उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 24:31 – 24:67
कार्यक्रम : #0042
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प्रिय मित्रों प्रभु यीशु में आप सभी को प्रेमभरा नमस्कार। मैं पुनः आप का स्वागत करता हूँ। दोस्तों मुझे अनुमान है कि आप आज के अध्ययन के लिए बहुत बेसब्री से इन्तजार कर रहे होंगे क्योंकि हम रोचक प्रेम कहानी के क्लाइमेक्स में पहुँच रहे हैं। आइए हम आगे बढ़ते हैं और उत्पत्ति 24 अध्याय का पद 31 पढ़ते है।
उत्पत्ति 24:31 ”उसने कहा, “हे यहोवा की ओर से धन्य पुरुष, भीतर आ। तू क्यों बाहर खड़ा है? मैं ने घर को, और ऊँटों के लिये भी स्थान तैयार किया है।”
यहाँ तक की बुजुर्ग जाबान भी इस सच्चाई को जानता था कि एक जीवित परमेश्वर है जो सृष्टिकर्ता और एक मात्र परमेश्वर है। आगे पद 32 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:32 ”इस पर वह पुरुष घर में गया; और लाबान ने ऊँटों की काठियाँ खोलकर उन्हें पुआल और चारा दिया, और उसके और उसके साथियों के पाँव धोने को जल दिया।”
यहाँ फिर से हम पाँव धोने की प्रथा को देखते हैं। ध्यान दें कि कुछ लोग हैं जो उस दास के साथ आए हुए थे। लाबान इस बात का ध्यान रखता है कि घर में उस दास का स्वागत राजसी तरीके से किया जाए।
यहाँ पर हमें मसीह यीशु और कलीसिया के संबंधों की एक सुन्दर तस्वीर दिखाई गई है। नये नियम में कलीसिया के लिए एक अलंकार या रूपक जो उपयोग किया गया है कि कलीसिया एक दिन मसीह यीशु की दुल्हन बनेगी। आज इसी प्रकार से पवित्र आत्मा द्वारा जिसे परमेश्वर पिता और पुत्र प्रभु यीशु के द्वारा संसार में भेजा गया है, कलीसिया के विश्वासियों को जीता जा रहा है। परमेश्वर का पवित्र आत्मा, अब्राहम के दास के समान, किसी और के लिए बात करने को आया है, कि मसीही की बातों को ले कर हम पर प्रगट करे। जिस प्रकार यह दास इसहाक के लिए दुल्हन खोजने को गया था, उसी प्रकार परमेश्वर का पवित्र आत्मा इस संसार में मसीह की दुल्हन को बुलाने के लिए भेजा गया है। यहाँ पर उस अद्भुत नाटकीय प्रभाव पर कृपया ध्यान दें। यह उन दिनों की उत्साहित करनेवाली एक कहानी और महान अभिलेख है। पर 33 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:33 ”तब अब्राहम के दास के आगे जलपान के लिये कुछ रखा गया; पर उसने कहा, “मैं जब तक अपना प्रयोजन न कह दूँ, तब तक कुछ न खाऊँगा।” लाबान ने कहा, “कह दे।”
अब्राहम का दास कहता है, “मैं जब तक अपना प्रयोजन न कह दूँ, तब तक कुछ न खाऊँगा।” यह भी पवित्र आत्मा का एक चरित्र है जो किसी अन्य के बारे में बताने को संसार में आया है। परमेश्वर के दृष्टिकोण से यही प्राथमिक कार्य है। मैं जानता हूँ कि इसके अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी हैं, जैसे, सरकार का काम, समाचार प्रसारण का काम, निगम का काम, मोटर और जहाज़ कंपनियों का काम। ये सब काम ज़रूरी कामों में से हैं। लेकिन परमेश्वर इस संसार के साथ इन कम्पनियों या सरकार के काम के आधार पर व्यवहार करने वाला है। हमारे शेयर बाजार, स्टाक मार्केट या बड़े उद्योगों से स्वर्ग को कोई सरोकार नहीं है। परमेश्वर के लिए जो सब से महत्वपूर्ण और प्राथमिक कार्य है वह संसार के लोगों तक सुसमाचार पहुँचाना है, उद्धार का वह संदेश पहुँचाना है। परमेश्वर का आत्मा यहाँ, इसे प्राथमिकता देने के लिए है। अब्राहम का दास तब तक भोजन ग्रहण नहीं करेगा जब तक अपना प्रयोजन न कह दे, तब वे उसे कहने के लिए आग्रह करते है। आगे पद 34 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:34 ”तब उसने कहा, “मैं तो अब्राहम का दास हूँ।”
यहाँ ध्यान दें कि उसका नाम नहीं बताया गया है। उसी प्रकार, जैसा प्रभु यीशु मसीह ने यूहन्ना 16:13-14 में कहा था, जब पवित्र आत्मा आएगा, वह अपनी ओर से न कहेगा, वह मेरी बातों में से लेकर तुम्हें बताएगा। परन्तु प्रियों क्या आप जानते हैं कि उस पवित्र आत्मा का क्या नाम है? उसका कोई नाम नहीं है, वह अपने बारे में बात करने को नहीं आया है, वह मसीह के बारे में बातें करने को आया है। उसी प्रकार उस सेवक का नाम नहीं दिया गया है, बस उसे अब्राहम का सेवक कहा गया है। आगे पद 35 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:35 ”यहोवा ने मेरे स्वामी को बड़ी आशीष दी है, इसलिये वह महान् पुरुष हो गया है; और उसने उसको भेड़-बकरी, गाय-बैल, सोना-रूपा, दास-दासियाँ, ऊँट और गदहे दिए हैं।”
वह सेवक पिता के घर के बारे में बताता है। और परमेश्वर का आत्मा हमें भी यही बताना चाहता है। वह संसार को उनके पाप, धार्मिकता और न्याय के प्रति निरुत्तर करता है, अर्थात प्रगट करता है कि वे परमेश्वर के समक्ष पापी ओर दोषी हैं। यही तीन बाते हैं जो वह पापी संसार के संबंध में प्रगट करता है। वह प्रगट करता है कि इस पापी संसार और मानवजाति पर परमेश्वर का दण्ड आने वाला है। आज मनुष्य पाप के कारण से परमेश्वर से अलग है, खोई हुई दशा में हैं। यहाँ पर लिखा हुआ है कि मसीह को ग्रहण न करने के कारण मनुष्य खोई हुई दशा में हैं। वास्तव में वे मसीह का तिरस्कार करने के कारण खोए हुए नहीं है परन्तु पापी होने के कारण वे खोए हुए हैं या परमेश्वर से दूर हैं। आज मानव की यही दशा है। परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें यही बताने आया है कि एक उद्धारकर्ता है जिसने हमारे दण्ड को अपने ऊपर ले लिया और वही हमें धर्मी ठहराता है ताकि हम स्वर्ग में प्रवेश कर सकें। पवित्र आत्मा उस उद्धारकर्ता के बारे में बताने को आया है।
आगे कहता है, ”यहोवा ने मेरे स्वामी को बड़ी आशीष दी है।“ मित्रों हमारा प्रभु सभी वस्तुओं का धनी है। अनाज और अन्य सारी वस्तुएं उसी की है। हज़ारों पहाड़ों पर सारे पशु उसके ही है। हमारा परमेश्वर अति महान् है। पद 36
उत्पत्ति 24:36 ”और मेरे स्वामी की पत्नी सारा के बुढ़ापे में उससे एक पुत्र उत्पन्न हुआ है; और उस पुत्र को अब्राहम ने अपना सब कुछ दे दिया है।”
एक अनन्त उद्देश्य के निमित हमारा प्रभु यीशु मसीह सब कुछ का वारिस हैं, और हम उसके साथ आज संगी वारिस भी हैं। अब्राहम का दास इस परिवार को यह बताने आया है कि वह अपने स्वामी के पुत्र के लिए दुल्हन लेने के लिए आया है जो उस पुत्र के साथ संगीवारिस होगी। पद 37 में आगे वह कहता है।
उत्पत्ति 24:37 ”मेरे स्वामी ने मुझे यह शपथ खिलाई है, ‘मैं उसके पुत्र के लिये कनानियों की लड़कियों में से, जिनके देश में वह रहता है, कोई स्त्री नहीं लाऊँगा।”
पवित्र आत्मा इस संसार के पापियों को बुला रहा है, परन्तु 1 पतरस 1:23 के अनुसार, ऐसे भी पापी है जो, “……….नाशवान् नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।“ यही हैं जिन्हें वह बुला रहा है, सभी पापियों को, परन्तु वे परमेश्वर की सन्तान बनाए जा चुके है। 2 कुरिन्थियों 5:17 में लिखा है, “इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है, …..।“ परमेश्वर कनानियों को नहीं ले रहा है। उसकी सन्तानों का जीवन परिवर्तित होना चाहिए। आगे पद 38 से 49 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 24:38 ”मैं उसके पिता के घर और कुल के लोगों के पास जाकर उसके पुत्र के लिये एक स्त्री ले आऊँगा।”
उत्पत्ति 24:39 ”तब मैं ने अपने स्वामी से कहा, ‘कदाचित् वह स्त्री मेरे पीछे न आए।”
उत्पत्ति 24:40 ”तब उसने मुझ से कहा, ‘यहोवा, जिसके सामने मैं चलता आया हूँ, वह तेरे संग अपने दूत को भेजकर तेरी यात्रा को सफल करेगा; और तू मेरे कुल, और मेरे पिता के घराने में से मेरे पुत्र के लिए एक स्त्री ला सकेगा।”
उत्पत्ति 24:41 ”तू तब ही मेरी इस शपथ से छूटेगा, जब तू मेरे कुल के लोगों के पास पहुँचेगा; और यदि वे तुझे कोई स्त्री न दें, तो तू मेरी शपथ से छूटेगा।”
उत्पत्ति 24:42 ”इसलिये मैं आज उस कुएँ के निकट आकर कहने लगा, ‘हे मेरे स्वामी अब्राहम के परमेश्वर यहोवा, यदि तू मेरी इस यात्रा को सफल करता हो।”
उत्पत्ति 24:43 ”तो देख, मैं जल के इस कुएँ के निकट खड़ा हूँ; और ऐसा हो कि जो कुमारी जल भरने के लिये आए, और मैं उससे कहूँ, “अपने घड़े में से मुझे थोड़ा पानी पिला।”
उत्पत्ति 24:44 ”और वह मुझ से कहे, “पी ले, और मैं तेरे ऊँटों के पीने के लिये भी पानी भर दूँगी,” वह वही स्त्री हो जिसको तू ने मेरे स्वामी के पुत्र के लिये ठहराया है।”
उत्पत्ति 24:45 ”मैं मन ही मन यह कह ही रहा था कि देखो रिबका कन्धे पर घड़ा लिये हुए निकल आई; फिर वह सोते के पास उतरके भरने लगी। मैं ने उससे कहा, ‘मुझे पिला दे।”
उत्पत्ति 24:46 ”और उसने जल्दी से अपने घड़े को कन्धे पर से उतारके कहा, ‘ले, पी ले, पीछे मैं तेरे ऊँटों को भी पिलाऊँगी,’ इस प्रकार मैं ने पी लिया, और उसने ऊँटों को भी पिला दिया।”
उत्पत्ति 24:47 ”तब मैं ने उससे पूछा, ‘तू किसकी बेटी है?’ उसने कहा, ‘मैं तो नाहोर के जन्माए मिल्का के पुत्र बतूएल की बेटी हूँ,’ तब मैं ने उसकी नाक में वह नथ और उसके हाथों में वे कंगन पहिना दिए।”
उत्पत्ति 24:48 ”फिर मैं ने सिर झुकाकर यहोवा को दण्डवत् किया, और अपने स्वामी अब्राहम के परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा, क्योंकि उसने मुझे ठीक मार्ग से पहुँचाया कि मैं अपने स्वामी के पुत्र के लिये उसके कुटुम्बी की पुत्री को ले जाऊँ।”
उत्पत्ति 24:49 ”इसलिये अब, यदि तुम मेरे स्वामी के साथ कृपा और सच्चाई का व्यवहार करना चाहते हो, तो मुझसे कहो; और यदि नहीं चाहते हो, तौभी मुझसे कह दो; ताकि मैं दाहिनी ओर या बाईं ओर फिर जाऊँ।”
लाबान उस परिवर की ओर से वार्तालाप करता है।
उत्पत्ति 24:50 ”तब लाबान और बतूएल ने उत्तर दिया, “यह बात यहोवा की ओर से हुई है; इसलिये हम लोग तुझ से न तो भला कह सकते हैं न बुरा।”
उत्पत्ति 24:51 ”देख, रिबका तेरे सामने है, उसको ले जा, और वह यहोवा के वचन के अनुसार तेरे स्वामी के पुत्र की पत्नी हो जाए।”
वे कहते हैं, “यह बात यहोवा की ओर से हुई है; इसलिये देख, रिबका तेरे सामने है, उसको ले जा।”
उत्पत्ति 24:52 ”उनकी यह बात सुनकर, अब्राहम के दास ने भूमि पर गिरके यहोवा को दण्डवत् किया।”
उत्पत्ति 24:53 ”फिर उस दास ने सोने और रूपे के गहने, और वस्त्र निकालकर रिबका को दिए; और उसके भाई और माता को भी उसने अनमोल अनमोल वस्तुएँ दीं।”
इसी प्रकार से पवित्र आत्मा परमेश्वर की सन्तानों को दान देता है। जब हम मसीह के पास आते हैं तो हमारे पास आत्मा की गम्भीरता और निश्चयता होती है। विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए जाने के कारण, रोमियों 5:1-5 के आधार पर हमारे पास परमेश्वर की शान्ति है, परमेश्वर तक सीधी पहुँच, अनन्त आनन्द, अनन्त आशा है और परमेश्वर का पवित्र आत्मा है। ये सारी अद्भुत बातें आज विश्वासियों के लिए उपलब्ध हैं।
उत्पत्ति 24:54 ”तब उसने अपने संगी जनों समेत भोजन किया, और रात वहीं बिताई। उसने तड़के उठकर कहा, “मुझ को अपने स्वामी के पास जाने के लिये विदा करो।”
उत्पत्ति 24:55 ”रिबका के भाई और माता ने कहा, “कन्या को हमारे पास कुछ दिन, अर्थात् कम से कम दस दिन और रहने दे; फिर उसके पश्चात् वह चली जाएगी।”
अगली सुबह वह दास कहता है, “मुझे अपने स्वामी के पास जाने के लिये विदा करो।” याद रखें मित्रों यह उसका सब से प्रमुख काम है! तब उस लड़की का भाई कहता है, “इतनी जल्दी क्या है? “कन्या को हमारे पास कुछ दिन, दस दिन और रहने दे। हमें उससे अच्छी तरह बात भी करनी है।“
उत्पत्ति 24:56 ”उसने उनसे कहा, “यहोवा ने जो मेरी यात्रा को सफल किया है, इसलिये तुम मुझे मत रोको, अब मुझे विदा कर दो कि मैं अपने स्वामी के पास जाऊँ।”
उत्पत्ति 24:57 ”उन्होंने कहा, “हम कन्या को बुलाकर पूछते हैं, और देखेंगे कि वह क्या कहती है।”
मित्रों, अब हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग पर आते हैं जो अद्भुत है, जिसे आप न चूकें।
उत्पत्ति 24:58 ”और उन्होंने रिबका को बुलाकर उससे पूछा, “क्या तू इस मनुष्य के संग जाएगी?” उसने कहा, “हाँ, मैं जाऊँगी।”
आइए एक बार फिर से इस घटना पर नज़र डालते हैं। यह एक पुरानी कहानी है, जो आदि काल में, मानव सभ्यता के आरंभ घटी थी। हालाँकि मुझे यकीन है कि मानवजाति उस समय भी इस धरती पर हज़ारों सालों से थे, लेकिन जहाँ तक हमारी गणना है, यह करीब चार हज़ार साल पहले की घटना है। यह परिवार एक अजनबी मेहमान का स्वागत कर रहा था और वे शाही तरीके से उसका स्वागत करते हैं। उन्होंने उसके ऊँटों को खाना-पानी दिया है और उसके नौकरों का भी ध्यान रखा है। उन्होंने उसके सामने मांस परोसा जो एक अच्छी दावत थी, लेकिन पहले वह अपना उद्देश्य बताना चाहता था।
तब वह अपना अनोखा अभिप्राय प्रगट करता है। वह अपने स्वामी के पुत्र, इसहाक के लिए एक दुल्हन खोजने आया था। आप देख सकते हैं कि यह सेवक, परिवार को देने के लिए सोने और चाँदी के तोहफे लाया था। आप को याद रखना होगा कि अब्राहम एक धनी मनुष्य था। तब वह दास अपने स्वामी के बारे में उन्हें बताता है। जैसे ही वह बोलना आरंभ करता है, आप देख सकते हैं कि वह परिवार उसके चारों ओर एकत्र हो जाता है। तब आप उस झुण्ड में एक अत्यन्त सुन्दर और सुशील कन्या को भी देख सकते हैं। वह सारी बातों को ध्यान से सुनती है कि अब्राहम कौन है और इसहाक का जन्म कैसे हुआ था। वह दास इसहाक के चमत्कारिक जन्म और उसके जीवन के बारे में भी बताता है। तब वह यह भी बताता है कि किस प्रकार उसका पिता उसे मोरय्याह पर्वत पर बलिदान करने के लिए ले गया था और फिर कैसे परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया और उसके पिता को उसका पुत्र जिन्दा वापस कर दिया। तब अंत में कहता है कि किस प्रकार उस पिता ने अपने सेवक को इसहाक के लिए एक दुल्हन खोजने को उसे भेजा है। वे कनानियों में से उसे लिए दुल्हन नहीं चाहते हैं। उन्हें एक ऐसा जीवनसाथी चाहिए थी जो उन्हीं की तरह सोचती हो, जिसमें जीवित परमेश्वर के लिए वैसी ही क्षमता हो, जो परमेश्वर के वचन के द्वारा नया जन्मा पाई हुई हो। वह ऐसी दुल्हन खोज रहा था।
अब तक रिबका इन बातों को ध्यान से सुन रही थी और अब वे उसकी ओर फिरते हैं। अब तक किसी ने भी उसकी ध्यान नहीं दिया था परन्तु अब सारी आँखें उसकी ओर घूम जाती है, और वे उससे कहते हैं, “रिबका तुम क्या कहना चाहती हो? क्या तू इस मनुष्य के संग जाएगी?” वह न तो टालमटोल करती है, न ही बात को घुमाती है, न ही हिचकिचाती है। रिबका कहती है, “हाँ, मैं जाऊँगी।”
क्या आप इस बात को स्मरण करते हैं कि हमारे प्रभु यीशु मसीह ने जिन मनुष्यों को चेले होने को बुलाया था, उन्होंने भी तत्काल निर्णय लिया था। वे अपने जाल छोड़ कर उसके पीछे हो लिए। मैं जानता हूँ कि वे कुछ बार वापस चले गए थे, परन्तु एक दिन ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने जालों को हमेशा के लिए छोड़ दिया और फिर उसकी ओर नहीं गए। वे उसके पीछे हो लिए और उसके साथ चलते गए। पवित्र आत्मा आज भी लोगों को बुला रहा है। आज उसने दास का स्थान ले लिया है। आप ने देखा कि परमेश्वर पिता और पवित्र आत्मा ने पुत्र को इस संसार में संसार के लोगों के लिए मरने को भेजा था। और जब पुत्र वापस स्वर्ग को गया, तब उसने कहा कि वह पवित्र आत्मा को संसार में भेजेगा जो हमारा सहायक है। पवित्र आत्मा अब इस संसार में आ चुका है, और मसीह की दुल्हन को बाहर बुला रहा है। क्या तुम आना चाहते हो? कोई है जिसने तुम्हारे लिए अपना प्राण दिया है। वह तुम्हे बचाने आया था। सबसे पहले आपको छुटकारा पाने की आवश्यकता है। आप को उसके पास एक पापी के रूप में आ कर उसे अपना उद्धाकर्ता स्विकार करना होगा। ऐसा करने पर आप का नया जन्म हो जाएगा और आप परमेश्वर की सन्तान बन जाएंगे, तथा उस कलीसिया में जोड़ दिय जाएंगे जो किसी दिन मसीह यीशु को दुल्हने के रूप में प्रस्तुत की जाएगी। अब प्रश्न उठता है कि क्या आप जाएंगे? क्या आप उसके आमंत्रण को स्विकार करते हैं? क्या आप मसीह पर अपने उद्धारकर्ता होने के लिए भरोसा करेंगे? यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसके बारे में आप टालमटोल कर सकें, या तो आप ऐसा करेंगे या फिर नहीं करेंगे।
आप का एक स्पष्ट निर्णय आवश्यक है। पवित्र आत्मा आप से यही अपेक्षा करता है, मित्रों। वह इसी तरह से आप को स्विकार करेगा, और उसके द्वारा स्विकार किए जाने का यही एक तरीका है।
दोस्तों कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अभी तो कहानी शुरू हुई है जब वे प्रतिज्ञा के देश में वापस जाते हैं।
उत्पत्ति 24:59 ”तब उन्होंने अपनी बहिन रिबका, और उसकी धाय, और अब्राहम के दास और उसके साथी, सभों को विदा किया।”
उत्पत्ति 24:60 ”और उन्होंने रिबका को आशीर्वाद दे के कहा, “हे हमारी बहिन, तू हज़ारों लाखों की आदिमाता हो, और तेरा वंश अपने बैरियों के नगरों का अधिकारी हो।”
यह भविष्यद्वाणी पहले ही पूर्ण हो चुकी है। हम उसे अपूर्ण नहीं पर पूर्ण भविष्यद्वाणी मान कर चल रहे हैं।
उत्पत्ति 24:61 ”तब रिबका अपनी सहेलियों समेत चली, और ऊँट पर चढ़ के उस पुरुष के पीछे हो ली। इस प्रकार वह दास रिबका को साथ लेकर चल दिया।”
उन्हें अभी एक लम्बी दूरी तय करना था, जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है, पर मुझे अनुमान है कि ऊँट की सवारी कर इतनी लम्बी यात्रा करना आसान काम नहीं था। यदि आप ने कभी ऊँट की सवारी की होगी तो आप को अनुभव होगा, मैने भी एक बार किया था। यह कठिन कार्य रहा होगा क्योंकि उन्हें पूरे मरूस्थल को पार कर जाना था। दिन के कड़ी धूप में उनकी कठिनाई भरी यात्रा का आप अनुमान लगा सकते है। संध्या को जब वे किसी स्थान में विश्राम करने के लिए रूक कर आग जलाते होंगे और अपना भोजन करते होगे। तब शायद सोने जाने से पहले रिबका उस दास से पूछती होगी कि, “मुझे इसहाक के बारे में कुछ और बताइए।“ दास पूछता होगा, “तुम और क्रूा जानना चाहती हो?“ “मुझे उसके जन्म के बारे में कुछ बताइए, उसके पिता द्वारा बलिदान किए जाने की घटना के बारे में कुछ और बताए।“ और इस प्रकार उनकी लम्बी यात्रा आगे बढ़ती जाती है और वे प्रतिज्ञा के देश के निकट पहुँच जाते है, और वे उसमें प्रवेश कर लहैरोई नामक स्थान में आते हैं जैसा पद 62 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:62 ”इसहाक जो दक्खिन देश में रहता था, लहैरोई नामक कुएँ से होकर चला आता था।
यह मनोहर देश हेब्रोन और बेर्शेबा के रास्ते में बहुत नीचे की तरफ है।
उत्पत्ति 24:63 ”साँझ के समय वह मैदान में ध्यान करने के लिये निकला था; और उसने आँखें उठाकर क्या देखा कि ऊँट चले आ रहे हैं।”
इस मानवीय प्रसंग के मध्य अपनी दुल्हन को लेने के लिए आने वाले मसीह की झलक हमें दिखाई गई है। बहुत से लोग कहते हैं, “जब प्रभु यीशु मसीह का आगमन होगा और हम उसके साथ बादलों में उठाए जाएंगे, तो क्या यह अद्भुत नहीं होगा?“ इस संदर्भ में लोगों का और एक विचार है, और यह उन लोगों के लिए है जो उसके साथ उठा लिए जाएँगे। इस समय तक कलीसिया के बहुत से सदस्य मृत्यु के द्वार से पार हो चुके होंगे, और वे मसीह के साथ वापस आएंगे जब उसका आगमन होगा। उनकी देह का पुनरूत्थन होगा तथा उनकी देह उनकी आत्मा के साथ मिलाई जाएगी। उस समय जो जीवित बचे रहेंगे, वे उन मृतकों के साथ मिल कर प्रभु से मिलने के लिए हवा में उठाए जाएंगे। जो इस घटना के पहले ही मर चुके होंगे वे उसे देखेंगे ज बवह परमेश्वर पिता के दाहिनी ओर से उठेगा और अपनी कलीसिया से मिलने के लिए उसे पुकारेगा। यही वह अलौकिक चित्रण है जो यहाँ हमें प्रगट किया गया है। तब आगे पद 64 और 65 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:64” रिबका ने भी आँखें उठाकर इसहाक को देखा, और देखते ही ऊँट पर से उतर पड़ी।”
उत्पत्ति 24:65 ”तब उसने दास से पूछा, “जो पुरुष मैदान पर हम से मिलने को चला आता है, सो कौन है?” दास ने कहा, “वह तो मेरा स्वामी है।” तब रिबका ने घूँघट लेकर अपने मुँह को ढाँप लिया।
हम मसीह की दुल्हन होने के लिए मसीह की धार्मिकता के वस्त्र से सुशोभित किए जाएंगे, परन्तु वह हम सब के लिए धर्मी ठहराया गया है। हम हमारे दोषों से मुक्त कर दिया गया है तथा हमारे निर्दोष ठहराए जाने के लिए जिलाया गया जिससे कि हम उसकी धार्मिकता को प्राप्त करें जिसके द्वारा हम परमेश्वर के सामने खड़े होने के योग्य ठहर सकें।
रिबका, उस पुरूष को अपनी ओर आते देख, पूछती है कि वह कौन है। इस लम्बी यात्रा के दौरान वह उसके बारे में जान पाई थी परन्तु अब वह उसे आमने-सामने देखने जा रही थी। यह हमारी आज की परिस्थिति के समान है। जैसा पतरस, 1 पतरस 1:8 में कहता है, “उससे तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, …….।“ मैं सोच कर आश्चर्य करता हूँ, कि जब वह आएगा, तो क्या हम उसे जान पाएँगे? एक गीत का लेखक इस प्रकार से कहता हैं, “मैं उसे पहचानूँगा, मैं उसे, उसके हाथों में कीलों के छेद से पहचानूँगा।“ मैं सोचता हूँ जब वह फिर से आएगा तब हम उसे इसी रीति से पहचानने जा रहे हैं। मित्रों, यह कितना अद्भुत, सुन्दर और महिमामय दृश्य हमारे सामने है। तब पद 66 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:66 ”दास ने इसहाक को अपना सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया।”
उसी प्रकार पवित्र आत्मा हम विश्वासियों पर अपनी मुहर लगा दी है और छुटकारे के दिन वह हमें मसीह को सौंप देगा। विश्वास करे मित्रों कि अब्राहम का यह सेवक निश्चित तौर पर इसहाक के लिए दुल्हन लेकर आने वाला था।
अब पद 67 में हम इसहाक और रिबका का मिलन देखते है।
उत्पत्ति 24:67 ”तब इसहाक रिबका को अपनी माता सारा के तम्बू में ले आया, और उसको ब्याह कर उससे प्रेम किया। इस प्रकार इसहाक को माता की मृत्यु के पश्चात् शान्ति प्राप्त हुई।”
लिखा है, और उसको ब्याह कर उससे प्रेम किया।“ जैसे मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम किया और अपने आप को उसके लिए दे दिया। “इस प्रकार इसहाक को माता की मृत्यु के पश्चात् शान्ति प्राप्त हुई।” यह प्रगट करता है कि मसीह यीशु हमारे उद्धार के के द्वारा से कुछ बहुत बड़ा हासिल करता है। वह हमें चाहता है, हमें पाने के लिए लालायित रहता है, कि प्रियों आप और मैं उसके प्रति विश्वाययोग्य बने रहें।
दोस्तों यह एक अद्भुत चित्रण है जो हमें मसीह के बारे में दिया गया है। इस अध्याय में, हमने इसहाक और रिबका के जीवन को, यीशु मसीह और कलीसिया के साथ तुलनात्मक दृश्टिकोण से देखा कि किस प्रकार मसीह ने अपनी दुल्हन को तैयार करने के लिए पवित्र आत्मा को भेजा। ताकि एक दिन कलीसिया तैयार होकर अपने स्वामी, प्रभु से मिलने के लिए आकाश में उठा ली जाए। और हमेशा के लिए अपने प्रभु के साथ में स्वर्ग में रहे। क्या आप इसके द्वारा उससे मिलने के लिए ललायित हैं? आइए हम उसे धन्यवाद देते हुए प्रार्थना में जाएँ।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
