की पुस्तक में कुछ वाक्यांश या मुहावरा बार बार पढ़ने को मिलेंगा, जैसे, “ये वंशावली है।“ यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है जिसका उपयोग बार-बार किया गया है, क्योंकि उत्पत्ति की पुस्तक हमें एतिहासिक परिवारों की जानकारी देती हैं। यह हमारे लिए आवश्यक इसलिए है क्योंकि हम भी मानव परिवारों का हिस्सा है जिसका आरंभ यहाँ होता है।

इस पुस्तक में बहुत से रोचक चरित्रों का वर्णन मिलता हैं, जो सर्वप्रथम इसी पुस्तक में चित्रित किए गए हैं। किसी ने उत्पत्ति की पुस्तक को “आत्मकथा की पुस्तक“ भी कहा है। उन चरित्रों मंे अब्राहम, इसहाक, याकूब, यूसुफ, फ़िरौन राजा और यूसुफ को मिला कर याकूब के ग्यारह पुत्रो का वर्णन हैं। आप देखेंगे कि परमेश्वर निरन्तर अब्राहम, इसहाक, याकूब, यूसुफ, को आशीष देते पाए जात हैं। इनके अलावा वे लोग भी जो इनके साथ संबंधित रहे हैं, जैसे – लूत, अबीमेलेक, पोतीपर, पकानेवाला, और फ़िरौन राजा आदि भी परमेश्वर के द्वारा आशीषित हुए।

इस पुस्तक में आप को परमेश्वर की वाचा का वर्णन भी मिलता है। और हम यह भी देखते हैं कि परमेश्वर समय-समय पर हमारे पूर्वजों पर अपने आप को प्रकट करते रहा हैं। उनमें मुख्य रूप से अब्राहम है। परमेश्वर की वेदी इस पुस्तक में मुख्य रूप से दिखाई देती है। परिवार में एक-दूसरे के प्रति ईर्ष्या भी इस पुस्तक में पाई जाती हैं। मिस्र देश का वर्णन सबसे पहले इसी पुस्तक में देखने को मिलता है, और किसी दूसरी पुस्तक में नहीं। पाप के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय और दण्ड भी इस पुस्तक में दर्शाया गया है तथा परमेश्वर की दूरगामी योजना भी हमें उत्पत्ति की पुस्तक में दिखाई देता है।

जब आप इस पुस्तक का अध्ययन करें तो इस बात का भी ध्यान रखें जो, किसी परमेश्वर के दास के द्वारा से कहा गया था, संपूर्ण पुस्तक के चित्र को अपने मस्तिष्क में बैठा लें, फिर अलग अलग भागों में उसे पूरा करें। दूसरे शब्दों में, पूरी पुस्तक का पूरा चित्रण समझ लें। बाइबल अध्ययन की दो मुख्य विधियाँ बताई हैं। पहली विधि है – दूरबीन/दूरदर्शी पद्यति से और दूसरी है सूक्ष्मदर्शी या माइक्रोस्कोप पद्यति। मित्रों इसका तात्पर्य यह है कि पहले आप सरसरी दृष्टि से पुस्तक को एक बार पढ़ लें। तत्पश्चात् उसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करें। अर्थात् एक-एक पद और वचन का सूक्ष्म रीति से अध्ययन करना।

इंगलैन्ड के रहने वाले, अपने समय के प्रमुख प्रचारकों में से एक रौबिन्सन ने एक परमेश्वर के सेवक के जीवन पर कुछ लिखा था जिसे मैं आज स्थायी रूप से परमेश्वर के भक्तों के मष्तिस्क, और हृदय में लिखना चाहता हूँ।

“हम पुस्तकों की दुनिया में रहते हैं और प्रेस नई पुस्तकों को छापकर हमारे सामने उण्डेल देता है। और हम हमेशा पुस्तिके, पाठ्य पुस्तिक, लेख, भक्तिपूर्ण पुस्तकें, आलोचना की पुस्तकें, बाइबल से संबंधित पुस्तकें, सुसमाचार से संबंधित पुस्तकें, सभी प्रकार की पुस्तकें हम उत्सुकता से पढ़कर समाप्त करते हैं। परन्तु हम कितना समय, और परिश्रम, सुसमाचार के लिए विचार या ध्यान करने पर देते हैं? हम लगातार यह इस बात के प्रयास में रहते हैं कि सच्चाई के किसी नई बात को पढ़कर हम जल्दी अच्छाई प्राप्त कर सकते हैं, जिसे ग्रहण करना हमारे लिए अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि यह हमें एक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे हमारी शिक्षा ने हमें परिचित कराया है। लेकिन जो अच्छाई हम आसानी से प्राप्त कर लेते हैं, यह वह नहीं होती जो हमारे व्यक्तित्व में गहराई से प्रवेश करती है और हमारी स्थायी संपत्ति बन जाती है। हमें यह समझ जाना चाहिए कि जीत कर प्राप्त करे बिना हमें कुछ भी नहीं मिल सकता। परमेश्वर के अनुग्रह के खजाने को जी-जान से खोजा जाना चाहिए जो उस व्यक्ति की विशेषता है जो अच्छे मोतियों की खोज में था।

मुझे यह कथन सही लगता है, क्योंकि मेरा मानना है परमेश्वर का वचन बाइबल हमारे हृदय से स्वयं बातें करती है जैसा कोई अन्य पुस्तक नहीं कर सकती। यही कारण है कि हम इस प्रसारण में परमेश्वा के वचन बाइबल के क्रमबद्ध अध्ययन पर समय व्यतित कर रहे हैं।

उत्पत्ति की पुस्तक का मुख्य विभाजन

यदि आप उत्पत्ति की पुस्तक को दो भागों में विभाजित करना चाहते हैं तो कहाँ से करेंगे? उत्पत्ति की पुस्तक को मुख्य रूप से दो खण्डों में बाँटा गया है। पहला खण्ड – 1 से 11 अध्याय तक और दूसरा खण्ड 12 अध्याय से लेकर पुस्तक के अन्तिम अध्याय तक जाता है। और ये दोनों खण्ड, एक दूसरे से, अनेक बातों में भिन्न हैं। प्रथम खण्ड में सृष्टि से प्रारंभ होकर अब्राहम तक का वर्णन है और दूसरे खण्ड में अब्राहम से लेकर यूसुफ तक का वर्णन है। प्रथम खण्ड बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषयों का वर्णन करता है, जिनमें आज भी विश्व के बड़े-बड़े विद्वानों के मस्तिष्क उलझे हुए हैं। वे आज भी इन विषयों पर विचार करते पाए जाते हैं: जैसे, सृष्टि की रचना, मनुष्य का पाप में गिरना, जलप्रलय, बेबीलोन का गुम्मट। दूसरा खण्ड कुछ मुख्य व्यक्तियों के जीवन चरित्र को हमारे सामने प्रस्तुत करता है: विश्वास का पिता, अब्राहम, इसहाक जो अब्राहम का एकलौता और प्रिय पुत्र है, याकूब जो परमेश्वर का चुना हुआ तथा परमेश्वर द्वारा ताड़ना पानेवाला व्यक्ति है, याकूब के पुत्र, यूसुफ का कष्ट और उसकी महिमा का वर्णन इस खण्ड में मिलता है।

यद्यपि यह एक प्रमुख विभाजन है लेकिन इसके अलावा समय अथवा काल के आधार पर अन्य विभाजन भी किए जा सकते हैं। पहले 11 अध्याय कम से कम दो हज़ार वर्षों की अवधि को पूरा करते हैं, वास्तव में यह अवधि दो हज़ार वर्षों से अधिक समय की है। मेरे विचार में यह कहना उचित होगा कि वह भाग कई हज़ार सौ साल पूरे करता है। थोड़ा औश्र गहराई से विचार करें तो यह समय अवधि आप की कल्पना के आधार पर किसी भी समय या अवधि को पूरा कर सकता है जो बीत चुका है। पर कम से कम पहले 11 अध्याय दो हज़ार सालों को पूरा करता ही है। परन्तु उत्पत्ति की पुस्तक का दूसरा भाग अर्थात 12 से 50 अध्याय तक 39 अध्याय मात्र 350 वर्षों का अंतराल ही पूरा करता है। दूसरे प्रकारे से देखें तो उत्पत्ति की पुस्तक के 12वें अध्याय से आरंभ कर के पुराने नियम से नये नियम, तक केवल दो हज़ार वर्ष ही पूरे होते हैं। इस प्रकार से यही समय अवधि के आधार पर गणना करें तो उत्पत्ति की पुस्तक के प्रथम 11 अध्यायों में आप पूरी बाइबल का आधा भाग समाप्त कर लेते हैं।

इसके आधार पर हमें अपने मन और हृदय में यह बात बैठा लेनी चाहिए कि परमेश्वर द्वारा इस प्रथम भाग को हमें देने के पीछे उसकी कोई विशेष योजना शामिल है। आप को क्या लगता है, परमेश्वर इस प्रथम भाग को अधिक महत्व दे रहा है या दूसरे और अन्तिम भाग को? क्या यह प्रमाणित नहीं होता है कि अधिक महत्त्व वह अंतिम भाग पर दे रहा हैं? हम देख सकते हैं कि प्रथम खण्ड विशेष तौर पर ब्रहमाण्ड तथा सृष्टि की रचना संबंधी विषयों पर हमें जानकारी देता है। परन्तु उत्पत्ति की पुस्तक का अन्तिम खण्ड मनुष्य, राष्ट्र और प्रभु यीशु मसीह से संबंधित जानकारी देता है। और यहाँ पर हमारा यह कहना भूल नहीं होगी कि परमेश्वर संपूर्ण सृष्टि की अपेक्षा, अब्राहम में ज़्यादा रूचि रखते थे। मेरे प्रिय मित्रों, परमेश्वर आप में भी अधिक रूचि रखता हैं, और संपूर्ण सृष्टि से अधिक वह आपको महत्त्व देते हैं। अर्थात् परमेश्वर की दृष्टि में आप संपूर्ण सृष्टि की बहुमूल्य चीजों और सुन्दर वस्तुओं से भी अधिक मूल्यवान हैं।

मैं आप को आगे कुछ और समझाना चाहता हूँ। यदि आप बारिकी से देखें तो पाएंगे कि नए नियम में चार सुसमाचारों के 89 अध्यायों में से, मात्र 4 अध्यायों में प्रभु यीशु मसीह के प्रथम तीस वर्षों के जीवनकाल का उल्लेख किया गया है, जब कि बचे हुए 85 अध्यायों में प्रभु यीशु के अन्तिम तीन सालों का उल्लेख पढ़ने को मिलता है, तथा 27 अध्यायों में अन्तिम तीन दिनों की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इससे हमें यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर का आत्मा किस बात पर बल दे रहा है? मुझे यकीन है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि प्रमुख्ता आखिरी भाग पर दी गई है, सत्ताईस अध्यायों में शामिल अन्तिम आठ दिनों पर। और यह सब किस विषय में है? यह प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान के बारे में है। यही सुसमाचार के लेख का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर ने सुसमाचार इसलिए दिया हैं कि आप और मैं विश्वास कर सकें कि मसीह यीशु हमारे पापों के लिए मरा गया और हमें धर्मी ठहराने के लिए जी उठा। यही आवश्यक और सबसे महत्वपूर्ण सत्य है।

बाइबल के प्रथम 11 अध्याय, मात्र बाइबल के प्रस्तावना के समान है, तथा हमें उस भाग को उसी दृष्टिकोण से देखना होगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम पहले 11 अध्यायों का अध्ययन नहीं करेंगे। हम उसमें भी पर्याप्त समय व्यतीत करेंगे।

उत्पत्ति की पुस्तक बाइबल के आंरभिक बीज के समान है जो हमें सभी बातों का आरंभ, स्रोत और जन्म प्रगट करता है। उत्पत्ति की पुस्तक एक खूबसूरत गुलाब की कली की तरह है, जो बाइबल के बाकी हिस्सों में खिलती दिखाई देती है। सत्य यहाँ पर बीज रूप में है।

उत्पत्ति की पुस्तक का सबसे अच्छा विभाजन जो वंशावली के आधार पर किया जा सकता है – अर्थात, परिवारों के अनुसार, वह इस प्रकार है।

उत्पत्ति 1-2:6 – स्वर्ग और पृथ्वी की वंशावली की पुस्तक
उत्पत्ति 2:7-6:8 – आदम की वंशावली की पुस्तक
उत्पत्ति 6:9-9:29 – नूह की वंशावली
उत्पत्ति 10:1-11:9 – नूह के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 11:10-11:26 – शेम के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 11:27-25:11 – तेरह के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 25:12-25:18 – इश्माएल के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 25:19-35:29 – इसहाक के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 36:1-37:1 – एसाव के पुत्रों की वंशावली
उत्पत्ति 37:2-50:26 – याकूब के पुत्रों की वंशावली
यह सब कुछ हमें उत्पत्ति की पुस्तक में दिया गया है। उत्पत्ति की पुस्तक परिवारों की पुस्तक है। यह एक अद्वितीय पुस्तक है और यह हमें इसी दृष्टिकोण से देखने और समझने में सहायता करेगी।

रूपरेखा

(1) पृथ्वी पर पाप का प्रवेश – अध्य. 1-11
(अ) सृष्टि की रचना – अध्य. 1-2

(1) स्वर्ग और पृथ्वी 1:1 रचना (बारा) 3 बार उपयोग किया गया है – 1, 21, 27
(2) पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी – 1:2
(3) पुनःनिर्माण – 1:3 -2:25

• पहला दिन – उजियाला 1:3-5
• दूसरा दिन – आकाश 1:6-8
• तीसरा दिन – सूखी भूमि और वनस्पति – 1:9-13
• चौथा दिन – सूर्य, चन्द्रमा, तारे – 1:14-19
• पांचवा दिन – जीवित प्राणि – 1:20-23
• छठवां दिन – सृष्टि की उत्पादन क्षमता और मनुष्य की रचना 1ः24-31
• सातवां दिन – सब्त – 2:1-3
• मनुष्य की रचना का दोहराया जाना – 2:4-25

(ब) मनुष्य का पाप में गिरना अध्याय 3-4
(1) पाप का मूल कारण – परमेश्वर पर शंका और अवज्ञा
(2) पाप का फल – मनुष्य के हृदय से सब निकलता है – मत्ति 15ः19

(स) जलप्रलय – अध्याय 5-6
(1) आदम की वंशावली की पुस्तक – सेत से मानव इतिहास का आरंभ – मृत्यु को प्रवेश – अध्याय 5
(2) जलप्रलय के पूर्व की पीढ़ी – जलप्रलय का कारण और जहाज का बनाया जाना – अध्याय 6
(3) जलप्रलय द्वारा न्याय – अध्याय 7
(4) प्रलय के बाद की पीढ़ी – जलप्रलय के उपरांत – अध्याय 8
(5) प्रलय के बाद का जीवन – नया आरंभ – अध्याय 9

(ड) बाबुल का गुम्मट और भाषा में गड़बड़ी – अध्याय 10-11
(1) मानवविज्ञान – नूह के पुत्र – अध्याय 10
(2) बाबुल का गुम्मट – अध्याय 11 (पिन्तेकुस्त के दिन के विपरीत)

  • स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक – उत्पत्ति 1-2:6
  • आदम की पीढ़ियों की पुस्तक – उत्पत्ति 2:7-6:8
  • नूह की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 6:9-9:29
  • नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 10:1-11:9
  • शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 11:10-26
  • तेरह की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 11:27-25:11
  • इश्माएल की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 25:12-18
  • इसहाक की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 25:19-35:29
  • एसाव की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 36:1-37:1
  • याकूब की पीढ़ियाँ – उत्पत्ति 37:2-50:26

ये सभी हमें उत्पत्ति की पुस्तक में दिए गए हैं। और यह परिवारों की एक पुस्तक है। यह एक अद्भुत पुस्तक है, आप देखते हैं। और हमें इसे, मुझे लगता है, बड़े पैमाने पर उस विशेष दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

अब यह सब जो हम दे रहे हैं वह वास्तव में प्रारंभिक अध्ययन है क्योंकि अब हम उत्पत्ति के पहले अध्याय पर आते हैं और हम आपको इस अध्याय से मुश्किल से परिचित करा सकते हैं। और इस अध्याय में हमारे पास ब्रह्मांड की सृष्टि की कहानी है। और, मेरा विश्वास करें, यह अध्याय अभी भी आपकी कल्पना से कहीं अधिक टिप्पणी का कारण बन रहा है, और यही वह बात है जिसमें हम अगली बार प्रवेश करेंगे। और मुझे लगता है कि शायद मुझे आज उत्पत्ति के पहले पद को देकर समाप्त करना चाहिए।

“आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को बनाया।”

यह सबसे गहन कथनों में से एक है जो कभी दिया गया है, और फिर भी हम पाते हैं कि यह वह कथन है जिसे निश्चित रूप से इस समय में चुनौती दी जा रही है जिसमें हम जी रहे हैं। मैं अगली बार आपको कैलिफोर्निया में एक प्रोफेसर का कथन दूँगा क्योंकि अब वे विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में सृष्टि की कहानी पढ़ाने की अनुमति देंगे। अब स्पष्ट रूप से मुझे यकीन नहीं है कि मैं इससे खुश हूँ। और कोई कहता है, “क्यों आपको होना चाहिए। यह एक अद्भुत कदम है।” नहीं, मेरे मित्रों, मैं आपको बताता हूँ क्यों—यह उन शिक्षकों का चरित्र होगा जो इसे पढ़ाते हैं, और मुझे डर है कि हमारे पास पर्याप्त ईसाई पृष्ठभूमि और बाइबिल पृष्ठभूमि वाले लोग नहीं हैं जो इसे ठीक से पढ़ा सकें। यह मेरी आलोचना होगी कि आज हमारे बहुत कम सरकारी स्कूल के शिक्षक वास्तव में सृष्टि की कहानी पढ़ाने के लिए तैयार हैं। और इसका कारण यह है कि उनके पास व्यावहारिक रूप से कोई बाइबिल पृष्ठभूमि नहीं है, और उन्हें एक ऐसी पृष्ठभूमि दी गई है जो इसके विपरीत है। आप देखते हैं, हम पहले ही एक विवादास्पद खंड में प्रवेश कर चुके हैं। सृष्टि ने शायद धर्मग्रंथ में किसी भी अन्य विषय की तुलना में अधिक विवाद को जन्म दिया है। हम अगली बार इस पर गौर करेंगे।

हम उत्पत्ति का पहला अध्याय पढ़ेंगे। क्या आप अपनी बाइबिल लेंगे और वह पहला अध्याय पढ़ेंगे। और इसे एक बार नहीं, दो बार नहीं पढ़ें। इसे आधा दर्जन बार पढ़ें।

अगली बार तक, परमेश्वर आपको भरपूर आशीष दे!

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

आज के पैसेज से आपने जो मुख्य बात सीखी, उसे लिखें।

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