उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 8:13 – 9:5
कार्यक्रम : #0026
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प्रिय मित्रों प्रभु यीशु मसीह में आप सभी को प्रेम भरा नमस्कार। आशा है आप मेरे साथ वचन के अध्ययन के लिए तैयार हैं। आइए हम अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हुए अगले विषय को देखें।
पृथ्वी का सूखना – नूह जहाज को छोड़ता है।
आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 8 अध्याय का पद 13, लिखा है।
उत्पत्ति 8:13 “नूह की आयु के छः सौ एक वर्ष के पहले महीने के पहले दिन जल पृथ्वी पर से सूख गया। तब नूह ने जहाज की छत खोलकर क्या देखा कि धरती सूख गई है।“
मित्रों, यह हमें 261वें दिन में ले आता है और इस प्रकार से कुल 371 दिन तक जलप्रलय का प्रभाव बना रहा। अर्थात् एक साल से अधिक समय तक। और पवित्रशास्त्र इस बात को भी स्पष्ट करता है कि जलप्रलय विश्वव्यापी अर्थात संपूर्ण पृथ्वी पर था। यह तैरने के लिए बनाए गए तालाब में पानी भरने या झील के जैसे नहीं था। परन्तु निश्चय ही यह उससे बहुत विशाल था।
इसके अतिरिक्त उस जलप्रलय के संदर्भ में अन्य खोज भी की गई है जिसे मैं आप के साथ बांटना चाहता हूँ। डॉ. जे. ई. शैली जो यह विश्वास करते हैं कि, जलप्रलय विश्वव्यापी था, और उसने पूरे पृथ्वी को जल से ढक दिया था। वे इस प्रकार कहते हैं कि “सबसे प्रभावशाली उदाहरण हम उन विशालकाय प्राणियों में पाते हैं। ये विशालकाय हाथी तुन्द्रा, सायबेरीया, एशिया महाद्वीप, उत्तरी अलास्का, कैनेडा के कई इलाकों की चोटियों पर जमें हुए गाद या मिट्टी के नीचे पाए गए। वे किसी दलदली स्थान में नदी में फँसे थे, परन्तु वे पहाड़ की ऊँचाई पर पाए गए थे, वे झुण्ड में थे, और वे हज़ारों हज़ार की संख्या में थे।“ डॉ. शैली आगे यह भी कहते हैं कि इन हाथियों का परिक्षण किया गया और पाया गया, कि ये पानी में डूबकर मरे थे। यदि ये हाथी दलदल में फँसते तो इनकी मौत भूखमरी से होनी चाहिए थी। लेकिन यहाँ पर ऐसा नहीं हुआ था। इसके आगे जब हम उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं, तो वहाँ और भी अधिक हड्डियाँ पाई गई। जब उस द्वीप की भूमि पर हल चलाया गया तो और अधिक मात्रा में हड्डियाँ पाई गईं। जिसमें साईबरियन बाघ के दाँत, गुफ़ा में रहनेवाले भालू और कस्तूरी सांड़ की हड्डियाँ भी शामिल थीं। और पृथ्वी पर उगने वाले वृक्षों की जड़ व तने भी पाए गए। मित्रों, वर्तमान समय में इन क्षेत्रों में पेड़ नहीं उगते हैं, और पेड़ देखने के लिए आप को 100 से 1000 मील दूर जाना पड़ता है, अब हाथी उस क्षेत्र में अविकसित वनस्पति नहीं खा सकते हैं क्योंकि ये वनस्पति साल में सिर्फ तीन महीने ही उगती है और यह भी सिर्फ 100 मील के क्षेत्र में है जो कि एक हाथी को एक महीने तक ज़िन्दा रखने के लिए भी काफ़ी नही है। उनके पेट में देवदार, बनसंजली की डालियाँ पाई गई थीं। ये हाथी गाद या मिट्टी के नीचे ज़िन्दा दफ़न हो गए थे, क्योंकि उस समय गाद नरम थी। हाथी और गाद अचानक से बर्फ में जम गए और फिर कभी नहीं पिघले। उनके सड़ने का कोई भी चिन्ह नहीं मिलता है। एक हज़ार वर्ष से भी अधिक वर्षों से लन्दन के बन्दरगाहों में हाथी दाँत बेचे जाते रहे हैं। “नैचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम” ने हाथी का सिर और उसके दाँत “लन्दन डोक्स” के गोदाम से खरीदे जिसका सिर पूर्णतः ताज़ा और फर के चमड़े से ढका हुआ था।
अब भी यदि आप जलप्रलय के विश्वयापी होने पर शंका करते हैं तो ये सबूत आपको विश्वास दिलाने के लिए पर्याप्त हैं, कि जलप्रलय विश्वव्यापी था। इससे आगे पद 18 और 19 में लिखा है।
उत्पत्ति 8:18 “तब नूह, और उसके पुत्र और पत्नी, और बहुएँ निकल आईं:“
उत्पत्ति 8:19 “और सब चौपाए, रेंगनेवाले जन्तु, और पक्षी, और जितने जीवजन्तु पृथ्वी पर चलते फिरते हैं, सब जाति जाति करके जहाज में से निकल आए।“
नूह वेदि बना कर बलिदान चढ़ाता है।
अब परमेश्वर नूह के साथ एक वाचा बांधने जा रहा है। इस नए आरंभ को हम अगले अध्याय में देखेंगे। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण वाचा है। जब परमेश्वर ने यह वाचा नूह के साथ बांधी, तो उसने यह वाचा पूरी मानव जाति के साथ बांधी जो पृथ्वी पर आज पिद्यमान है। तब आगे पर 20 में लिख है।
उत्पत्ति 8:20 “तब नूह ने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई; और सब शुद्ध पशुओं और सब शुद्ध पक्षियों में से कुछ कुछ लेकर वेदी पर होमबलि चढ़ाया।“
क्या अब आप इस बात को समझ सकते हैं कि नूह ने क्यों शुद्ध में से सात जोड़े और अशुद्ध में से मात्र दो जोड़े लिए थे। अब वह शुद्ध पशुओं में से लेकर बलिदान चढ़ाता है।
जहाज में ये बाहर निकलने के बाद नूह ने जो पहला काम संपन्न किया वह था, उसने परमेश्वर के निमित वेदि बनाई और उसे होमबलि चढ़ाया। वह होमबलि प्रभु यीशु मसीह के मनुष्यत्व की ओर संकेत करती है। अर्थात उसके बलिदान का प्रतीक है। यह बलिदान परमेश्वर के सामने, ग्रहणयोग्य और उसके स्मरण में, उसको महिमा देने के आधार पर चढ़ाया गया। मित्रों, यहाँ पर हम, एक और ख़ास बात को, पाते हैं और हम बिना सन्देह के कह सकते हैं कि, यही एक कारण था, जिससे परमेश्वर नूह के साथ, उस विशेष समय पर प्रसन्न हुआ। तब आगे पद 21 में लिखा है।
उत्पत्ति 8:21 “इस पर यहोवा ने सुखदायक सुगन्ध पाकर सोचा, “मनुष्य के कारण मैं फिर कभी भूमि को शाप न दूँगा, यद्यपि मनुष्य के मन में बचपन से जो कुछ उत्पन्न होता है वह बुरा ही होता है; तौभी जैसा मैं ने सब जीवों को अब मारा है, वैसा उनको फिर कभी न मारूँगा।“
मित्रों, आप इसे लिख कर रख सकते हैं क्योंकि यह सत्य है। यह परमेश्वर का वचन है, जो सत्य है, उसने यहाँ पर बहुत ही स्पष्ट शब्दों में नूह से वाचा बाँधी और कहा कि वह मनुष्यों, एवम् जीव-जन्तुओं को फिर कभी भी जलप्रलय से नाश नहीं करेंगा। आप की जवानी के समय आप का क्या हाल था? क्या आप के विचार अशुद्ध नहीं थे? आज हमारे समाज में लोगों के विचार बदले नहीं हैं। वे सभी उसी मार्ग पर बढ़ते जा रहे हैं। मनुष्य का हर विचार आरंभ से ही बुरा और दुष्ट होता है। एक बार मैं ट्रेन से यात्रा कर रहा था और रात को बगल वाले कम्पार्टमेन्ट से किसी पति-पत्नी के लड़ने की आवाज आने लगी। उन्हें लगा की सब सो रहे है पर लोग सुन रहे थे। ऐसा लग रहा था कि उन दोनों के बीच यह मुकाबला चल रहा था कि कौन दूसरे को ज़्यादा गालियाँ दे सकता है! मैंने दो इंसानों को इतनी गंदी गालियाँ देते हुए कभी नहीं सुना। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि मनुष्य के हृदय में जो भी विचार आरंभ से उत्पन्न होता हैं वह बुरा ही होता है। तब आगे पद 22 में लिखा है।
उत्पत्ति 8:22 “अब से जब तक पृथ्वी बनी रहेगी, तब तक बोने और काटने के समय, ठण्ड और तपन, धूपकाल और शीतकाल, दिन और रात, निरन्तर होते चले जाएँगे।”
ऐसा माना जाता है कि जलप्रलय इतना भयानक था कि उसने पृथ्वी को अपनी धुरी से झुका दिया। जैसा कि आप जानते हैं, पृथ्वी अवपनी धुरी पर सीधी नहीं परन्तु एक तरफ थोड़ी झुकी हुई है। हम केन्द्र में नहीं हैं। पृथ्वी की धुरी और चुम्बकीय केन्द्र में अंतर है। पृथ्वी के केन्द्र की धुरी में कुछ परिवर्तन हुआ है, और कुछ लोगों का मानना है कि यह उस जलप्रलय के कारण से हुआ है। क्योंकि पृथ्वी इसी तरह घूमती है, इसलिए हमें मौसम मिलते हैं। यह एक लड़खड़ाते हुए लट्टू की तरह घूम रही है। आपको याद होगा कि जब आप छोटे थे और लट्टू घुमाते थे, तो लट्टू धीरे-धीरे धीमा होता जाता था और लड़खड़ाने लगता था। पृथ्वी आज भी इसी तरह घूम रही है, और इसी वजह से हमारे पास अलग अलग मौसम होते हैं।
(धुमते हुए लट्टु का चित्र)
जलप्रलय के पहले मनुष्य ने तीन बाते सीखी थी जो अंग्रेजी के ‘R‘ शब्द से आरंभ होती हैं। (1) Rebellion अर्थात, परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह जो खुल कर सामने आया। (2) Revelation अर्थात, परमेश्वर द्वारा दिया गया प्रकाशन मनुष्यों द्वारा नकारा गया। नूह की गवाही लोगों तक नहीं पहुँच पाई। (3) Repentance अर्थात, पश्चाताप करने से पूर्णतः नकार दिया। मनुष्य ने परमेश्वर की ओर मुड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। परमेश्वर द्वारा दिए गए, शरणस्थान का मनुष्य ने तिरस्कार किया, जब की 120 वर्षों तक नूह प्रचार करता रहा पर फिर भी कोई परिवर्तित व्यक्ति उसके पास नहीं आया।
ये तीन मुख्य बातें उस समय थीं जिन्हंे हमने ऊपर देखा।
(1). मनुष्य ने विद्रोह में जीवन जीया।
(2). परमेश्वर के प्रकाशन का तिरस्कार किया।
(3). मनुष्य ने कोई पश्चाताप नहीं किया गया।
अब नूह जहाज़ से बाहर निकलता है और एक बहुत ही अनुपम स्थान पर खड़ा होता है। वह उस स्थान पर खड़ा है जहाँ पुनः मानवजाति का वंश आरंभ होनेवाला है, और यही सौभाग्य आदम को भी मिला था – ऐसा कहा गया है कि हम सब “आदम“ से संबंधित हैं, लेकिन हम उसके नज़दीकी रिश्तेदार से भी बढ़कर हैं। हम सब नूह से भी संबंधित हैं और एक तरीके से देखा जाए तो आज हम सभों का पिता नूह ही है। इसके साथ अध्याय 8 समाप्त होता है और अब हम अध्याय 9 से आगे बढ़ेंगे।
अध्याय 9
विषय: नए निर्देश और व्यवस्थाएं तथा नूह और उसके पुत्रों का पाप।
अब हम एक नए आरंभ में आते है। हमारे लिए यी समझ पाना असंभव है कि यह कितना क्रान्तीकार आरंभ है। मावनजाति के लिए ठहराया गया नैतिका का समय अब समाप्त हो चुका था, अब परमेश्वर मनुष्यों को एक शासनतंत्र के अधीन करने जा रहा था, कि मनुष्य स्वयं ही अपना संचालन करे। इस संबंध में हम कुछ बातें उस वाचा में देखेंगे जो परमेश्वर ने नूह से बांधी थी। और हम इस बात को ध्यान में रखें कि जब परमेश्वर ने नूह के साथ वाचा बाधीं, तो उसने वह वाचा आप के और मेरे साथ भी बांधी है, तथा पूरी मानवजाति के साथ बांधी है।
नए निर्देश और व्यवस्थाए
उत्पत्ति 9:1 “फिर परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और बढ़ो, और पृथ्वी में भर जाओ।“
क्योंकि हम जानते हैं कि जलप्रलय से पहले पृथ्वी पर एक सभ्यता थी, इसलिए यहाँ पर मूल भाषा में नूह को पृथ्वी पर फिर से भर जाने को कहा गया है, और अब जलप्रलय़ के बाद एक सभ्यता होगी। (जब आदम से पृथ्वी को फिर भरने के लिए कहा गया, तो हम मानते हैं कि आदम से पहले भी जीवित प्राणी रहते थे – मुझे नहीं पता कि उन्हें क्या कहना चाहिए। वे भी परमेश्वर द्वारा रचित जीवित प्राणी ही थे, इससे आगे कुछ भी कहता केवल अनुमान लगाना होगा।
इस बात पर गौर करें कि परमेश्वर नूह से सब से पहले कहता है कि “फूलो-फलो और बढ़ो, और पृथ्वी में भर जाओ।“ मानव जाति के विकास और आगे बढ़ने के लिए कहा गया है। याद रखें कि परमेश्वर ने यह आज्ञा किसी विशेष परिस्थिति के अंतरगत दिया था। आज हम जन्संख्या विस्फोट के समय में जी रहे हैं, और आज तो जन्संख्या हद से अधिक बढ़ गई है जो बहुत खतरनाक है। जो भी हो, नूह एक अनोखी स्थिति में खड़ा हुआ था। वह और केवल उसका परिवार ही अकेले बचा हुआ था। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप सुबह-सुबह मार्ग में गाड़ी चलाकर काम पर जा रहे हैं, और आपके आगे, पीछे, दाईं ओर, बाईं ओर, गाड़ियां ही गाड़ियां हैं, गाड़ियां हॉर्न बजा रही हैं आप ट्रैफिक जाम में फंसे हैं। फिर लगभग एक साल बाद आप मार्ग पर जाते हैं और वहाँ कोई दूसरी गाड़ी नहीं होती। आपकी गाड़ी ही अकेली होती है। आप चाहें तो सभी ट्रैफिक सिगनल तोड़ कर जा सकते हैं। आपको उनकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आप ही अकेले गाड़ी चला रहे हैं। शायद यह हमारे लिए काफी अजीब अनुभव होगा? नूह के समय में उसका अनुभव ऐसा ही रहा होगा। तब आगे पद 2 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 9:2 “तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा: ये सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं।“
उस वाचा का अगला भाग है, संसार के सभी प्राणियों पर मनुष्य की सुरक्षा और उसका अधिकार। मैं समझ सकता हूँ कि इससे पहले यह संबंध अलग रहार होगा। इससे पहले मनुष्य मांसाहारी नहीं था। सभी जानवर पालतू थे, और कोई भी ऐसे जानवर को खाना पसंद नहीं करेगा जो पालतू हो। याद रखें कि जब बाढ़ आने वाली थी, तब सारे जानवर अपनी सुरक्षा के लिए नूह के पास आए थे; उन्हें उससे कोई भय नहीं था।
लेकिन अब जानवर इंसान से डरेंगे और खौफ खाएंगे। हालांकि, जानवरों की इास हालत के लिए इंसान ही ज़िम्मेदार है। जानवरों के साथ इंसान का बर्ताव एक बेरहम कहानी है। इंसान ने कई जानवरों के अस्तित्व को ही खत्म करने का प्रयास किया है। अगर सरकार दखल न दे, तो इंसान पैसे के लिए किसी भी जंगल के अनेक पशुओ का अस्तित्व ही समाप्त कर डाले। एक समय था जब जंगलों में जानवरों के बड़े-बड़े झुंड देखनले को मिलते थे, लेकिन उन्हें इंसान ने मार डाला। आज हमें जानवरों और पक्षियों की ज़िंदगी की सुरक्षा के लिए पनाहगाह चाहिए। यह अच्छी बात है कि हम ऐसा करने का प्रयास कर रहे हैं। अफ्रीका के जानवरों को खत्म किया जा रहा है। इंसान एक बहुत ही बेरहम प्राणी है। हमें जानवरों को इंसान से बचाने के लिए एक सरकार की आवश्यकता है। तब आगे पद 3 में लिखा है।
उत्पत्ति 9:3 “सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे; जैसा तुम को हरे हरे छोटे पेड़ दिए थे, वैसा ही अब सब कुछ देता हूँ।“
अब परमेश्वर मनुष्य के भोजन के लिए एक नया इन्तजाम करता है। जलप्रलय से पहले परमेश्वर ने मनुष्यों को खाने के लिए पृथ्वी के सब हरे पेड़ और पौधे दिए थे। परन्तु अ बवह नूह से कहता है कि वह पशुओं को भी खा सकता है। कुछ लोग खाने-पीने के मामले में बहुत ज़्यादा नियमित होते हैं, और अक्सर इस तरह की बातें किसी व्यक्ति के धर्म का हिस्सा बन जाती हैं। मेरे एक मित्र हैं जो शाकाहारी हैं, और जब मैनें उसे बताया कि आदि काल में लोग शाकाहारी थे, जैसा बाइबल कहती है। इससे वह बहुत खुश हुआ। उसने इस बात पर बल देना चाहा कि इस कारण सभी मनुष्यों को शाकाहारी हो जाना चाहिए। मैनें उससे कहा कि “अगर मैं तुम्हारी जगह होता तो मैं इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्योंकि तुम्हें याद रखना चाहिए कि बाढ़ में शाकाहारी लोगों का ही एक बड़ा समुह समाप्त हो गया था। अगर उस समय खाने-पीने की चीज़ों से उन्हें किसी भी तरह से लाभ हुआ होता, तो वे मारे नहीं जातेे।” हम यहाँ देखते हैं कि अब परमेश्वर मनुष्य को मांस खाने की अनुमति देते हैं।
परन्तु इन सब के ऊपर परमेश्वर लहू खाने की अनुमति नहीं देता है। आइए हम पढ़ें 9 का पद 4, लिखा है।
उत्पत्ति 9:4 “पर मांस को प्राण समेत अर्थात् लहू समेत तुम न खाना।“
अर्थात लहू को बहा दिया जाना चाहिए। लहू में जीवन होता है। लहू बहा देने का अर्थ है कि उस पशु को दयालुता से मारा जाना चाहिए, न कि उसे तड़पाया जाए और यह पक्का हो जाए कि वह सच में मर चुका है। कुछ लोगों को शिकार खेलना पसंद है, लेकिन मुझे पसंद नहीं है। कुछ लोग सिर्फ शौक के लिए जानवरों को घायल कर देते है और वह रेंगता हुआ दूर चला जाता है, जिससे उसे ढूंढ कर पकड़ा नहीं जाता। मुझे ऐसा करना पसंद नहीं है। परमेश्वर कहते हैं कि जब तुम जानवरों को खाने वाले हो, तो यह पक्का कर लो कि तुम उसे लहू के साथ न खाओ। लहू निकाल देना चाहिए, जिससे यह निश्चित हो जाए कि जानवर को दयालुता से मारा गया है। तब आगे पद 5 में कहतास है।
उत्पत्ति 9:5 “और निश्चय ही मैं तुम्हारे लहू अर्थात् प्राण का बदला लूँगा: सब पशुओं और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूँगा; मनुष्य के प्राण का बदला मैं एक एक के भाई बन्धु से लूँगा।“
यह एक बहुत ही रोचक कथन है, लेकिन हममें से जो लोग जो सीमावर्ती इलाकों में नहीं रहते, उनके लिए यह उतना मायने नहीं रखता। हालांकि, कुछ जानवर ऐसे भी हैं जिनसे हमारा सामना कभी काल होता है जैसे कि वानर की कुछ प्रजाति, रेबीज या बीमारी फैलाने वाले चूहे जो इंसानों के लिए असली खतरा पैदा करते हैं।
जो भी हो मित्रों परमेश्वर ने जलप्रलय के बाद संसार की पूरी व्यवस्था को बदल दिया। हम आगे देखेंगे कि परमेश्वर की इस संबंध में और क्या योजना थी। आइए आज के अध्ययन के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दे और प्रार्थना के साथ समाप्त करें।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
