उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 4:8 - 5:5
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आप क्या सुनेंगे

डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 4:8 – 5:5
कार्यक्रम : #0021

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प्रिय मित्रों नमस्कार। एक बार पुनः आप का सत्यवचन के नए प्रसारण में स्वागत है जो दैनिक बाइबल अध्ययन प्रसारण है। हमनें पिछले भाग में आदम और हव्वा के पुत्र कैन और हाबिल का जन्म देखा था और जाना था कि परमेश्वर कैन की भेंट अस्विकार करता है जिस कारण वह उदास हो जाता है। तब परमेश्वर उसे दूसरा अवसर प्रदान करता है। अब हम आगे देखते हैं कि उस क्रोध और अवसाद में –

कैन, हाबिल की हत्या करता है।

आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 4 का 8 और 9 पद, लिखा है।
उत्पत्ति 4:8 “तब कैन ने अपने भाई हाबिल से कुछ कहा: और जब वे मैदान में थे, तब कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढ़कर उसे घात किया।“
उत्पत्ति 4:9 “तब यहोवा ने कैन से पूछा, तेरा भाई हाबिल कहाँ है? उस ने कहा मालूम नहीं: क्या मै अपने भाई का रखवाला हूँ?”

यह एक ढीठाईपूर्ण उत्तर था। और इससे स्पष्ट होता है उसे अपने भाई या उसके परमेश्वर के लिए बहुत कम आदर था। वह अपने कार्यों को छिपाने का प्रयत्न कर रहा था। लेकिन पवित्र-शास्त्र बाइबल में मत्ती 10:26 में लिखा हैं, “क्योंकि कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा।” यदि आपके कुछ गुप्त पाप हैं तो उस पर विचार करने की आवश्यकता है, उन पापों पर आप अच्छी तरह विचार कर लें, क्योंकि एक दिन सब पाप परमेश्वर के सामने खोले जाएँगे। परमेश्वर पहले से ही सब कुछ जानता है, इसलिए आप पहले ही, सब कुछ उसे बता दीजिए। कैन यह कहने की कोशिष कर रहा था। पापी या अपराधी नहीं है, “क्या में अपने भाई का रखवाला हूँ।” यह कितना निर्लजता भरा उत्तर है। तब आगे पद 10 में लिखा है।

उत्पत्ति 4:10 “उस ने कहा, तू ने क्या किया है? तेरे भाई का लहू भूमि में से मेरी ओर चिल्लाकर मेरी दोहाई दे रहा है!”
इब्रानियों की पत्री का लेखक इस बात को इब्रानियों 12:24 में कहता है, “और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिड़काव के उस लोहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है।” और हम पाते कि हाबिल के लहू ने हत्या के बारे में बातें की। परन्तु प्रभु यीशु मसीह का लहू छुटकारे और उद्धार की बातें करता है। तब आगे पद 11 और 12 में लिखा है।
उत्पत्ति 4:11 “इसलिये अब भूमि जिस ने तेरे भाई का लहू तेरे हाथ से पीने के लिये अपना मुँह खोला है, उसकी ओर से तू शापित है।“
उत्पत्ति 4:12 “चाहे तू भूमि पर खेती करे, तौभी उसकी पूरी उपज फिर तुझे न मिलेगी, और तू पृथ्वी पर भटकनेवाला और भगोड़ा होगा।”

आज के दिन में भी पृथ्वी मनुष्य के पाप के कारण श्रापित है और पृथ्वी ने अपना उपजाऊपन खो दिया है। आज हमारी पृथ्वी के कुछ उपजाऊ क्षेत्र में, बहुत अधिक संख्या में, जनसाधारण लोग भूखे मर रहे हैं। मनुष्य को इस धरती पर भरपूर पैदावार उत्पन्न करने के लिए बहुत मेहनत और सूझबूझ की आवश्यकता होती है। निश्चित रूप् में हाबिल का लहू पृथ्वी से पुकारता है, जो उसके भाई के द्वारा हत्या के समय पृथ्वी पर बहाया गया। तब उत्पत्ति 4 के 13 पद में कैन आगे कहता है,
उत्पत्ति 4:13 “तब कैन ने यहोवा से कहा, मेरा दंड सहने से बाहर है।”

अब यहाँ पर प्रश्न उठता है, यदि कैन का दण्ड उसके सहने से बाहर था तो वह परमेश्वर कि ओर क्यों नहीं फिरा, और अपने पापों को मानकर उनके लिए प्रायश्चित क्यों नहीं किया उसने अपने आपको परमेश्वर के दयापूर्ण हाथ में क्यों नहीं सौंपा? इसे सहना उसके लिए बहुत कठिन था, परन्तु परमेश्वर उसके लिए एक उद्धारकर्ता का प्रबन्ध कर रहा था, यदि वह परमेश्वर की ओर फिरता तब। तब आगे उत्पत्ति 4:14 पद में हम पढ़ते है,
उत्पत्ति 4:14 “देख, तू ने आज के दिन मुझे भूमि पर से निकाला है और मै तेरी दृष्टि की आड़ मे रहूँगा और पृथ्वी पर भटकनेवाला और भगोड़ा रहूँगा; और जो कोई मुझे पाएगा, मुझे घात करेगा।”
अब यहाँ पर कैन कहता है कि वह परमेश्वर कि दृष्टि से छिपा रहेगा। और वास्तव में ऐसा ही हुआ।

लेकिन यहाँ आश्चर्य की बात है कि परमेश्वर उसकी सुरक्षा करता हैं: वास्तव में परमेश्वर एक हत्यारे और अपराधी को शरण दे रहा था। तब हम आगे उत्पत्ति 4:15 में पढ़ते है,
उत्पत्ति 4:15 “इस कारण यहोवा ने उस से कहा, जो कोई कैन को घात करेगा उस से सात गुणा पलटा लिया जाएगा। और यहोवा ने कैन के लिये एक चिन्ह ठहराया ऐसा न हो कि कोई उसे पाकर मार डाले।”
मित्रों, मैं नहीं जानता कि वह क्या चिन्ह था। इस विषय में बहुत से लोगों के अलग-अलग विचार है तो मैं उसमें अपना और एक विचार जोड़ना नहीं चाहता। परन्तु हम देखते हैं कि परमेश्वर कैन की सुरक्षा करता हैं। इस समय तक परमेश्वर ने हत्या के संबंध में कोई भी व्यवस्था नहीं दी गई थी। लेकिन कैन एक पापी था, परन्तु वो आज्ञा उल्लंघन करनेवाला नहीं था, क्योंकि उस समय तक हत्या के संबंध में कोई व्यवस्था या कानून नहीं दिया गया था। उसका सबसे बड़ा पाप यही था, कि उसने परमेश्वर को ग्रहण योग्य बलिदान, भेंट नहीं लाया। जो कुछ उसने परमेश्वर के लिए लाया, उसमें उसके कार्य बुरे थे, और उसने, अपने भाई की हत्या करने के द्वारा, उस बुराई को प्रगट कर दिया।
अब हम आते हैं अगले विषय पर जो है, कैन की सन्तान और परमेश्वर रहित।
हम देखते हैं कि कैन परमेश्वर से दूर चला जाता है और वह एक एसी सभ्यता का निर्माण करता है जो पूर्णतः परमेश्वर से विमुख थी। अर्थात कैन की सन्तानों ने परमेश्वर रहित सभ्यता का निर्माण किया। आगे पद 16 में लिखा है।

उत्पत्ति 4:16 “तब कैन यहोवा के सम्मुख से निकल गया, और नोद् नाम देश में, जो अदन के पूर्व की ओर है, रहने लगा।”

मैं जानता हूँ कि आज भी बहुत से लोग, जब कलीसिया में होते हैं, तब भी वे “नोद जैसे देश में वास करते हैं।“ लेकिन मैं यह नहीं जानता कि वह वास्तविक नोद नामक स्थान कहाँ है। कई बार विचार हूँ कि वह स्थान कहाँ हो सकता है, परन्तु यह कल्पना मात्र है। हमें बताया गया है कि कैन उस स्थान से निकल गया और नोद देश में वास करने लगा। तब आगे पद 17 में लिखा है।

उत्पत्ति 4:17 “जब कैन अपनी पत्नी के पास गया और वह गर्भवती हुई और हनोक को जन्म दिया, फिर कैन ने एक नगर बसाया और उस नगर का नाम अपने पुत्र के नाम पर हनोक रखा।”

मनुष्य एक अरसे से ऐसा करते आ रहा है, कि वह शहरों, कसबों, मार्गों यह अन्य स्थानों का नाम अपने या अपने प्रियों के नाम पर रखता आ रहा है। आप मसीही क्षेत्र में भी ऐसा देख सकते हैं कि लोग अपने नाम पर ही स्कूल या संस्थाओं का नाम रखते हैं। मनुष्य को ऐसार करने ो खुशी मिलती है, चाहे वे मसीही संप्रदाय से हो या फिर कैन के वंश के हों।

परन्तु यहां पर नगरीय और शहरी जीवन का आरंभ होता देखते हैं। लिखा है, आज मनुष्यों के लिए शहर एक बड़ी समस्या बन चुके है। लोग कहते हैं कि आज शहर समाप्त हो रहे हैं, फिर भी संसार के सभी कोने से लोग शहर की ओर भागते नज़र आते हैं। तब आगे पद 18 और 19 में लिखा है।
उत्पत्ति 4:18 “और हनोक से ईराद उत्पन्न हुआ, और ईराद ने महूयाएल को जन्म दिया, और महूयाएल ने मतूशाएल को, और मतूशाएल ने लेमेक को जन्म दिया।“
उत्पत्ति 4:19 “और लेमेक ने दो स्त्रियाँ ब्याह ली: जिन में से एक का नाम आदा, और दूसरी का सिल्ला है।”
यहाँ बहुपत्नीवाद या एक से अधिक पत्नी रखने कि प्रथा आरंभ होती। यहाँ पर हम देखते हैं कि लेमेक वह कार्य कर रहा है जो परमेश्वर की इच्छा के विपरित और परमेश्वर ने जो मनुष्य के लिए नियुक्त किया है उसके विपरित है। आप बाइबल में कहीं भी यह नहीं पाएँगे कि परमेश्वर ने एक से अधिक पत्नी रखने की अनुमति दी हो। यदि आप उस वृतान्त को ध्यानपूर्वक पढ़ेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि परमेश्वर इसका तिरस्कार करता है। वह इसका विवरण भी देते हैं, क्योंकि वह ऐतिहासिक विवरण दे रहे हैं, और यही उसका आधार है जिसे हमें यहाँ दिया गया है।
“आदा” का अर्थ है आनन्द, खुशी या श्रृंगार, सजावट है, मेरा विचार है कि य कवह पहली स्त्री है जिसने सौंदर्य प्रसाधनों को बढ़ावा दिया। “सिल्ला” का अर्थ है छिपाना। इससे मैं यह समझता हूँ कि वह नख़रेबाज थी। लेमेक ने दो स्त्रियों को अपनी पत्नीयाँ कर ली और यह निश्चित है कि वह समस्या में था। हम आगे देखेंगे कि उनका क्या हुआ।
लेकिन अब यहाँ पर वह सभ्यता आरंभ हुई, जो कैन की सभ्यता है। तब आगे हम पद 20 में पढ़ते है,
उत्पत्ति 4:20 “आदा ने याबाल को जन्म दिया। वह तम्बुओं में रहना और प्शु-पालन इन दोनों रीतियों का प्रवर्तक हुआ।“
“वह तम्बुओं” में रहने वालों का पिता था।” बहुत समय के बाद पौलुस प्रेरित भी तम्बू बनाने वाला हुआ, परन्तु यहाँ पर तम्बू बनाने वाला पहला ठेकादार हमें देखने को मिलता है। “और जानवरों का पालन करने वाला।” अर्थात यहाँ पर वह पहली पशुशाला का संस्थापक हुआ। आगे पद 21 में लिखा है,
उत्पत्ति 4:21 “और उसके भाई का नाम यूबाल था: वह वीणा और बाँसुरी आदि बाजों के बजाने की सारी रीति का प्रवर्तक हुआ।“
यहाँ पर संगीतकारों का आरंभ हुआ, जब हम आज आधुनिक संगीत सुनते हैं तो मुझे लगता है कि आप में से कई लोग सहमत होंगे, कि यह कैन की सभ्यता से आरम्भ हुआ है। आगे हम पद 22 में गढ़नेवाले को पाते है,
उत्पत्ति 4:22 “और सिल्ला ने भी तूबल-कैन नामक एक पुत्र को जन्म दिया: वह पीतल और लोहे के सब धारवाले हथियारों का गढ़नेवाला हुआ। तूबल-कैन की बहिन नामा थी।“
यहाँ पर हम गढ़नें वाले कारीगरों को देखते हैं। तब आगे पद 23 और 24 में हम देखते हैं, लिखा है।
उत्पत्ति 4:23 23 “और लेमेक ने अपनी पत्नियों से कहा, “हे आदा और हे सिल्ला, मेरी सुनो; हे लेमेक की पत्नियो, मेरी बात पर कान लगाओ: मैं ने एक पुरुष को जो मुझे चोट लगाता था, अर्थात् एक जवान को जो मुझे घायल करता था, घात किया है।“
उत्पत्ति 4:24 “जब कैन का पलटा सातगुणा लिया जाएगा। तो लेमेक का सŸारगुणा लिया जाएगा।”

मित्रों, लेमेक कहता है, “जब कैन का बदला सातगुणा लिया जाएगा, तो लेमेक का सतहत्तरगुणा लिया जाएगा।” कैन सब कुछ करने के बाद भी ठीक रहा तो मैं भी रह पाऊँगा। आखि़रकार कैन ने स्वयं के बचाव में हत्या नहीं की परन्तु मैंने स्वयं के बचाव में हत्या की है। मैं नहीं जानता उसने हत्या की या नहीं। लेकिन वह कहता है कि उसने अपने बचाव के लिए हत्या की, मैं यह भी नहीं जानता कि उसकी दोनों पत्नियाँ इसमें शामिल थी या नहीं। या वह उनमें किसी का बचाव कर रहा था। हमें यह नहीं बताया गया है कि धटनाक्रम क्या था। लेकिन लेमेक यह महसूस करता है कि उसका पलटा सत्तर गुना लिया जाएगा। परन्तु हमारे प्रभु यीशु ने शमौन पतरस से कहा कि वह अपने शत्रु को सात के सत्तर गुणा बार माफ करे। आगे हम शेत के बारे में पद 25 और 26 में पाते है,
उत्पत्ति 4:25 “आदम अपनी पत्नी के पास फिर गया, और उसने एक पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम यह कह के शेत रखा: “परमेश्वर ने मेरे लिये हाबिल के बदले जिसको कैन ने घात किया, एक और वंश ठहरा दिया है।”

उत्पत्ति 4:26 “शेत के भी एक पुत्र उत्पन्न हुआ, और उसने उसका नाम एनोश रखा; उसी समय से लोग यहोवा से प्रार्थना करने लगे।“

इस पद के आधार पर स्पष्ट रूप से यह पता चलता है कि यहीं से मनुष्य ने परमेश्वर के नाम को पुकारना आरंभ किया।
(चित्र)

अध्याय 5
विषय: यह आदम के जीवन की कहानी का अन्तिम अध्याय, हनोक की रोमांचक कहानी, तथा हनोक से नूह की वंशावली का अध्याय।
उत्पत्ति की पुस्तक के पहले भाग, अर्थात उत्पत्ति 1 से 11 अध्याय में हम संसार कि घटनाओं को दखते हैं। सब से पहले – सृष्टि की रचना, फिर मनुष्य का पाप में गिरना, और अब अध्याय 5 से 9 में हम जलप्रलय को देखेंग। अध्याय 5 में हमारे पास शेत से आरंभ होती हुई आदम की वंशवली का वर्णन मिलता है। हमें कैन की वंशावली भी बताई गई थी जो अब छोड़ दी जाती है। इसका उल्लेख पुनः तब ही किया जाएगा जब इस धर्मी की वंशावली पुरी हो जाएगी। उत्पत्ति की पुस्तक में आप इसी क्रम को देख सकते हैं।
यदि एक प्रकार से देखा जाए तो उत्पत्ति की पुस्तक का पाँचवा अध्याय सबसे अधिक निराशाजनक और बाइबल में सबसे अधिक उदासी से भरा अध्याय है। इसका कारण है, कि यह कब्रीस्तान से होकर चलने जैसा है। परमेश्वर ने आदम से उत्पत्ति 2:17 में कहा था, “……… क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।” और आदम की सभी संतानों की मृत्यु हुई। 1 कुरिन्थियों 15:22 में पौलुस कहता है, “जैसे आदम में सब मरते हैं, ……।“
आदम की वंशावली का अन्तिम अध्याय
अध्याय 5 के पद 1 और 2 में लिखा है।
उत्पत्ति5:1 “आदम की वंशावली यह है। जब परमेश्वर ने मनुष्य की सृष्टि की तब अपने ही स्वरूप में उसको बनाया।“
उत्पत्ति 5:2 “उसने नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टि की और उन्हें आशीष दी, और उनकी सृष्टि के दिन उनका नाम आदम रखा।“
लिखा है, “उन्हें आशीष दी, और उनकी सृष्टि के दिन उनका नाम आदम रखा।“ आदमी नहीं पर आदम कहा। उसने उसे आदम कहा, तथा हव्वा उसका दूसरा भाग है।
“आदम की वंशावली” यह अभिव्यक्ति दूसरी बार हमें नये नियम की पुस्तक के आरंभ में मिलती है, और वहाँ पर इसे “यीशु मसीह की वंशावली” कहा गया है। ये दो पुस्तक हैं जैसा हम पहले से देखते आ रहे हैं कि दो वंशावलियाँ है, दो वंशक्रम हैं और वे दोनों एक दूसरे के विरोधी हैं। शैतान के वंश और प्रभु यीशु मसीह के वंश के बीच का संघर्ष लम्बा चलने वाला है और लम्बा चलेगा। अब जिस वंश का हम अनुसरण कर रहे हैं, वह शेत का वंश है, और यही वंश है जिससे प्रभु यीशु मसीह अन्ततः आने वाला हैं। अब आगे पद 3 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 5:3 “जब आदम एक सौ तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा उसकी समानता में उस ही के स्वरूप के अनुसार एक पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने उसका नाम शेत रखा।“
इस वचन के अनुसार जब आदम 130 वर्ष का हुआ। दूसरे शब्दों में कहें तो, जब परमेश्वर ने आदम को रचा, तो उसे क्या 30 साल का बनाया या 45 साल का बनाया? मैं नहीं जानता लेकिन कुछ भी कहना एक कोरी कल्पना ही होगी। यदि उसने उसे उतनी ही उम्र का बनाया तो क्या वह उतने ही साल का था? परन्तु परमेश्वर उसे किसी भी उम्र का बना सकता था। इस बात पर मैं कह सकता हूँ कि यह पृथ्वी की उम्र के विषय में पूछते गये बहुत से प्रश्नों का उत्तर देता है। कि यह कितनी पुरानी है? इसलिए जब कोई कहता है कि यह पत्थर अरबों साल पुराने हैं, जबकि वे वास्तव में नहीं जानते कि वे कितने पुराने हैं। हो सकता है कि जब परमेश्वर ने उन्हें रचा तो उसने उन्हें दो या तीन अरब साल का ही बनाया। यहाँ पर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आदम 130 वर्ष का हुआ या उसने इतना समय व्यतीत कर लिया तब उसके अपने स्वरूप में एक पुत्र को उत्पन्न हुआ। आदम को परमेश्वर की समानता में रचा गया था। हम आगे उत्पत्ति 5 के पद 4 और 5 में पढ़ते है।
उत्पत्ति 5:4 “शेत के जन्म के पश्चात् आदम आठ सौ वर्ष जीवित रहा, और उसके और भी बेटे बेटियाँ उत्पन्न हुईं।“
उत्पत्ति 5:5 “इस प्रकार आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।“
अब हम कब्रस्थान में आते हैं और वहां से आगे बढ़ते हैं। लिखा है, “आदम के और भी बेटे बेटियाँ उत्पन्न हुई, इस प्रकार आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।“
पद 8 में हम पढ़ते हैं कि शेत के साथ क्या हुआ। वह मारा गया। उसका एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसका नाम एनोश था, तब उसका क्या हुआ? पद 11 में हम पढ़ते हैं की वह भी मर गया। परन्तु उसका एक पुत्र हुआ जिसका नाम केनान था। तब उसके बाद केनान के साथ क्या हुआ? पद 14 में हम आगे पढ़ते हैं कि वह भी मर गया। और केनान का एक पुत्र हुआ जिसका नाम महल्लेल था, और फिर उसके साथ क्या हुआ? पद 17 में लिखा है कि वह भी मर गया। पर महल्लेल का एक पुत्र हुआ जिसका नाम येरेद था और पद 20 में लिखा है कि वह भी मर गया।
मित्रो यही क्रम आगे बढ़ता गया और आज भी मृत्यु हमारे शरीर पर राज्य करती है। आइए हम इस शारीरिक मृत्यु से नहीं पर आत्मिक और अनन्त मृत्यु के प्रति सजग रहें। परमेश्वर ने उसे बचने के लिए पूरा इन्तजाम कर दिया है। अगले प्रसारण में हम इस अध्ययन को आगे बढ़ाएंगे, आइए प्रार्थना के साथ समाप्त करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

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