उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 6:14-7:9
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आप क्या सुनेंगे

डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 6:14-7:9
कार्यक्रम : #0024

पढ़ें

प्रिय मित्रों, आप सबको प्रभु यीशु के मीठे नाम में नमस्कार। मुझे आशा है कि, हमेशा की तरह आज भी आप मेरे साथ बाइबल अध्ययन के लिए तैयार हैं। एक बार पुनः आप का स्वागत है। पिछले अध्ययन प्रसारण के अंत में हम उत्पत्ति 6:13 पद को देख रहे थे। आज हम उसी स्थान से अपनी बाइबल अध्ययन को आरंभ करेंगे, जहाँ हमने उसे पिछले अध्ययन में रोक दिया था।
मित्रों, हमने देखा था की नूह ने परमेश्वर पर विश्वास करता है और बिना बारिसा के भी जहाज़ बनाना आरंभ कर देता है तथा वह 120 वर्षांे तक इस कार्य को करता रहता और विश्वास में बना रहा।

नूह को जहाज बनाने का निर्देश

जलप्रलय की तैयारी के पहले परमेश्वर लोगों को एक र्प्याप्त अवसर दे रहा था कि वे फिराएँ। तो आइए हम पढ़ें उत्पत्ति अध्याय 6 का पद 14, लिखा है।

उत्पत्ति 6:14 “इसलिये तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, उस में कोठरियाँ बनाना, और भीतर बाहर उस पर राल लगाना।”

नूह से कहा गया कि “तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज़ बना ले।“ गोपेर की लकड़ी लगभग अविनाशी होती है, अर्थात् मज़बूत होतीी है और सड़ती नहीं है, जैसे हमारे देश में सागवान और शीशम की लकड़ी होती है।
उसे यह भी कहा गया, कि उसमें कोठरियाँ या कमरे बनाना। यहाँ पर शब्द कोठरी का विचार घांेसले से है। एक हाथी को कोठरी की आवश्यकता है लेकिन एक छछून्दर को इतने बड़े कोठरी की आवश्यकता नहीं थी। उसे कोने में कोई छोटी से जगह दी जा सकती थी। और उसे उतनी ही जगह की आवश्यकता थी।
तब आगे नूह से कहा गया कि, “भीतर और बाहर राल लगाना।“ अर्थात् उसे जलरोधक बनाना ताकि जल से कोई हानि न हो। इसके आगे हम पद 15 में पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 6:15 “इस ढंग से तू उसको बनाना: जहाज की लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ, और ऊँचाई तीस हाथ की हो।”
नूह के जहाज़ के बारे में बहुत से लोगों के मन में एक छाप है, जो उन्हें सण्डे स्कूल में, तस्वीर के द्वारा दी गई थी, जो एक छोटी नाव पर बने घर के समान है। इस प्रकार की नाव हम कश्मीर में देखते हैं, लेकिन नूह का जहाज़ ऐसा नहीं था। वास्तव में मेरे लिए यह एक हास्यप्रद नकल है, जिसे तस्वीरों में दिखाया गया है या अकसर प्रगट किया जाता है। यह उस जहाज़ का व्यंगचित्र या मजाक है जो वास्तव में वैसा नहीं था।

मित्रों, परमेश्वर के द्वारा, जहाज़ बनाने के लिए, दिए गए आदेश, इस बात को प्रकट करते हैं कि यह जहाज़ पूर्णतया, काफी बड़ा था। “जहाज़ की लम्बाई तीन सौ हाथ थी।“ यदि एक हाथ का माप, 18 इन्च का हो, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह जहाज़ कितना बड़ा रहा होगा।

अब यहाँ पर प्रश्न उठता है कि उन दिनों में वे जहाज़ और अधिक मज़बूत कैसे बना सकते थे? मित्रों, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि हम लोग यहाँ पर गुफ़ाओं में रहनेवाले आदिमानव के साथ काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन यहाँ पर हम एक बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति के साथ बात विचार कर रहे हैं। आप देखें कि आज जो बुद्धिजीवि वंशक्रम है वह नूह से होकर आया है, क्योंकि वह भी एक बुद्धिमान व्यक्ति था।
मित्रों, इस बात का ध्यान रखिए कि नूह यहाँ पर समुद्र में चलनेवाला जहाज़ नहीं बना रहा है, जिसे 50 फुट लम्बी लहरों का सामना करना पड़े और फिर भी स्थिर रहे। वह जो कुछ भी बना रहा है, वह सिर्फ मनुष्य, और जानवरों के, जीवन को बचाने के लिए एक साधन बना रहा था, ताकि वह आने वाली बाढ़ के पानी में टिका रह सकें। उन बड़ी लहरों में से होकर जाने के लिए नहीं, परन्तु सिर्फ जलप्रलय या बाढ़ के आने का इन्तज़ार करने के लिए था। और इसी कारण से समुद्र में चलनेवाले जहाज़ से नूह के जहाज़ में आपको, बहुत अंतर नज़र आएगा। और यही हमारे विचार को आगे बढ़ाने के लिए एक महान मार्ग खोलता है।

जैसे हमने पहले देखा था कि यदि एक हाथ 18 इन्च के बराबर है, तो 300 हाथ का मतलब है कि जहाज़ की लम्बाई 450 फीट थी। वह एक सुन्दर और लम्बा जहाज़ था, परन्तु यहाँ पर तुलनात्मक नाप है, जो मेरी रूचि को ओर अधिक बढ़ा देता है। उदाहरण के लिए, द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अमेरिका द्वारा एक युद्धपोत बनाया गया था जिसकी लम्बाई 624 फीट, चौड़ाई 106 फीट है तथा उँचाई करीब 29 फीट थी। नूह के जहाज से तुलना करने पर, इस जहाज का अनुपात भी लगभग वैसा ही था; इसलिए वह जहाज बिल्कुल भी बेतुका नहीं दिखता रहा होगा, बल्कि आज जिस तरह से जहाज़ बनाए जाते हैं, उनकी तुलना उसी अनुपात में रखी जाती है।
(एक चौरस जहाज का चित्र उसके माप के साथ )

आइए हम पढें उत्पत्ति 6:16 लिख है।
उत्पत्ति 6:16 “जहाज में एक खिड़की बनाना, और उसके एक हाथ ऊपर से इसकी छत बनाना, और जहाज की एक ओर एक द्वार रखना, और जहाज में पहला, दूसरा, तीसरा खंड बनाना।”

नूह से कहा गया कि, “जहाज़ में एक खिड़की बनाना।“ यह खिड़की, जहाज़ के बग़ल में एक छोटी दरार बनाना नहीं था। मित्रों, क्या आप कभी, रूक कर वहाँ की दुर्गन्ध के बारे में सोच सकते हैं? जो उन सभी जानवरों के एक साथ, उस स्थान पर रहने के कारण से रही होगी? जहाज़ में खिड़की एक हाथ ऊँची थी और यह जहाज़ के ऊपरी हिस्से तक बनी थी। ऐसा लगता है कि खिड़की छत से बिल्कुल थोड़ी सी दूरी पर थी। व्यायामशाला या जिम मंे आज इसी रीति से वायुसंचार या वेन्टिलेटरर्स लगाए जाते हैं। आज भी उन इमारतों में जिन में अनेक जानवर रखे जाते हैं ऊपर की ओर हवा निकलने की खिड़की बनाई जाती है जिससे दुर्गन्ध दूर की जा सके। इन सभी जानवरों के साथ वह जहाज रहने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था। लोग वहाँ पर बैठ रहे थे, और अपना भोजन खा रहे थे, और सो भी रहे थे। यह बहुत ही आरामदायक था और वहाँ गंदी दुर्गन्ध नहीं थी। कुछ लोगों का मानना है कि नूह को खिड़की खोलकर अपने सिर को बाहर निकाल कर सांस लेना पड़ा ताकि वह जीवित रह सके। मित्रों, यह एक मज़ाक है। यह सिर्फ मनुष्य की कोरी कल्पना है, जिसे हम यहाँ लिखित रूप में नहीं पाते हैं।

तब लिखा है, “और जहाज की एक ओर एक द्वार रखना।“ उस जहाज में केवी एक ही द्वारा था, और यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। मसीह यीशु ने कहा था। “मैं द्वार हूँ!“ तथा “भेड़ों का द्वार मैं हूँ“ और वह ही जहाज़ का द्वार है।

“और जहाज़ में पहला, दूसरा, तीसरा खण्ड बनाना।“ इस जहाज़ में तीन तल या माले थे। मैं इसे इस प्रकार से समझता हूँ कि एक छत सबसे ऊपर थी और एक सबसे नीचे, जो पानी को छूनेवाला हिस्सा था। इस रीति से कुल चार हिस्से रहे होंगे। क्या प्रत्येक छत के लिए एक द्वार था? मित्रों, मेरे विचार में जहाज़ में एक ही द्वार था और कोई दूसरा दरवाज़ा किसी तल्ले में नहीं था। और यह हमारे विषय के बाहर है।
अब हम जहाज़ में यात्रा करने वाले यात्रियों को देखते हैं, आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 6 का 17।
उत्पत्ति 6:17 “और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जलप्रलय करके सब प्राणियों को, जिन में जीवन का प्राण है, आकाश के नीचे से नष्ट करने पर हूँः और सब जो पृथ्वी पर है मर जाएँगे।”

परमेश्वर पृथ्वी पर, जानवरों पर और पक्षियों और मनुष्यों पर न्याय कर रहा था।

तब आगे पद 18, 19 और 20 में हम पढ़ते हैं,

उत्पत्ति 6:18 “परन्तु तेरे संग मै वाचा बाँधता हूँ: इसलिये तू अपने पुत्रों, स्त्री, और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना।“
उत्पत्ति 6:19 “और सब जीवित प्राणियों में से, तू एक-एक जाति के दो-दो, अर्थात् एक नर और एक मादा जहाज में ले जाकर, अपने साथ जीवित रखना।“
उत्पत्ति 6:20 “एक-एक जाति के पक्षी, और एक-एक जाति के पशु, और एक-एक जाति के भूमि पर रेंगनेवाले, सब में से दो-दो तेरे पास आएँगे, कि तू उनको जीवित रखे।”

“सब में से दो-दो तेरे पास आएँगे कि तू उनको जीवित रखे।“ नूह कोई जानवरों को पकड़ कर रखने वाला व्यक्ति नहीं था “जो बाहर जाकर उन्हें जीवित पकड़ लाता।“ वह एक बड़ा साहसी शिकारी भी नहीं था। उसे उन जानवरों के पीछे जाने की आवश्यकता नहीं थी, वे स्वयं उसके पास आए।

वे जानवर जिनकी प्रजाति खतरे में हैं वे ऐसा ही करेंगे। मुझे याद है कि जब हम भारत के उत्तरी क्षेत्र में घुमने को गए थे। तब अचानक ही हमें कुछ हिरण गांव के बाहर दिखाई दिए। उस स्थान पर उनका देखा जाना अनहोना था। एक हॉटल में भोजन करते समय मैंने पास बैठे एक वन अधिकारी से इस बात को पूछा तो उन्होंने कहा, अकसर पहाड़ों में जब बर्फ पड़ती है तब ऐसे कुछ जानवर अपने जीवन की सुरक्षा के लिए नीचे उतर आते हैं उसमें कोई अचम्भे की बात नहंी है। वे अपने जीवन को सुरक्षित रखने के लिए मनुष्यों के निकट आ जाते हैं। उसी प्रकार जलप्रलय के समय मुझे नहीं लगता की सभी जानवरों को एकत्र करने में नूह को कोई समस्या हुई होगी। तब आगे पद 21 और 22 में लिखा है।
उत्पत्ति 6:21 “और भाँति-भाँति का भोज्य पदार्थ जो खाया जाता है, उनको तू लेकर अपने पास इकट्ठा कर रखना जो तेरे और उनके भोजन के लिये होगा।“
उत्पत्ति 6:22 “परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।”
अब यहाँ पर नूह को बहुत ही व्यावहारिक कार्य करना था। जानवरों को खिलाने के लिए अपने बहुत सारे भोज्य पदार्थ, या पुआल जहाज़ के अन्दर रखे जाना था। आप में से कुछ लोग कहेंगे, लेकिन कुछ जानवर तो माँस खाते हैं उनका क्या। वे एक दूसरे को ही खा लेंगे। मैं नहीं समझता कि उन्होंने ऐसा किया। क्योंकि जलप्रलय के पहले तक न तो मनुष्य और न ही पशु माँस खाया करते थे। कोई भी जानवर माँस नहीं खाते थे उसमें कोई मांसाहारी जानवर नहीं थे। हमें यशायाह 11:6-7 पद में बताया गया है कि परमेश्वर के राज्य में शेर और मेमना एक साथ लेटेंगे और शेर, बैल के समान घास खाएगा। निश्चय ही ऐसा होनेवाला है, और सम्भवतः यहाँ जहाज़ में जानवरों की वास्तविक स्थिति दिखती है।
इसके साथ ही उत्पत्ति का छठवां अध्याय समाप्त होता है औश्र अब हम सातवें अध्याय से अपना अध्ययन जारी रखेंगे।

अध्याय 7

विषय: नूह, उसका परिवार और सभी पशु-पक्षियों का जहाज में प्रवेश करना, सब देहधारियों का विनाश और जो जहाज़ में हैं उनका उद्धार।
नूह, उसका परिवार और सभी पशु-पक्षियों का जहाज में प्रवेश करना
आइए हम पढ़ें अध्याय सात का पद 1 लिखा है।
उत्पत्ति 7:1 “तब यहोवा ने नूह से कहा, “तू अपने सारे घराने समेत जहाज में जा; क्योंकि मै ने इस समय के लोगों में से केवल तुझी को अपनी दृष्टि में धर्मी देखा है।”

अब प्रश्न उठता है कि नूह धर्मी क्यों था? यह विश्वास के कारण हुआ था, जैसे बाद में अब्राहम भी अपने विश्वास के द्वारा धर्मी गिना गया। उत्पत्ति 15:6 “उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।“ नूह ने परमेश्वर पर विश्वास किया और उसके लेखे में यह धर्मी गिना गया। इब्रानियों 11:7 में लिखा है “विश्वास के द्वारा नूह ने … जहाज़ बनाया… “, यही कारण था कि परमेश्वर ने उसे बचाया।

क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया कि इस न्याय के समय में परमेश्वर इस व्यक्ति पर कितना दयावन्त था? पद 1 में वह कहता है, “घराने समेत जहाज़ में आ…“ आज यही निमंत्रण, प्रभु यीशु मसीह, सारे मानवजाति को देता हैं। मत्ती 11:28 में लिखा है, “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।“ तथा उत्पत्ति 7:16 में हम पढ़ते हैं लिखा है कि “… तब यहोवा ने जहाज़ का द्वार बन्द कर दिया।“ क्या यह सुन्दर और अद्भुत बात नहीं है? और अन्ततः अध्याय 8 का आरंभ इस वचन से होता है कि, “और परमेश्वर ने नूह की सुधी ली।“ यह कैसी अद्भुत बात है। परमेश्वर बहुत आसानी से नूह के बारे में भुला सकता था। कई वर्षों के बाद वह कहता कि, ओह! “मैं तो उस व्यक्ति के बारे में सब कुछ भूल ही गया था जो वहाँ नीचे है।“ यह तो बहुत बुरी बात होती है कि नहीं? परन्तु परमेश्वर उसे नहीं भूला। परमेश्वर ने नूह की सुधी ली। परमेश्वर कभी नहीं भूलता है, वह आपको भी याद रखता है। सिर्फ आपकी एक चीज़ वह याद नहीं रखता है और वह है आपका पाप, जो क्षमा कर दिया गया है। यदि आप उसके पास उद्धार पाने के लिए आते हैं तब वह आपके पापों को, चाहे छोटे हो या बड़े कभी भी याद नहीं करता है। मित्रों, यह क्या ही सुहावनी बात है।

अब नूह और उसके परिवार जहाज में प्रवेश करात है। क्या आप जानते हैं कि सृष्टि की रचना की कहानी के समान, नूह की कहानी में भी परमेश्वर का आत्मा पूरे संसार पर मण्डलाता रहा? मेरी तो इच्छा है कि इस समय मैं आपको बेबीलोन का वृत्तान्त दे सकता। आप को एक काम करना होगा कि दोनों को पढ़ कर उनकी तुलना कर अन्तर देखिए। दूसरे वृत्तान्त पूर्णतः असंगत और बेतुके है। मित्रों, यह एक सच्चाई है कि बहुत से देशों और लोगों के पास सृष्टि और जलप्रलय ये दोनों के वृत्तान्त हैं, और यह जलप्रलय आप से कुछ कहता हैं। मैं भी आप से कहना चाहता हूँ कि दोने की सत्यता का कुछ आधार है। यदि लोग, कोई बनावटी कहानी बना रहे होते, तो ये कभी भी, एक ही प्रकार से घटना का वर्णन नहीं करते। यदि आप जानना चाहते हैं कि कौन सा सही है, तो आप इसकी तलना कीजिए। उदारहण के लिए – बेबीलोन का लेख पूर्णतः एक बेतुकी कहानी प्रस्तुत करता है, जिसमे उनके ईश्वरों के बीच लड़ाई होती है जो एक, दूसरे के विरोध में है, और यही कारण है कि जलप्रलय आया। परन्तु इसके विपरीत, बाइबल हमें बताती है कि जलप्रलय मनुष्य के ऊपर, उसके पापों के कारण, परमेश्वर का न्याय था। और यह हमें एक सही अर्थ प्रदान करता है, जो विश्वसनीय और भरोसेमंद है। तब आगे पद 2 और 3 में लिखा है।
उत्पत्ति 7:2 “सब जाति के शुद्ध पशुओं में से तो तू सात-सात जोडे़, अर्थात् नर और मादा लेना: पर जो पशु शुद्ध नहीं है, उन में से दो-दो लेना, अर्थात् नर और मादा।“
उत्पत्ति 7:3 “और आकाश के पक्षियों में से भी, सात-सात जोड़े, अर्थात् नर और मादा लेना: कि उनका वंश बचकर सारी पृथ्वी के ऊपर बना रहे।”

मित्रों, कई वर्ष पहले डॉ. हैरी राईमर के विरूद्ध यही बात एक मुकदमें का आधार बना था, जब उन्होंने उस मनुष्य को पचास हज़ार रूपये देने की घोषणा की जो बाइबल में कोई विरोधाभास बातें खोज के दिखाने का काम कर सके। बहुत से उदारवादी धर्मविज्ञानी या धर्मज्ञानी लोग थे जिन्होंने अदालत में यह गवाही दी की बाइबल में विरोधाभासी बातें लिखी हुई है। प्रश्न है कि क्यों परमेश्वर यहाँ पर पहले एक-एक जाति में से दो-दो लेने के लिए कहता है, लेकिन अब वह सब जाति से सात-सात लेने के लिए कह रहा है? अंततः डॉ. हैरी राईमर केस जीत गए। लेकिन आपको केवल इतना करना है कि अपनी बाइबल पलट कर देखें, कि जब नूह जहाज़ से बाहर निकला तो उसने किस पशु का बलिदान चढ़ाया? अब प्रश्न उठता है, कि यदि वह दो-दो जोड़े से अधिक नहीं लेता, तो उसे, ये शुद्ध पशु कहाँ से मिलते? ये शुद्ध पशु थे जिसे उसने सात-सात जोड़े करके लिया था। और अब हम जान सकते हैं, कि उसने, शुद्ध पशुओं में से, सात-सात जोड़े क्यों लिए थे। तथा जो शुद्ध पशु नहीं थे, उनमें से दो-दो जोड़े, एक नर और एक मादा करके क्यों लिया।
आकाश के पक्षियों में से भी, सात-सात अर्थात् नर और मादा लेना, वे जो शुद्ध हैं। तब आगे अध्याय 7 के पद 4 और 5 में लिखा है।
उत्पत्ति 7:4 “क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; जितने प्राणी मैं ने बनाए है उन सब को भूमि के ऊपर से मिटा दूँगा।”
उत्पत्ति 7:5 “यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।“
मित्रों, सिर्फ सात दिन बचे थे, और संसार के लोग, उस समय भी, अपनी कठोरता से, मन फिरा कर, नूह के जहाज़ में प्रवेश कर सकते थे, और परमेश्वर उन्हें बचा लेता। उन्हें सिर्फ परमेश्वर पर विश्वास करना था। इससे आगे पद 6 से 9 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 7:6 “नूह की आयु छः सौ वर्ष की थी, जब जल प्रलय पृथ्वी पर आया।“
उत्पत्ति 7:7 “नूह अपने पुत्रों, पत्नी, और बहुओं समेत जल-प्रलय से बचने के लिये जहाज में गया।“
उत्पत्ति 7:8 “शुद्ध और अशुद्ध, दोनों प्रकार के पशुओं में से, पक्षियों।“
उत्पत्ति 7:9 “और भूमि पर रेंगनेवाले जन्तुओं में से भी, दो दो, अर्थात् नर और मादा, जहाज में नूह के पास गए, जिस प्रकार परमेश्वर ने नूह को आज्ञा दी थी।“
बाइबल में कहीं पर यह नहीं लिखा हैं कि नूह बाहर गया और सभी जानवरों को लेकर जहाज़ के अन्दर आया। ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि वे स्वयं जहाज़ के अन्दर आए।
मित्रों परमेश्वर का धन्यवाद हो कि वह क्रोध करते समय भी दया करना स्मरण रखता है यह हमारे परमेश्वर का गुण हैै। आइए हम उसे इस कारण से धन्यवाद दें। यदि आप के पाय कोई प्रश्न या शंका है तो कृपया हमसे सम्पर्क करना न भूले। आइए प्रार्थना के साथ समाप्त करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

आज के पैसेज से आपने जो मुख्य बात सीखी, उसे लिखें।

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