उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 24:1 – 24:30
कार्यक्रम : #0041
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प्रिय मित्रों प्रेम भरा नमस्कार। एक बार फिर से बड़े ही आदर के साथ मैं आप का स्वागत करता हूँ। दोस्तो परमेश्वर के वचन के अध्ययन का यही लाभ है कि आप अपने जीवन में नियमित तौर पर उसकी आज्ञाओं में दृढ़ होते चले जाते हैं। पिछले प्रसारण में हम उत्पत्ति 23 अध्याय से सारा की मृत्यु, और अब्राहम द्वारा मकपेला की गुफा का खरीदा जाना देख रहे थे। अब हम आते हैं 24वें अध्याय पर जिसका विषय है।
अध्याय 24
विषय: इसहाक की दुल्हन
दोस्तों अब हम आ चुके है उत्पत्ति 24वें अध्याय पर जो कि इस पुस्तक के दूसरे मुख्य विभाजन का दूसरा भाग है। पहला विभाजन हम ने देखा था अध्याय 1 से 11 में जिसमें हमने चार प्रमुख घटनाओं को देखा था। इस दूसरे भाग में अर्थात अध्याय 12 से 50 में हम चार प्रमुख व्यक्तियों को देखने जा रहे हैं। अध्याय 12 से 23 में हम अब्राहम को देखते हैं, जो विश्वास का मूल है। अब 24 से 26 में हम इसहाक को देखेंगे जो एक प्रिय पुत्र है। इसहाक के जीवन में तीन मुख्य घटनाएं हमें देखने को मिलती है, जिनमें से दो को हम देख चुके हैं। पहला है उसका चमत्कारिक जन्म और दूसरा था अब्राहम द्वारा उसका बलिदान चढ़ाया जाना। अब तीसरा है उसकी लिए विवाह योग्य दुल्हन का चुनाव। ऐसा कहा जाता है कि किसी भी मनुष्य के जीवन में तीन मुख्य पड़ाव या घटनाएं होती हैं। उसका जन्म, उसका विवाह और उसकी मृत्यु। उसके पास केवल दूसरी घटना के लिए चुनाव का विकल्प होता है, जो उसका विवाह है। कई बार तो विवाह के लिए भी कुछ लोगों के पास चुनाव के विकल्प नहीं होते हैं। परन्तु फिर भी सभी के जावन में ये तीन मुख्य घटनाएं होती है।
अब हम उस कहानी पर आते हैं जिसमें इसहाक अपनी दुल्हन को प्राप्त करता है। अब्राहम अपने विश्वासयोग्य सेवक को वापस मेसोपोटामिया के हारान भेजता है कि उसके लिए दुल्हन खोज लाए और हम देखेंगे कि किस प्रकार वह सेवक रिबका को प्राप्त करने में सफल रहता है। यह एक बहुत ही अद्भुत प्रेम कहानी है। यह प्रसंग हमें प्रगट करता है कि बहन आप जिस लड़के से विवाह करना चाहती हैं, या फिर मेरे भाई आप जिस लड़की से विवाह करना चाहते हैं, परमेश्वर उन में रूची रखता है।
याद रखें मित्रों, परमेश्वर ने मनुष्यों को संसार में मानव परिवारों में दो संबंध प्रदान किए हैं: एक है विवाह और दूसरा है मानवीय प्रशासन (परमेश्वर मनुष्यों को स्वयं पर प्रशासन करने की अनुमति देता है।) ये ही दो प्रमुख संबंध है जो वैश्विक और अतिमहत्वपूर्ण है। जब ये टूट जाते हैं तब समाज बिखर जाता है। परमेश्वर इस बात को जानता है कि परिवार हमारे समाज का आधार स्तंभ है, इस कारण उसने समाज को मज़बूती और स्थिरता प्रदान करने के लिए विवाह की स्थापना की। यही बात मानव प्रशासन तंत्र में भी लागू होती है। किसी भी प्रशासन को मानव जीवन को सुरक्षित रखने के लिए, मानव जीवन को समाप्त करने का अधिकार होना चाहिए। यही इसका उद्देश्य है। च्यूंकि मानव जीवन अनमोल और पवित्र है परमेश्वर ने इस प्रकार का नियम स्थापित किया।
मुख्य बात यह है कि परमेश्वर आप की प्रेम कहानी में रूची रखते है, और यह बहुत उपयुक्त होगा कि आप अपनी प्रेम कहानी में परमेश्वर को शामिल करें। हमारे प्रभु यीशु मसीह ने जो पहला आश्चर्य कर्म किया वह गलील के काना में एक विवाह समारोह में था। मैं नहीं जानता कि उसके बाद वह कितने विवाह में शामिल हुआ परन्तु उस विवाह में वह उपस्थित था।
उत्पत्ति की पुस्तक का 24वां अध्याय परमेश्वर के वचन के बहुत ही समृद्धपूर्ण भागों में से एक है क्योंकि यह हमें एक ऐसी प्रेम कहानी बताता है जो हमें वापस पीछे आरंभ तक ले जाता है। यहाँ हमें बड़े ही नाटकीय ढ़ंग से बताया गया है कि इसहाक के लिए दुल्हन कैसे ढूंढी गई, और साथ ही, हमें एक शानदार आध्यात्मिक तस्वीर भी दिखाई गई है। इस अध्याय को पढ़ते समय मैं चाहता हूँ कि आप दो बातों पर ध्यान रखें। एक तो यह कि इसमें शामिल सभी लोगों के जीवन में परमेश्वर के मार्गदर्शन की हर एक छोटी-बड़ी बात पर। यहाँ एक बहुत ही खास बात है जो बार-बार कही गई है कि परमेश्वर ने कैसे मार्गदर्शन किया। उन आरंभिक दिनों में तथा उस सामाजिक माहौल में भी कुछ ऐसे लोग थे जो मार्गदर्शन के लिए परमेश्वर की तरफ निहार रहे थे और उसके बताए गए मार्ग पर चल रहे थे। कुछ लोग हमें यह विश्वास दिलाना चाहेंगे कि यह सब पाषाण युग की घटना है, जब मनुष्य गुफाओं में रहता था और बहुत हद तक असभ्य था। मित्रों आप इस पर विश्वास न करें! यह एक ऐसा अभीलेख या रिकॉर्ड है जो साबित करता है कि मनुष्य ऐसे कभी आरंभ नहीं किया था – और हम यहाँ परमेश्वर का मार्गदर्शन पाते हैं। अगर परमेश्वर उन लोगों के जीवन में मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है तो वह आप के और मेरे जीवन में भी कर सकता है। दूसरी बात जो इस अध्याय में ध्यान देने योग्य है कि रिबका, इसहाक की दुल्हन बनने के लिए, उसके दास के साथ जाने का निर्णय तत्काल लेती है। यह एक बहुत ही अद्भुत बात है जिसे हम आगे चल कर देखेंगे। तो आइए हम आगे बढ़ते हुए पढ़ें उत्पत्ति 24 अध्याय का पद 1
उत्पत्ति 24:1 “अब्राहम अब वृद्ध हो गया था और उसकी आयु बहुत थी और यहोवा ने सब बातों में उसको आशीष दी थी।“
अब्राहम अब बूढ़ा हो चुका था, उसकी उम्र बहुत अधिक हो चुकी थी, और प्रमुश्वर ने उसे सब बातों में आशीष दी थी। अब अब्राहम अपने बेटे इसहाक के लिए एक दुल्हन चाहता था, लेकिन वह कनानी लोगों में से उसकी दुल्हन नहीं चाहता था, क्योंकि वे लोग प्रतिमा आराधना करने वाले अन्य धर्म को मानते वाले थे, इसलिए वह अपने दास को अपने लोगों के बीच, हारान वापस भेजेता है कि वह इसहाक के लिए दुल्हन लाए।
उत्पत्ति 24:2 “अब्राहम ने अपने उस दास से, जो उसके घर में पुरनिया और उसकी सारी सम्पत्ति पर अधिकारी था, कहा, “अपना हाथ मेरी जाँघ के नीचे रख।“
उन दिनों में लोग इसी प्रकार शपथ खाया करते थे। वे अपना बाँया हाथ बाइबल पर रख दाहिना हाथ ऊपर उठाने का काम नहीं करते थे। वास्तव में उन दिनों में उनके पास बाइल भी नहीं थी। मेरा विचार है कि यदि कोई बताना चाहता है कि वह सच बोल रहा है तो उसे अपना हाथ बाइबल पर रखने की आवश्यकता नहीं है। यदि वह झूठ बोलना चाहे तो वह बाइबल पर हाथ रख कर भी झूठ बोल सकता है। उन दिनों में लोग जिससे शपथ खाते थे, वे उसकी जाँघ के नीचे अपना हाथ रखते थे। मेरा अनुमान है कि वह सेवक एलिएज़ेर रहा होगा। वह अब्राहम के घर में सेवकों का मुखिया था और उसका एक पुत्र था। आप को याद होगा कि उत्पत्ति 15:2-3 में अब्राहम परमेश्वर से उसके बारे में कहता है। आगे पद 3 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:3 “और मुझ से आकाश और पृथ्वी के परमेश्वर यहोवा की इस विषय में शपथ खा कि तू मेरे पुत्र के लिये कनानियों की लड़कियों में से, जिनके बीच मैं रहता हूँ, किसी को न लाएगा।“
मेरे मित्रों, यदि आप के घर में विवाह के योग्य कोई लड़का या लड़की है, तो आप को प्रार्थना करने की आवश्यकता है कि वह किसी कनानी से विवाह न करे। वे आज भी इस संसार में हैं, और हमारे जवानों के लिए हमेशा खतरा बना रहता है, कि कहीं वे उनसे विवाह न कर लें। यदि वे ऐसा करते हैं, तो जैसा किसी ने कहा है, तो वे अपने जीवन में समस्याओं का अम्बार लगा लेंगे और समस्या में ही बने रहेंगे। तब आगे पद 4-6 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:4 “परन्तु तू मेरे देश में मेरे ही कुटुम्बियों के पास जाकर मेरे पुत्र इसहाक के लिये एक पत्नी ले आएगा।”
उत्पत्ति 24:5 “दास ने उससे कहा, “कदाचित् वह स्त्री इस देश में मेरे साथ आना न चाहे; तो क्या मुझे तेरे पुत्र को उस देश में जहाँ से तू आया है ले जाना पड़ेगा?”
उत्पत्ति 24:6 “अब्राहम ने उससे कहा, “चौकस रह, मेरे पुत्र को वहाँ कभी न ले जाना।“
दूसरे शब्दों में वह दास अब्राहम से कहता है, “कि अगर मैं ऐसी कन्या न खोज पाऊँ, जो मेरे साथ आने को तैयार हो। तो क्या मैं इसहाक को उस भूमि में लेजा सकता हूँ? इस पर अब्राहम कहता है कि, “चौकस रह, मेरे पुत्र इसहाक को वहाँ कभी न ले जाना। यही वह स्थान है जहाँ परमेश्वर हमें रखना चाहता है। किसी भी परिस्थिति में उसे वहाँ न ले जाना।“ हमारे लिए यह बहुत आवश्यक है। तब पद 7 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:7 “स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा, जिसने मुझे मेरे पिता के घर से और मेरी जन्म-भूमि से ले आकर मुझ से शपथ खाई और कहा कि मैं यह देश तेरे वंश को दूँगा, वही अपना दूत तेरे आगे आगे भेजेगा कि तू मेरे पुत्र के लिये वहाँ से एक स्त्री ले आए।“
अब्राहम वास्तव में एक विश्वासी मनुष्य था। वह बार-बार अपने विश्वास का प्रदर्शन करता है। वह अपने सेवक से कहता है, “तू परमेश्वर की अगुवाई पर निर्भर रहना कि वह तेरी अगुवाई करे, क्योंकि परमेश्वर ने मुझसे यह प्रतिज्ञा की है।“ अब्राहम अन्धेरे में छलाँग नहीं लगा रहा था। विश्वास अन्धेरे में छलाँग लगाना नहीं है। उसे परमेश्वर के वचन पर आधारित होना आवश्यक है। बहुत से लोग कहते हैं, “मैं परमेश्वर पर विश्वास करता हूँ और ऐसा निश्चित होगा। यह अच्छा है, कि आप परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, लेकिन क्या आपके पास परमेश्वर की ओर से कुछ लिखित प्रमाण है? अब्राहम ने परमेश्वर से सदा ही इसे लिखित रूप में मांगा। और परमेश्वर ने अब्राहम के साथ वाचा बाँधी। अब्राहम कहता है, “परमेश्वर ने मुझसे प्रतिज्ञा की है कि मेरे वंश इसहाक के द्वारा वह पूरे संसार को आशीषित करेगा। इसलिए तू इस बात का निश्चय कर ले, कि परमेश्वर ने इसहाक के लिए वहाँ एक दुल्हन रखी है।“ यहाँ पर आप देखिए कि अब्राहम, परमेश्वर के द्वारा कहे गए वचन पर निर्भर करता है। इसलिए आज मुझे और आपको मूर्ख बनने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि विश्वास मूर्खता नहीं है वह किसी चीज़ पर निर्भर रहता है। विश्वास करने का हमेशा एक कारण होता है। यह अन्धेरे में छलाँग लगाना नहीं है। यह जीवन में शर्त लगाने वाली बात नहीं है कि यह नहीं तो वह अवश्य पूरी होगा। यह कोई जूआ खेलना भी नहीं है। यह एक निश्चित वस्तु है। विश्वास, वास्तविक और निश्चित चीज़ है, तथा अब्राहम को उसका भरोसा था। इससे आगे पद 8 में कहता है।
उत्पत्ति 24:8 “परन्तु यदि वह स्त्री तेरे साथ आना न चाहे तब तो तू मेरी इस शपथ से छूट जाएगा; पर मेरे पुत्र को वहाँ न ले जाना।”
अब्राहम कहता है, “परन्तु यदि वह स्त्री तेरे साथ आना न चाहे तब तो तू मेरी इस शपथ से छूट जाएगा; पर मेरे पुत्र को वहाँ न ले जाना।” इसका क्या अर्थ होता है मित्रों? मेरे विचार में अब्राहम ने उससे कहा होगा, “इस कार्य को करने के लिए परमेश्वर के पास अलग तरीका होगा। मैं नहीं जानता कि वह तरीका क्या हो सकता है, पर मैं इस बात में निश्चित हूँ कि परमेश्वर मेरे पुत्र का विवाह किसी परमेश्वर को न मानने वाली स्त्री से नहीं कराएगा।“
मित्रों यही विश्वास है। परमेश्वर के वचन के अनुसार काम करना ही विश्वास है। विश्वास किसी न किसी चीज पर आधारित रहता है और वह परमेश्वर का वचन है। परमेश्वर चाहता है कि हम न केवल उसके वचन पर विश्वास करें पर उसके अनुसार काम भी करें। यह सोचना पूर्णतः मूर्खता है कि आप परमेश्वर पर विश्वास करते हैं इस कारण आप उसे कुछ करने के लिए दबाव बना सकते हैं। मैंने अपने जीवन में डायबीटिज़ की समस्या को लेकर ऐसा करने का प्रयास किया है। ऐसा नहीं है कि मैं विश्वास की प्रार्थना द्वारा चंगाई पर विश्वास नहीं करता हूँ, यकीनन मैं करता हूँ। परन्तु कुछ लोग ऐसा सिखाते हैं कि आप परमेश्वर पर चंगाई देने के लिए दबाव बना सकते हैं कि वह ऐसा करे। मैं यह नहीं जानता कि उसकी इच्छा क्या है, परन्तु जो भी उसकी इच्छा हो, मैं चाहता हूँ कि वही पूरी हो। परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी आवश्यकताओं को उसके पास लाएं, परन्तु वही इस बात को निर्धारित करे कि वह कैसे और कब हमारी प्रार्थना का उत्तर देगा। अब्राहम के पास विश्वास करने का कुछ आधार था। वह परमेश्वर से कुछ मांगता नहीं है, परन्तु कहता है, “यदि इस तरीके से यह कार्य सफल नहीं होता है, तो परमेश्वर दूसरे तरीके से इस कार्य को सफल बनाएगा।“ तब पद 9 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:9 “तब उस दास ने अपने स्वामी अब्राहम की जाँघ के नीचे अपना हाथ रखकर उससे इस विषय की शपथ खाई।“
अब आप उस सेवक पर ध्यान दें जो इसहाक की दुल्हन लाने के लिए निकला है। पद 10
उत्पत्ति 24:10 “तब वह दास अपने स्वामी के ऊँटों में से दस ऊँट छाँटकर, उसके सब उत्तम-उत्तम पदार्थों में से कुछ कुछ लेकर चला; और मेसोपोटामिया में नाहोर के नगर के पास पहुँचा।“
वह दास जो दुल्हन लाने के लिए मेसोपोटामिया जा रहा था आपने साथ दस ऊँट ले कर जाता है, जिसका अर्थ हुआ कि कोई न कोई तो उस पर सवार होगा। वह अपने साथ नौकरों का काफिला ले गया। (दास के मार्ग का मान चित्र)
“उसके सब उत्तम-उत्तम पदार्थों में से कुछ कुछ लेकर चला।“ कहने का अर्थ है कि वह अब्राहम की चल-अचल सम्पत्ति का व्यवस्थापक था तब पद 11 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:11 “उसने ऊँटों को नगर के बाहर एक कुएँ के पास बैठाया। वह संध्या का समय था, जिस समय स्त्रियाँ जल भरने के लिये निकलती हैं।“
आपको यह अजीब लग सकता है कि स्त्रियाँ पानी भरने के लिए बाहर आती थीं, लेकिन उस दिन ऊंटों को पानी पिलाने का काम वही किया करती थीं। वास्तव में उन दिनों में स्त्रियाँ आज के मुकाबले बहुत ज़्यादा परिश्रक का काम किया करती थीं, अर्थात कड़ी शारीरिक मेहनत। जानवरो को पानी पिलाना, उनकी देखभाल करना आदि। पुरुषों को व्यापार करने और दूसरे काम करने के लिए बाहर जाना होता था – वे किसी भी तरह से हमेशा खाली नहीं बैठते थे। लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि उस समय स्त्रियों का पानी भरने के लिए बाहर जाना आम बात थी। यह नौकर इंतज़ार कर रहा था क्योंकि एक अजनबी होने के नाते, उस समुदाय में रहने वाले दूसरे लोगों से पहले अपने ऊंटों को पानी पिलाना उसके लिए सही नहीं था।
यह सेवक परमेश्वर पर निर्भर हो कर चल रहा था। अब्राहम ने भी सब कुछ परमेश्वर के हाथों में ही छोड़ दिया था, और अ बवह सेवक भी ऐसा ही करता है। तब पद 12 से 14 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:12 “वह कहने लगा, “हे मेरे स्वामी अब्राहम के परमेश्वर यहोवा, आज मेरे कार्य को सिद्ध कर, और मेरे स्वामी अब्राहम पर करुणा कर।“
उत्पत्ति 24:13 “देख, मैं जल के इस सोते के पास खड़ा हूँ; और नगरवासियों की बेटियाँ जल भरने के लिये निकली आती हैं।“
उत्पत्ति 24:14 “इसलिये ऐसा होने दे कि जिस कन्या से मैं कहूँ, ‘अपना घड़ा मेरी ओर झुका कि मैं पीऊँ,’ और वह कहे, ‘ले, पी ले, पीछे मैं तेरे ऊँटों को भी पिलाऊँगी,’ रू यह वही हो जिसे तू ने अपने दास इसहाक के लिये ठहराया हो; इसी रीति मैं जान लूँगा कि तू ने मेरे स्वामी पर करुणा की है।”
वह दास कुछ इस तरह से प्रार्थना करता है: “नगरवासियों की पुत्रियाँ जल भरने को आएंगी। लेकिन मैं नहीं जानता कि मैं किसे चुनूँ, और सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दिया गया है कि मैं किसी एक को चुनूँ। मेरी प्रार्थना है कि मैं जिसे चुनूँ, वही आपकी ओर से भी चुनी हुई हो।“ दूसरे शब्दों में वह परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि सही चुनाव करने में वह उसकी अगुवाई करे।
आप क्या सोचते हैं कि वह किसको चुनेगा? जी हाँ! निश्चित, वह एक पुरुष है, इसलिए वह उन में सबसे सुन्दर स्त्रियों को ही चुनेगा। और आप एक बात में निश्चित हो सकते है कि रिबका बहुत सुन्दर स्त्री थी। प्युरिटन समूह के लोगों का मानना था कि सुन्दरता शैतान की ओर से होता है। क्योंकि शैतान दिखने में सुन्दर है, वह ज्योति का दूत है, परन्तु उसके पास ज्योति नहीं है। परन्तु हम जानते हैं, परमेश्वर ही सृष्टिकर्त्ता है, आप ने कभी ऐसा सुन्दर सर्यास्त या फूल नहीं देखा होगा जिसे उसने नहीं बनाया। परमेश्वर ने ही स्त्रियों को सुन्दर बनाया है और इसमें कुछ गलती नहीं है। मुझे पूरा भरोसा है कि वह सेवक, कुएँ पर आने वाली सबसे सुन्दर स्त्री को ही चुनने जा रहा है। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है तो अफसोस की बात होगी। तब पद 15 और 16 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:15 “और ऐसा हुआ कि जब वह कह ही रहा था कि रिबका, जो अब्राहम के भाई नाहोर के जन्माये मिल्का के पुत्र बतूएल की बेटी थी, वह कन्धे पर घड़ा लिये हुए आई।“
उत्पत्ति 24:16 “वह अति सुन्दर और कुमारी थी, और किसी पुरुष का मुँह न देखा था। वह कुएँ में सोते के पास उतर गई, और अपना घड़ा भर के फिर ऊपर आई।“
मैं ने आप से कहा था कि रिबका बहुत सुन्दर थी, और वह आने वाली थी। परमेश्वर का वचन कहता है कि वह सुन्दर थी, और इस में कोई गलत बात नहीं है। लेकिन आज बुरी बात यह है कि फिल्मी दुनिया थिएटर और शैतान को सुन्दरता दिखती है। मैं सोचता हूँ कि परमेश्वर को भी उसमें सुन्दरता मिलनी चाहिए। उसने आरंभ में भी उसे ऐसा ही बनाया तथा एक सुन्दर और प्रिय व्यक्ति को उपयोग करने में कोई गलत बात नहीं है। मैं हमेशा यही प्रार्थना करता हूँ कि प्रभु अपनी सेवकाई के लिए अच्छे और सुन्दर दिखने वाले स्त्री और पुरुषों को ही आगे बुलाए। तब आगे पद 17 से 19 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:17 “तब वह दास उससे भेंट करने को दौड़ा, और कहा, “अपने घड़े में से थोड़ा पानी मुझे पिला दे।”
उत्पत्ति 24:18 “उसने कहा, “हे मेरे प्रभु, ले, पी ले,” और उसने जल्दी से घड़ा उतारकर हाथ में लिये लिये उसको पिला दिया।“
उत्पत्ति 24:19 “जब वह उसको पिला चुकी, तब कहा, “मैं तेरे ऊँटों के लिये भी तब तक पानी भर भर लाऊँगी, जब तक वे पी न चुकें।”
यहाँ पर महत्वपूर्ण बात सह है कि रिबका बहुत ही सुशील और नम्र स्वाभाव कह लड़की थी। वह सुन्दर थी पर मूर्ख नहीं थी तथा बहुत नम्र स्वाभाव वाली थी। आगे पद 20 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:20 “तब वह तुरन्त अपने घड़े का जल हौदे में उण्डेलकर फिर कुएँ पर भरने को दौड़ गई, और उसके सब ऊँटों के लिये पानी भर दिया।“
ध्यान दें कि उसके पास दस ऊँट थे और मैं नहीं जानता कि उन्होंने कब पिछली बार अपनी थैलियों को भरा था। यह इन्जन में पानी की टंकी को भरने के समान था। आगे पद 21 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:21 “वह पुरुष उसकी ओर चुपचाप अचम्भे के साथ ताकता हुआ यह सोचता था कि यहोवा ने मेरी यात्रा को सफल किया है कि नहीं।“
अब्राहम का सेवक आश्चर्यचकित खड़ा रहा। वह आश्चर्य कर रहा था कि, क्या यही कन्या है, क्या परमेश्वर मेरी अगुवाई कर रहा हैं या नहीं। वह विश्वास करता है कि परमेश्वर उसकी अगुवाई कर रहा था। तब आगे पद 22 से 24 में कहता है।
उत्पत्ति 24:22 “जब ऊँट पी चुके, तब उस पुरुष ने आधा तोला सोने का एक नथ निकालकर उसको दिया, और दस तोले सोने के कंगन उसके हाथों में पहिना दिए।“
उत्पत्ति 24:23 “और पूछा, “तू किसकी बेटी है, यह मुझ को बता। क्या तेरे पिता के घर में हमारे टिकने के लिये स्थान है?”
उत्पत्ति 24:24 “उसने उत्तर दिया, “मैं तो नाहोर के जन्माए मिल्का के पुत्र बतूएल की बेटी हूँ।”
नाहोर अब्राहम का एक भाई था
उत्पत्ति 24:25 “फिर उसने उससे कहा, “हमारे यहाँ पुआल और चारा बहुत है, और टिकने के लिये स्थान भी है।”
उत्पत्ति 24:26 “तब उस पुरुष ने सिर झुकाकर यहोवा को दण्डवत् करके कहा।“
वह सेवक इस काम में परमेश्वर के हाथ को अनुभव करता है। क्या हमारे कामों में परमेश्वर की अगुवाई और मार्गदर्शन होना अद्भुत नहीं है? पद 27 में कहता है।
उत्पत्ति 24:27 “धन्य है मेरे स्वामी अब्राहम का परमेश्वर यहोवा, जिसने अपनी करुणा और सच्चाई को मेरे स्वामी पर से हटा नहीं लिया; यहोवा ने मुझ को ठीक मार्ग पर चलाकर मेरे स्वामी के भाई-बन्धुओं के घर पर पहुँचा दिया है।”
यह एक महान कथन है जब वह कहता है: यहोवा ने मुझ को ठीक मार्ग पर चलाकर मेरे स्वामी के भाई-बन्धुओं के घर पर पहुँचा दिया है। मित्रों परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो मार्ग में चलते हैं, अर्थात जो उसके बताए मार्ग पर चलते रहते हैं, जो मार्गदर्शन प्राप्त करने की बाट जोहते रहते हैं, जो उसके चलाए चलते हैं, और वे जो, परमेश्वर की इच्छा पूरी करते हैं। परमेश्वर एक आज्ञाकारी हृदय को कभी भी मार्गदर्शन प्रदान कर समता है। आगे पद 28 और 29 में लिखा है।
उत्पत्ति 24:28 “तब उस कन्या ने दौड़कर अपनी माता के घर में यह सारा वृत्तान्त कह सुनाया।“
उत्पत्ति 24:29 “तब लाबान जो रिबका का भाई था, बाहर कुएँ के निकट उस पुरुष के पास दौड़ा गया।“
यहाँ मैं आप को चेतावनी देना चाहता हूँ कि आप उसके भाई लाबान पर नज़र रखें। इस समय से लेकर आगे तक आप उस पर अवश्य ध्यान रखें। वह इन आभूषणों और भौतिक वस्तुओं से बहुत ज़्यादा प्रभावित था। आगे पद 30 में देखें क्या होता है।
उत्पत्ति 24:30 “और ऐसा हुआ कि जब उसने वह नथ और अपनी बहिन रिबका के हाथों में वे कंगन भी देखे, और उसकी यह बात भी सुनी कि उस पुरुष ने मुझ से ऐसी बातें कहीं; तब वह उस पुरुष के पास गया; और क्या देखा कि वह सोते के निकट ऊँटों के पास खड़ा है।“
वह दास बाहर इन्तजार कर रहा था कि रिबका के घर से कोई उसे अन्दर लेने और स्वागत करने के लिए आता है कि नहीं। वास्तव में उसका स्वागत होगा कि नहीं। विश्वास कीजिए मित्रों जब उस बुजुर्ग लाबान ने उन नथों को देखा तो समझ गया कि वे मेहमान बहुत धनी है। लाबान अच्छे सौदे से चूकने वाला नहीं था। अगर आप इस बात पर विश्वास नहीं करते हैं तो आगे चल कर याकूब से पूछ सकते हैं। याकूब इस बात को बहुत अच्छे से जान जाता है कि लाबान एक असली व्यपारी था, हकीकत में वह याकुब से बेहतर व्यापारी था। इस कारण लाबान अब्राहम के दास का स्वागत करने को बाहर जाता है।
मित्रों क्या आप ने कभी परमेश्वर का मार्गदर्शन प्रापत करने के लिए इस प्रकार प्रार्थना की है? मैंनें ऐसा किया है और यकीन मानिए परमेश्वर आप की अगुवाई यकीनन करता है। आप भी परमेश्वर को अजमा कर देखें। उसने अब्राहम की अगुवाई किया, उसके अपने दासों कि अगुवाई किया है। उसने मेरी भी अगुवाई है और वह आप की भी अगुवाई करेगा। आइए परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए प्रार्थना में जाएं।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
-
A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
