उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 4:1 – 4:7
कार्यक्रम : #0020
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दोस्तों आप सभी को प्रेम भरा नमस्कार। एक बार फिर से आप का स्वागत है मित्रों। परमेश्वर के वचन का अध्ययन करना उसे अपने जीवन में लागू करने की प्रक्रिया का भाग है। आइए हम अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हुए उत्पत्ति चौथे अध्याय से अपना मनन आरंभ करें। इस अध्याय का मुख्य विषय है:
विषय: कैन और हाबिल का जन्म, परमेश्वर कैन को दूसरा अवसर देता है, कैन, हाबिल की हत्या करता है, कैन की सन्तान ईश्वर विहीन समाज का निर्माण, शेत का जन्म
तो आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 4 का पद 1, लिखा है।
उत्पत्ति 3 अध्याय में हमें पाप की जड़ या उसका मूल देखने को मिलता है और अध्याय 4 में पाप का फल। पाप कितना बुरा है? इस अध्याय में हम पाते हैं मनुष्य भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाने के कारण किसी प्रकार से विषाक्त भोजन या फूड पौयज़़निग का शिकार नहीं हुआ था। अध्याय 4 हमें प्रगट करता है कि मनुष्य को इसके कारण कितना प्रभावित हुआ है। अपने अविश्वास और अनाज्ञाकारिता के कारण वह परमेश्वर से विमुख हो गया है और एक ऐसा पाप किया कि उसने अपने और पूरी मानव जाति के ऊपर परमेश्वर का दण्ड ले आया, क्योंकि आप को और मुझे पाप का वही स्वाभाव विरासत में मिला है। हम में पाप का वही स्वाभाव है जो हमारे पिता का था, और आदम ने हम सभी को बहुत बुरा स्वाभाव प्रदान किया है। यह बात हमें आदम और हव्वा के दो पुत्रों में देखने को मिलता है। उनकी और भी सन्तानें उत्पन्न हुई थी, परन्तु हमें इस समय इन दोनों के बारे में ही बताया गया है।
कैन और हाबिल का जन्म
आइए जानने के लिए हम पढ़ें उत्पत्ति 4 का 1, लिखा है।
उत्पत्ति 4:1 “जब आदम अपनी पत्नी हव्वा के पास गया तब उस ने गर्भवती होकर कैन को जन्म दिया और कहा, “मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरुष पाया है।”
इस पद से यह सच्चाई प्रगट होती है कि आदम और हव्वा बात से अनजान थे कि यह संघर्ष बहुत लम्बा चलने वाला है। जब कैन का जन्म हुआ, तब हव्वा ने कहा होगा, “मैं ने यहोवा की सहायता से एक पुरुष पाया है। पर जैसा परमेश्वर ने कहा था कि स्त्री का वंश सर्प के सिर को कुचल डालेगा – और यही वह वंशज है।“ परन्तु कैन वह वंशज नहीं था। वह तो हत्यारा था, वह मानव जाति का उद्धारकर्ता नहीं था। यह हमारे उद्धारकर्त्ता के आने के बहुत पहले की बात है। कम से कम छः हज़ार वर्ष पहले की बात है – मैं सोचता हूँ कि यह, इससे भी अधिक समय हो सकता है – कि यह संघर्ष स्त्री के वंश और सर्प के वंश के बीच चलता रहा था। तब पद 2 में लिखा है।
उत्पत्ति 4:2 “फिर उसने उसके भाई हाबिल को भी जन्म दिया। हाबिल भेड़दृबकरियों का चरवाहा बन गया, परन्तु कैन भूमि पर खेती करने वाला किसान बना।“
ये ही वे दो पुत्र हैं जिन पर हम ध्यान कर रहे हैं। तब आगे पद 3 में कहता है।
उत्पत्ति 4:3 “कुछ दिनों के पश्चात् कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया।“
“कुछ दिनों के बाद“ इसका अर्थ है “दिनों के अंत में“, अर्थात सब्त के दिन, उस दिन जिसमें परमेश्वर ने विश्राम किया था।
लिखा है, “कैन भेंट ले आया“ – यहाँ पर “लाया“ से तात्पर्य, किसी निश्चित स्थान से है। वे परमेश्वर के लिए भेंटे किसी निश्चित स्थान पर आराधना के लिए ला रहे थे। तथा यह दर्शाता है कि वे प्रकाशन से ऐसा कर रहे थे। यह मैं इस करण जानता हूँ, क्योंकि इब्रानियों की पत्री 11:4 में हम पढ़ते हैं लिखा है: “विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया, और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई, क्योंकि परमेश्वर ने उसकी भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।“ हाबिल कैसे विश्वास के साथ भेंट चढ़ा सका? रोमियों की पत्री 10:17 में लिखा है – “अतः विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है।“ परमेश्वर ने अवश्य ही हाबिल को इस विषय में अपना वचन दिया रहा होगा, अन्यथा हाबिल कभी भी इस प्रकार विश्वास के साथ नहीं आ सकता था। तब “कैन यहोवा के पास भूमि की उपज में से कुछ भेंट ले आया।“ यहाँ पर उपज के साथ कोई समस्या नहीं है, आप यह मत सोचिए कि कैन बचा-कुचा सामान उठाकर लाया था, उसका स्वभाव पुराने कपड़े गरीबों को देने जैसा नहीं था। मैं सोचता हूँ कि जो उपज वह लेकर आया था वह उत्तम और लोगों के दिल को जीतने जैसा रहा होगा। उसने अपनी उपज से सर्वोत्तम, स्वादिष्ट और सुन्दर उपज परमेश्वर के पास भेंट के लिए लाया था। तब आगे पद 4 और 5 में कहता है।
उत्पत्ति 4:4 “और हाबिल भी अपनी भेड़-बकरियों के कई एक पहिलौठे बच्चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई; तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया।“
उत्पत्ति 4:5 “परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुँह पर उदासी छा गई।“
कोई कह सकता है कि, “मैं नहीं सोचता कि जो कैन के लिया उसमें कुछ गलत था।“ यहूदा अपनी पत्री के ग्यारवें पद में अंत समय के धर्मत्याग के विषय में कहता है, यहूदा 11 “…….. क्योंकि वे कैन की सी चाल चले, ……..।“ कैन की चाल क्या है? जब कैन परमेश्वर के पास अपनी भेंट लाया तब वह विश्वास के साथ नहीं लाया – वह अपनी सामर्थ्य से उसे लाया था। तथा जिस भेंट को वह लाया था, वह मनुष्य के पापी और दुष्ट स्वाभाव का इन्कार करती थी। परमेश्वर ने कहा, “बलिदान के लहू में से थोड़ा सा लेकर आ, जो छुटकारा देने वाले उस (उद्धाकर्ता) की ओर, जो इस संसार में आनेवाला था, उसकी पहचान है। उस आधार पर मेरे पास आ अपने कार्यों के आधार पर न आ, परन्तु उस लहू के आधार पर आ।
कैन की भेंट इस बात का भी इन्कार करती है कि मनुष्य परमेश्वर से अलग हो चुका है। वह ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे सब कुछ ठीक चल रहा है। यही बात आज उदारवादी विचारधारा के लोग कहते हैं, जब वे कहते हैं कि परमेश्वर सब मनुष्यों का पिता और सब मनुष्य भाई-भाई है। मेरे भाईयों और बहनों, आज भी हमारे साथ सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हम परमेश्वर की सन्तान के रूप में नहीं जन्में हैं। हमें परमेश्वर की सन्तान बनने के लिए फिर से जन्म लेना होगा, हमें नया जन्म लेना होगा। मनुष्य परमेश्वर से जुदा है, अलग है। कैन ने इस बात को मानन से इन्कार किया और आज एक बड़ी भीड़ है इस बात को मानन से इन्कार करती है।
तीसरी बात जिस कारण कैन की भेंट इन्कार की गई, कि मनुष्य परमेश्वर को अपने कार्य अर्पित नहीं कर सकता – परन्तु कैन सोचता था कि वह ऐसा कर सकता है। तीतुस 3:5 में लिखा है, “तो उसने हमारा उद्धार किया; और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ।“ कैन और हाबिल के बीच में उनके चरित्र का अन्तर नहीं था परन्तु अन्तर उनकी भेंटों में था जो वे ले कर आए थे। इन दोनों सन्तानों की एक ही पृष्टभूमि थी। एक ही वंश से थे। एक ही वातावरण में पले बढ़े थे। उन दोनों में कोई खास अन्तर नहीं था। आप यह मत सोचिए कि कैन को अपने पिता की तरफ से शराबी दादा के द्वारा बुरा स्वाभाव प्राप्त हुआ था। आप को मालूम है कैन का कोई दादा नहीं था। आप यह भी मत सोचिए कि हाबिल को अपनी नानी के द्वारा अपनी माता की तरफ से अच्छा स्वाभाव प्राप्त हुआ था। उन दोनों के के दादा-दादी और नाना-नानी नहीं थे। वे एक ही परिवार और वातावरण से थे। अन्तर केवल उनके द्वारा लाई गई भेंटो में था।
वह भेंट ही आज मनुष्यों में अन्तर प्रगट करती है। कोई भी मसीही यह नहीं कह सकता कि वह दूसरे से बेहतर है। एक बात जो उसे मसीही बनाती है, कि वह इस बात को स्वीकार करता है कि वह भी अन्य लोगों की तरह एक पापी है, और उसे भी एक भेंट की आवश्यकता है, उसे एक बलिदान की आवश्यकता है, और वह चाहता है कि कोई उसका स्थान ले कर उसके बदले मरा जाए। रोमियों की पत्री 3:25 में पौलुस मसीह के लिए कहता है, “उसे परमेश्वर ने उसके लहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित ठहराया…..।” इसलिए पौलुस आगे रोमियों 10:3 में लिखता है, “क्योंकि वे परमेश्वर की धार्मिकता से अनजान होकर और अपनी धार्मिकता स्थापन करने का यत्न करके परमेष्वर की धार्मिकता के आधीन न हुए।” आज बहुत से लोगों का यही चित्रण है। वे धर्म के माध्यम से परमेश्वर के पास आने का प्रयास करते रहते हैं, चर्च की सदस्यता लेकर, कुछ भले काम करने के द्वारा, परमेश्वर को ग्रहणयोग्य होने का प्रयास करते रहते हैं। परमेश्वर की धार्मिकता केवल तभी आपके पास आ सकती है, जब वो धार्मिकता परिपूर्ण हो। जो आपके लिए प्रभु यीशु के द्वारा दी गई हो। रोमियों 4:25 में हम पढ़ते हैं, “वह हमारे अपराधों के लिए पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिए जिलाया भी गया।” अर्थात वह हमारे धर्मी ठहरने के लिए जिलाया गया। वही है जिसने पाप का दण्ड सहने के लिए हमारा स्थान ले लिया। 2 कुरिन्थियों 5:21 में लिखा है, “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेष्वर की धार्मिकता बन जाएँ।” पौलुस पुनः फिलिप्पियों की पत्री 3:8-9 में लिखता है, “… जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूँ। और उस में पाया जाऊँ; न कि अपनी उस धार्मिकता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन् उस धार्मिकता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है …..।” कैन की धार्मिकता उसकी अपनी धर्मिकता थी। हाबिल की धार्मिकता, उस बलिदान में उसका विश्वास था जो मसीह यीशु के बलिदान की अपेक्षा कर रहा था।
मित्रों, हमने देखा था कि कैन और हाबिल एक साथ परमेश्वर की उपासना करने आए थे। ये दोनों ही समरूप थे। कुछ व्याख्याकारों का मानना है कि वे दोनों जुड़वाँ थे। परन्तु मैं सोचता हूँ कि वे दोनों जुड़वाँ से भी अधिक नज़दीक संबंधों में थे, क्योंकि उनके अन्दर वो लहू नहीं बह रहा था जिसका कोई मूल या आधार हम कहीं और जोड़ सकें जो उनमें अन्तर पैदा करें, परन्तु वे आदम और हव्वा के पुत्र थे। फिर भी कैन और हाबिल में एक बड़ी असमानता थी उनके चरित्र की भिन्नता नहीं थी। एक विश्वास द्वारा अपनी लाई हुई भेंट के कारण से ग्रहणयोग्य ठहरा, तथा दूसरे कैन ने, अपनी भेंट परमेश्वर से बिना मान्यता पाए लाया था और उसकी भेंट अस्वीकार कर दी गई।
परमेश्वर कैन को दूसरा अवसर देता है।
आगे पद 6 और 7 में लिखा है।
उत्पत्ति 4:6 “तब यहोवा ने कैन से कहा, “तू क्यों क्रोधित हुआ? और तेरे मुँह पर उदासी क्यों छा गई है?“
उत्पत्ति 4:7 “यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है; और उसकी लालसा तेरी ओर होगी, और तुझे उस पर प्रभुता करनी है।”
कैन क्यों क्रोधित हुआ? वह इतना क्रोधित हुआ कि अपने भाई कि हत्या करने चल पड़ा। सोच समझ कर योजना बना कर की जाने वाली हत्या के पिछे, हमेशा ही क्रोध होता है। हमारे प्रभु यीशु मसीह ने कहा था, यदि तुम बिना कारण अपने भाई पर क्रोध करते हो, तो तुम हत्या के लिए दोषी ठहरोगे। क्रोध के पीछे ईष्या होती है, और इर्ष्या के पिछे घमण्ड होता है, तथा आत्मिक घमण्ड में पाप की अनुभूती नहीं होती है। याकूब अपनी पत्री में इस प्रकार कहते हैं – याकूब 1:15, “फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।” कैन के क्रोध ने उसे हत्या करने के लिए उकसाया, परन्तु इसके पिछे उसकी अपने भाई के प्रति ईर्ष्या और उसका घमण्ड था।
तथा परमेश्वर इस प्रकार उससे व्यवहार करता है। परमेश्वर कैन से कहते है, “यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? वास्तव में इसका सही अनुवाद इस प्रकार होना चाहिए,- क्या तू परमश्रेष्ठ नहीं है? हमेशा से हम देखते हैं कि बड़ा बेटा प्रमुख स्थान पर अधिकार रखता है, और अब कैन सोचता है कि वह आप अपना अधिकार को खो देगा। परमेश्वर उससे कहता कि उसे अपना अधिकार खोने का कोई कारण नहीं है, यदि वह भला करता है तब। भला करने का अर्थ है, बलिदान के लिए वह भेंट लाना जिसे परमेश्वर ने हाबिल से स्वीकार किया, और यह मानना कि वह पापी है। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और क्रोधित हुआ।
लिखा है, “पाप द्वार पर छिपा रहता है।“ कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने इसका अर्थ निकाला है कि, पाप बलि द्वार पर पड़ी रहती है। अर्थात एक छोटा मेम्ना द्वारा पर खड़ा रहता है। सुनने में यह सही लगता है क्योंकि यह सच था, परन्तु मैं नहीं सोचता कि यह पाप बलि थी, इस समय तक और इससे पहले और बाद में भी मूसा के समय तक जैसा परमेश्वर के वचन में दिया गया है, पाप बलि नहीं थी। आप पाप बलि का उल्लेख लैव्यव्यवस्था की पुस्तक में ही पाते हैं। लैव्यव्यवस्था की पुस्तक के पहले भाग में हमें पांच बलिदानों का उल्लेख किया गया है, जिन में से एक है पाप बलि। व्यवस्था के दिए जाने तक पाप बलि का अस्तित्व नहीं था। यही बात पौलुस, रोमियों की पत्री 3:20 में कहता है, “……. व्यवस्था के द्वारा पाप की पहचान होती है।” उस समय तक जो भी बलिदान लाए गए वे सब होमबलि थे। अय्यूब जो मूसा से पहले था वह अपने समय में होमबलि चढ़ाया करता था। यह किसी भी रीति से पापबलि नहीं था। मैं समझता हूँ यदि आप गहराई से वचन का अध्ययन करेंगे तो पाएँगे कि यह सच है।
यह तो स्पष्ट है कि कैन यह नहीं समझ पाया कि वो पाप के प्रति कितना संवेदनशील या सहज था। जब परमेश्वर में उससे कहा कि “पाप द्वार पर छिपा रहता है।” तो मैं समझता हूँ कि वह उस पाप के बारे कह रहा था जैसे कि पाप दरवाजे़ के पास एक जंगली पशु के समान छुप कर इस इन्तजार में बैठा रहता है, कि कैन कब बाहर आए और उसे फाड़ खाए या उस पर आक्रमण करे। इसी कारण से कैन को बलिदान की आवश्यकता थी, जो परमेश्वर को पापबलि के रूप में ग्रहणयोग्य हो। वह बलिदान जो प्रभु यीशु मसीह को दर्शाता है। 1 यूहन्ना की 3:12 में हम पाते हैं, “और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्ट से था, और जिस ने अपने भाई को घात किया: और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे।” लिखा है, “यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहाता है” और इस भले काम को करने के लिए ही एक प्रकार की भेंट लानी थी, जिसे हाबिल ने लाया था, जो होमबलि थी। हम देखते हैं कि अब्राहम ने भी होमबलि चढ़ायी थी, जबकि तब तक व्यवस्था नहीं दी गई थी। तब तक पाप का उल्लंघन माना नहीं जाता था। उस समय तक पाप को व्यवस्था के विरोध में अपराध नहीं समझा जाता था। इसलिए हम देखते हैं कि परमेश्वर ने कैन की रक्षा की।
मित्रों परमेश्वर हमें बिना किसी कारण के दोषी नहीं ठहरात है। जब कैन और हाबिल को मालूम चल गया कि पाप क्या है तब उन्हें पाप की क्षमा की आवश्यकता थी। आज पूरा संसार परमेश्वर के सामने पाप का दोषी है और सभी को परमेश्वर से पापों की क्षमा की आवश्कता है जो प्रभु यीशु मसीह के लहू के द्वारा से हमें प्राप्त होती है। आइए हम अपने पापों की क्षमा के लिए परमेश्वर के पास उस बलिदान के साथ आएं जो प्रभु यीशु ने क्रूस पर हमारे लिए दिया है। आइए प्रार्थना करें।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
