उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 22:15 - 23:20
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 22:15 – 23:20
कार्यक्रम : #0040

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प्रिय दर्शकों मसीह यीशु में प्रेम भरा नमस्कार। एक बार पुनः आप का स्वागत है दोस्तों। हम उत्पत्ति के 22वें अध्याय से परमेश्वर द्वारा अब्राहम का परिक्षण देख रहे थे। और हम ने देखा था कि परमेश्वर अब्राहम को अपने पुत्र इसहाक का बलिदान करने नहीं देता है पर उसके लिए स्वयं एक मेढ़े का इन्तजाम करता है। तब अब्राहम उस स्थान का नाम यहोवा-यिरे रखता है अर्थात परमेश्वर उपाय करेगा। अब हम उत्पत्ति 22 अध्याय के पद 15 से देखते हैं कि परमेश्वर अब्राहम से की गई अपनी प्रतिज्ञाओं की पुष्टि करता है। आइए हम पढ़ें पद 15 और 16 लिखा है।

परमेश्वर अब्राहम से की गई अपनी प्रतिज्ञाओं की पुष्टि करता है।

उत्पत्ति 22:15 “फिर यहोवा के दूत ने दूसरी बार स्वर्ग से अब्राहम को पुकार के कहा।“

उत्पत्ति 22:16 “यहोवा की यह वाणी है, कि मैं अपनी ही यह शपथ खाता हूँ कि तू ने जो यह काम किया है कि अपने पुत्र, वरन् अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा।“

इस बात पर मैं आप से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ मित्रों, क्या अब्राहम ने ऐसा किया था? नहीं, उसने अपने पुत्र को बलिदान नहीं किया, परन्तु परमेश्वर उससे कहता है, “तू ने जो यह काम किया है।“ आप देख सकते हैं, अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और वह बहुत आगे निकल गया, ताकि मैं आप जानें कि परमेश्वर हर बात पहले से जानता हैं। और इसलिए कि वह चाहता हैं कि संसार की बाकी सृष्टि जाने कि अब्राहम इसहाक का बलिदान करने के लिए तैयार था। इसलिए परमेश्वर ने इसे उसके लेखे में ऐसा गिना कि उसने कर लिय है, परन्तु वह दूसरे मनुष्यों के सामने भी कर्म के द्वारा धर्मी ठहरा। उसने अपने कार्य के द्वारा प्रदर्शित किया कि वह विश्वासी है।

“वरन् अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा।“ ध्यान दीजिए कि परमेश्वर इस बात को कैसे लेता है, क्योंकि उसने अपने एकलौते पुत्र को दे दिया।

इस घटना के द्वारा, परमेश्वर स्पष्ट करता है कि किसी मनुष्य को इस नाके में या खाली स्थान में खड़ा होना पड़ेगा, किसी मनुष्य को इतना काबिल होना पड़ेगा कि वह मानवजाति को बचाने के लिए नाके में खड़ा हो सके। इस अध्याय में हमें यही महान संदेश दिया गया है। अब्राहम ने कहा कि परमेश्वर स्वयं एक मेम्ने का इन्तजाम करेगा, तब उन्हें एक मेढ़ा मिला जिसे उन्होंने बलिदान किया। परन्तु इसके करीब 1900 वर्षों बाद परमेश्वर ने मसीह यीशु के रूप में एक मेम्ने का उपाय किया। परमेश्वर ने अब्राहम का हाथ रोक कर उसे इसहाक का बलिदान करने से रोक दिया क्योंकि यह गलत था। परमेश्वर ने अब्राहम के पुत्र को तो बक्श दिया पर अपने पुत्र को न बक्शा और हम सभी के लिए दे दिया। आगे पद 17 और 18 में लिखा है।

उत्पत्ति 22:17 “इस कारण मैं निश्चय तुझे आशीष दूँगा; और निश्चय तेरे वंश को आकाश के तारागण, और समुद्र के तीर की बालू के किनकों के समान अनगिनित करूँगा, और तेरा वंश अपने शत्रुओं के नगरों का अधिकारी होगा।“

उत्पत्ति 22:18 “और पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगीः क्योंकि तू ने मेरी बात मानी है।”

कहता है, “पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी।“ यहाँ परमेश्वर किस वंश के बारे में कह रहा है? यदि आप गलातियों 3:16 पढ़ेंगे तो वहां पौलुस उस वंश का अर्थ समझाता है, “अतः प्रतिज्ञाएँ अब्राहम को और उसके वंश को दी गईं।” वह यह नहीं कहता, “वंशों को,” जैसे बहुतों के विषय में कहा; पर जैसे एक के विषय में कि “तेरे वंश को” और वह मसीह है।“ इस प्रकार हम बाइबल में इस वंश का अर्थ देख सकते हैं।

यदि हम गलातियों 3:8 पर थोड़ा पीछे जाते हैं तो पौलुस कहता है, “पवित्रशास्त्र ने पहले ही से यह जानकर कि परमेश्वर अन्यजातियों को विश्वास से धर्मी ठहराएगा, पहले ही से अब्राहम को यह सुसमाचार सुना दिया कि “तुझ में सब जातियाँ आशीष पाएँगी।” परमेश्वर ने अब्राहम को कब सुसमाचार सुनाया था? जब परमेश्वर ने उसे अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर बलिदान करने के लिए बुलाया था। परमेश्वर यहाँ कहता है, “पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी।“ अर्थात आशीषित होंगे। और वह वंश मसीह यीशु है। यही वह सुसमाचार है जो परमेश्वर ने अब्राहम को सुनाया था।
मैं यहाँ एक ऐसी बात पर टिप्पणी करना चाहूँगा जिसे आम तौर पर नज़रअंदाज़ किया जाता है। हम यह मान कर चलते हैं कि अब्राहम, इसहाक, याकूब तथा पुराने नियम के सभी महान लोग अच्छे इंसान थे, लेकिन वे उतने चतुर नहीं थे जितने हम हैं, या वे उतना नहीं जानते थे जितना हम जानते हैं। हालाँकि, मेरा ऐसा मानना है कि अब्राहम को मसीह यीशु के आने और सुसमाचार के बारे में आपसे और मुझसे कहीं अधिक पता था, इसका श्रेय मैं उसे देता हूँ। वास्तव में प्रभु यीशु मसीह ने यूहन्ना 8:56 में कहा था, “तुम्हारा पिता अब्राहम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उसने देखा और आनन्द किया।” इसलिए हम कह सकते हैं कि जितना हम जानते हैं उससे बहुत अधिक अब्राहम जानता था। परमेश्वर ने अब्राहम को बहुत कुछ प्रकाशित किया था परन्तु उस समय तब उद्धारकर्ता प्रगट नहीं हुआ था। हम यह जानते हैं कि अगले 1900 वर्षों तक वह नहीं आया, परन्तु उस मोरिय्याह पर्वत के ऊपर, जहाँ अब्राहम ने इसहाक का बलिदान किया था, वहाँ मसीह यीशु के बलिदान और पुनरूत्थान की तस्वीर हमें दिखाई गई। जब परमेश्वर ने अब्राहम को इसहाक का बलिदान करने के लिए बुलाया, तो उन्हें मोरिय्याह पहुँचने में तीन दिन लगे। तब परमेश्वर ने तीसरे दिन, अब्राहम को इसहाक, जीवित लौटा दिया; इसलिए यह मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान दोनों की एक तस्वीर है। पौलुस कहता है कि परमेश्वर ने अब्राहम को सुसमाचार सुनाया, तथा यकीनन ऐसा ही हुआ था।

“और पृथ्वी की सारी जातियाँ अपने को तेरे वंश के कारण धन्य मानेंगी।” आज मसीह यीशु का सुसमाचार संसार के कोने कोने तक पहुँच चुका है। परन्तु ऐसे बहुत हैं जिन्होंने अब तक नहीं सुना है, ऐसा आज हमारे बीच में भी सच है, पर फिर भी अनेक देश और जातियाँ उसके कारण आशीषित और धन्य हुई है। तथा कोई भी राष्ट्र मसीह के द्वारा आशीषित हो सकता है।
कहता है, “क्योंकि तू ने मेरी बात मानी है।” वह आज्ञाकारिता अब्राहम के विश्वास के ऊपर ठहर गया, और याद रखें मित्रों विश्वास सदा ही कर्म उत्पन्न करता है। क्योंकि कर्म बिना विश्वास मरा हुआ है।

अब्राहम बेर्शेबा को लौटता है।

आइए हम पढ़ें 22 अध्याय का पद 19 और 20

उत्पत्ति 22:19 “तब अब्राहम अपने सेवकों के पास लौट आया, और वे सब बेर्शेबा को संग-संग गए; और अब्राहम बेर्शेबा में रहता रहा।“

उत्पत्ति 22:20 “इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि अब्राहम को यह सन्देश मिला, “मिल्का के तेरे भाई नाहोर से सन्तान उत्पन्न हुई हैं।”

इस अध्यााय का बाकी भाग हमें अब्राहम के परिवार के बारे में जानकारी देता है। अब्राहम अपने भाई नाहोर को वर्षों पहले हारान में छोड़ आया था। धर्मशास्त्र बाइबल में नाहोर का वंश महत्व नहीं रखता है, लेकिन कुछ समय बाद यह वंश अब्राहम को भी पार कर जाएगा। हम उस पर तब मनन करेंगे जब हम उस पर आगे आएंगे। अगर आप आगे के पदों को पढ़ेंगे तो आप को कुछ नामों का उच्चारण करने में कठिनाई होगी। इसके साथ ही अध्याय 22 समाप्त होता है और हम 23वें अध्याय से अपना मनन जारी रखेंगे जिसका विषय है।

अध्याय 23
विषय: सारा की मृत्यु और उसकी अन्तक्रिया का वर्णन
अध्याय 23 में हमें सारा की मृत्यु और देखने को मिलती है अब्राहम उसे दफन करने के लिए मकपेला में एक गुफा खरीदता है। आइए हम पढ़ें अध्याय 23 का पद 1 और 2

उत्पत्ति 23:1 “सारा एक सौ सत्ताईस वर्ष की अवस्था को पहुँची; और जब सारा की इतनी आयु हुई।“
उत्पत्ति 23:2 “तब वह किर्यतर्बा में मर गई। यह कनान देश में है, और हेब्रोन भी कहलाता है, इसलिये अब्राहम सारा के लिये रोने पीटने को वहाँ गया।“

आप ने ध्यान दिया होगा कि सारा की उम्र 127 वर्ष बताई गई है। इसहाक के जन्म के समय उसकी उम्र 90 वर्ष थी, जिसका अर्थ होता है कि उसकी मृत्यु के समय, इसहाक करीब 37 वर्ष का रहा होगा। संभवतः मेरा अनुमान है कि सारा की मृत्यु इसहाक के बलिदान वाली घटना के कुछ वर्षों बाद हुई होगी।

हमें यह भी बताया गया है कि सारा की मृत्यु किर्यतर्बा में हुई। अब्राहम को उसे दफनाने के लिए, उस भूमि में जिसे परमेश्वर ने उसे दिया था, एक गुफा भी खरीदना पड़ा। प्रश्न उठता है कि वह सारा को दफनाने के लिए कहीं और क्यों नहीं ले गया? क्योंकि उसकी भविष्य की आशा उसी भूमि में थी। जैसे-जैसे हम इस अध्याय में आगे बढ़ते है, तो हम देखेंगे, हालांकि, अंतिम संस्कार का कार्य जो बहुत रोचक नहीं होता है और शायद कुछ लोगों को थोड़ी अजीब भी लग सकता हैं, लेकिन यहाँ एक बड़ी सच्चाई है जिसे देखना बहुत ज़रूरी है। पद 3 और 4 में लिखा है।

उत्पत्ति 23:3 “तब अब्राहम शव के पास से उठकर हित्तियों से कहने लगा।
उत्पत्ति 23:4 “मैं तुम्हारे बीच अतिथि और परदेशी हूँ; मुझे अपने मध्य में कब्रिस्तान के लिये ऐसी भूमि दो जो मेरी निज की हो जाए, कि मैं अपने मृतक को गाड़कर अपनी आँख की ओट करूँ।”
अब्राहम स्वयं को उस देश में अतिथि और परदेशी कहता है जो प्रतिज्ञा का देश था तथा जिसे देने की प्रतिज्ञा परमेश्वर ने उससे की थी। तब पद 5 और 6 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 23:5 “हित्तियों ने अब्राहम से कहा,“
उत्पत्ति 23:6 “हे हमारे प्रभु, हमारी सुन; तू तो हमारे बीच में बड़ा प्रधान है। हमारी क़ब्रों में से जिसको तू चाहे उसमें अपने मृतक को गाड़; हम में से कोई तुझे अपनी क़ब्र के लेने से न रोकेगा, कि तू अपने मृतक को उस में गाड़ने न पाए।”

यह हित्तियों के द्वारा अब्राहम को दिया गया बहुत ही उदार प्रस्ताव था। संभवतः उन्होंने अब्राहम से कहा, “हमारे कब्रस्थानों में से अपने लिए कोई जगह चुन ले। तुम्हे अपने बीच में पा कर हम सभी खुश हैं। अब्राहम ने उन पर बहुत अक्ष्छा प्रभाव डाला था। वे उसे एक सामर्थी राजकुमार कहा करते थे। अब्राहम का प्रीभाव वास्तव में महत्व रखता था ।तब आगे पद 7 से 9 में लिखा है।

उत्पत्ति 23:7 “तब अब्राहम उठकर खड़ा हुआ, और हित्तियों के सम्मुख, जो उस देश के निवासी थे, दण्डवत् करके कहने लगा।“
उत्पत्ति 23:8 “यदि तुम्हारी यह इच्छा हो कि मैं अपने मृतक को गाड़कर अपनी आँख की ओट करूँ, तो मेरी प्रार्थना है कि सोहर के पुत्र एप्रोन से मेरे लिये विनती करो।“
उत्पत्ति 23:9 “कि वह अपनी मकपेलावाली गुफ़ा, जो उसकी भूमि की सीमा पर है, उसका पूरा दाम लेकर मुझे दे दे, कि वह तुम्हारे बीच क़ब्रिस्तान के लिये मेरी निज भूमि हो जाए।”

मकपेलावाली गुफ़ा के स्थान को अब्राहम ने चुना, परन्तु वह उसे खरीदना चाहता था, वह उनसे दान में कुछ नहीं चाहता था। दूसरे शब्दों में, जब तब परमेश्वर वह भूमि उसे न दे, वह अपनी सब आवश्यकता और इच्छा को खरीद कर ही उपयोग करेगा। इस कारण वह कब्रस्थान की भुमि को खरीदता है।

अब फिर मेरे मन में प्रश्न आता है, अब्राहम सारा को दफनाने के लिए किसी अन्य स्थाप पर क्यों नहीं ले गया? उसने उसे वहीं दफन इसलिए किया क्योंकि वह प्रतिज्ञा की गई भमि थी जो उनके भविष्य की आशा थी। जैसे-जैसे आप बाइबल को पढ़ते जाएंगे, तो आप पाएंगे कि परमेश्वर के पास दो महान आशा और दो महान उद्देश्य है। उसके पास एक सांसारिक उद्देश्य है और उसके पास एक स्वर्गिक उद्देश्य है। एक सांसारिक उद्देश्य, जिसका अर्थ है कि जिस पृथ्वी पर आप और मैं रहते हैं वह अनन्त में प्रवेश करने जा रही है। उसे एक नए स्वरूप में ढाल दिया जाएगा। एक नया स्वर्ग और एक नई पृथ्वी होगी। परन्तु उस समय एक नई पृथ्वी होगी जिस पर अनन्तकाल तक निवास किया जाएगा। यही वह प्रतिज्ञा है जो परमेश्वर ने अब्राहम से और उसके वंशजों से किया था। परमेश्वर अपनी योजना के पूरा हो जाने के बाद इस पृथ्वी को जिस पर आप और मैं रहते हैं, किसी कूड़े के ढेर में फेंकने नहीं वाला है, और न ही वह इसे किसी पुरानी कंडम कार की तरह किसी विरान स्थान में फेंकने जा रहा है। परमेश्वर इसे छोड़ेगा नहीं। वह इसे एक नया स्वरूप प्रदान करने जा रहा है। वह नई पृथ्वी अनन्त कान में प्रवेश करेगी और लोग उस में वास करेंगे। अब्राहम की यही आशा थी। अब्राहम भी उसी भूमि में दफन किया जाना चाहता था, ताकी जब पुनरूत्थान हो तब वह और सारा दोनों एक ही भूमि में जिलाए जाएं। वह यह तो नहीं जानता था कि कितने लोग उसके साथ होंगे, पर वह विश्वास करता था कि लाखों लोग निश्चित ही मृतकों में से जिलाए जाएंगे। यह उनकी आशा है। यह सांसारिक आशा है और यह साकार होगी।

हमारे प्रभु यीशु मसीह ने उपरौती कोठरी में अपने चेलों से यूहन्ना 14:1-3 में, ऐसा कहा जो पुराने नियम के शिष्य थे और उनकी आशा भी पुराने नियम पर आधारित थी, “फसह के पर्व से पहले, जब यीशु ने जान लिया कि मेरी वह घड़ी आ पहुँची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, तो अपने लोगों से जो जगत में थे जैसा प्रेम वह रखता था, अन्त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा। जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय यीशु ने, यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्वर के पास से आया हूँ और परमेश्वर के पास जाता हूँ।“ वह नए यरूशलेम की बात कर रहा था जिसे वह आज बना रहा है, और यही वह स्थान हैं जहाँ कलीसिया जाने वाली है। नया यरूशलेम कलीसिया का स्थाई निवास होगा। यह शिक्षा उन चेलों के लिए एकदम नई थी और आज बहुत से मसीही विश्वासियों के लिए भी एकदम नई है। परमेश्वर ने अब्राहम से कभी ऐसा नहीं कहा कि वह उसे पृथ्वी से निकाल का स्वर्ग में ले जाएगा। बल्कि परमेश्वर अब्राहम से कहता रहा, “यह मि मैं तुझे दूँगा“। अब्राहम ने परमेश्वर की इस बात पर विश्वास किया और यही कारण था कि सारा को उसी भूमि में दफनाना चाहता था। वह स्थान उसके लिए अपनों को दफनाने का स्थान बन गया। वह स्वयं भी वहीं दफन होना चाहता था और ऐसा ही हुआ।

अब्राहम द्वारा खरीदी गई भूमि का वास्तविक स्थान हेब्रोन है, जो यरूशलेम के दक्षिण दिशा में करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आज उस स्थान में एक मस्ज़िद बना दी गई है। आप यदि इस्राएल भ्रमण पर जाएंगे तो इस स्थान को छोड़ आप को किसी भी अन्य स्थान पर डर नहीं लगेगा। सभी पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि हेब्रोन में सतर्क रहें क्योंकि आज वहाँ के स्थानीय लोग सभी पर्यटकों और बाहरी लोगों के विरोध में रहते हैं। वे सिर्फ धन कमाने के दृष्टिकोण से पर्यटकों को वहाँ आने देते हैं। आप उस मस्ज़िद के भीतर जाकर अब्राहम और सारा, इसहाक और रिबका तथा याकूब और लिया की कब्र देख सकते हैं, परन्तु राहेल की कब्र बेथलहम में है। ये सारे लोग इस्राएल में दफनाए गए क्योंकि इनकी आशा थी कि वे मृतकों में से उसी भूमि में जिलाए जाएंगे। यह सांसारिक आशा है। परन्तु हम जो नए नियम के विश्वासी हैं, हमारे पास स्वर्गिक आशा है। मुझे भरोसा है कि आप इस बात को समझ गए होंगे कि यह दफन क्रिया उस समय अब्राहम के लिए क्यों इतनी महत्वपूर्ण थी।

अब्राहम अब उस भमि को खरीदने के लिए प्रस्ताव रखता है। कृपया पद 10 से 12 पर ध्यान दें, लिखा है।

उत्पत्ति 23:10 “एप्रोन तो हित्तियों के बीच वहाँ बैठा हुआ था, इसलिये जितने हित्ती उसके नगर के फाटक से होकर भीतर जाते थे, उन सभों के सामने उसने अब्राहम को उत्तर दिया।“
उत्पत्ति 23:11 “हे मेरे प्रभु, ऐसा नहीं, मेरी सुन; वह भू्िम मैं तुझे देता हूँ, और उसमें जो गुफ़ा है, वह भी मैं तुझे देता हूँ; अपने जातिभाइयों के सम्मुख मैं उसे तुझ को दिए देता हूँ; अतः अपने मृतक को क़ब्र में रख।”
उत्पत्ति 23:12 “तब अब्राहम ने उस देश के निवासियों के सामने दण्डवत् किया।“

क्या आप ने इस समय अब्राहम और इन हित्ती लोगों की उदारता पर ध्यान दिया, विशेष तौर पर एप्रोन की। वे लोग उन दिनों में बहुत नम्र और दयालु स्वाभाव के थे। हमारी विचारधारा ऐसी है कि वे गुफाओं में रहने वाले जंगली लोग थे जो लड़ाई करने वाले बरबर लोग थे। अगर अब्राहम, इसहाक, याकूब और पुराने नियम के अन्य संत जिनका यहाँ उल्लेख किया गया है आज किसी आधुनिक शहर में भी वास करते होते तो वे यही बताते कि उनके पूर्वज गुफाओं में रहा करते थे और वे पूर्ण रूप से असभ्य, पार्श्विक, गंवार और दयारहित थे। मेरे विचार में वे हमारे बारे में भी एसा कह समते हैं, परन्तु आज हम उनके बारे में ऐसा कह सकते हैं। यह बहुत रोचक है वचन प्रगट करता है कि वे अत्यंत नम्र और दयालु थे। और लिखा है, “तब अब्राहम ने उस देश के निवासियों के सामने दण्डवत् किया।“ तब पद 13 से 16 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 23:13 “और उनके सुनते हुए एप्रोन से कहा, “यदि तू ऐसा चाहे, तो मेरी सुन: उस भूमि का जो दाम हो, वह मैं देना चाहता हूँ; उसे मुझ से ले ले, तब मैं अपने मृतक को वहाँ गाड़ूँगा।”
उत्पत्ति 23:14 “एप्रोन ने अब्राहम को यह उत्तर दिया।“
उत्पत्ति 23:15 “हे मेरे प्रभु, मेरी बात सुन; उस भूमि का दाम तो चार सौ शेकेल रूपा है; पर मेरे और तेरे बीच में यह क्या है? अपने मृतक को कब्र में रख।”
उत्पत्ति 23:16 “अब्राहम ने एप्रोन की मानकर उसको उतना रूपा तौल दिया, जितना उसने हित्तियों के सुनते हुए कहा था, अर्थात् चार सौ ऐसे शेकेल जो व्यापारियों में चलते थे।“

इसका अर्थ है कि अब्राहम ने उन दिनों के कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उस भूमि और गुफा की कीमत उसे चुका दी। तब आगे पद 17 से 20 में लिखा है।

उत्पत्ति 23:17 “इस प्रकार एप्रोन की भूमि, जो मम्रे के सम्मुख मकपेला में थी, वह गुफ़ा समेत और उन सब वृक्षों समेत भी जो उसमें और उसके चारों ओर सीमा पर थे।“
उत्पत्ति 23:18 “जितने हित्ती उसके नगर के फाटक से होकर भीतर जाते थे, उन सभों के सामने अब्राहम के अधिकार में पक्की रीति से आ गई।“
उत्पत्ति 23:19 “इसके पश्चात् अब्राहम ने अपनी पत्नी सारा को उस मकपेला वाली भूमि की गुफ़ा में, जो मम्रे के अर्थात् हेब्रोन के सामने कनान देश में है, मिट्टी दी।“
उत्पत्ति 23:20 “इस प्रकार वह भूमि गुफ़ा समेत जो उसमें थी, हित्तियों की ओर से कब्रिस्तान के लिये अब्राहम के अधिकार में पक्की रीति से आ गई।“

स्पष्ट रूप से यही वह स्थान है जहाँ आज एक मस्ज़िद स्थित है। इसे इस्लाम में विश्व की दूसरी या तीसरी प्रमुख मस्ज़िद का दर्जा प्राप्त है। कॉयरो और अन्य स्थान में अनेक मस्ज़िदें है जो बहुत सुन्दर बनाई गई है। उन में सब से महत्वपूर्ण मस्ज़िद मक्का में है। ये सभी मस्ज़िदें उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अरब से सभी लोगों का अब्राहम के वंशज है।
स्पष्ट तौर पर मित्रों हम कह सकते हैं कि अब्राहम का विश्वास उसे उसे स्थान पर लाया और उस ने परमेश्वर की बातों पर विश्वास कर उस स्थान को अपने लोगों की भूमि होने के लिए खरीद लिया। परन्तु फिर भी अब्राहम उस प्रतिज्ञा के देश में स्वयं को परदेशी और यात्री मान कर चलता रहा। हम भी इस जग के नहीं है पर हम भी इस संसार में परदेशी और यात्री है। तो आइए इस संसार में अपना जीवन भी एक परदेशी और यात्री की तरह व्यतीत करें। आइए प्रार्थना के साथ समाप्त करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

आज के पैसेज से आपने जो मुख्य बात सीखी, उसे लिखें।

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