उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 22:1 – 22:14
कार्यक्रम : #0039
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प्रिय मित्रों, प्रभु यीशु के पवित्र नाम में आप सबको प्रेम भरा नमस्कार! मुझे आशा है कि आप अपने प्रियों के साथ सुरक्षित हैं, और प्रभु के वचन की संगति में बढ़ रहे हैं। पिछले अध्ययन में हमने देखा कि इसहाक का जन्म हुआ, और हाजिरा और उसके पुत्र इश्माएल को घर से बाहर जाना पड़ा। साथ ही हमने देखा था कि परमेश्वर इश्माएल से भी एक बड़ी जाति बनाने की प्रतिज्ञा करता है, तथा अब्राहम और अबीमेलेक बेर्शेबा में एक दूसरे से वाचा बाँधते है।
अध्याय 22
विषयः परमेश्वर अब्राहम को इसहाक का बलिदान करने की आज्ञा देते हैं, परमेश्वर अब्राहम को रोकता है, परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को पुनः दोहराते हैं, अब्राहम बीरशिबा को लौटता है।
इस अध्याय में भी हम पवित्रशास़्त्र बाइबल के एक और महान विषय पर आते हैं। इस वक्त हम उत्पत्ति की पुस्तक के महान पहाड़ों की चोटियों पर विचरण कर रहे हैं। अध्याय 22 में हमें अब्राहम द्वारा इसहाक के बलिदान चढ़ाए जाने का विवरण दिया गया है। परमेश्वर अब्राहम को इसहाक का बलिदान चढ़ाने की आज्ञा देता है और जैसे ही अब्राहम उसका बलिदान चढ़ाने जा रहा था तब परमेश्वर उसे अन्तिम पल में रोक देता है। इस अध्याय के साथ अब्राहम पर परमेश्वर का सातवां और अन्तिम प्रगटिकरण देखते हैं। इस अध्याय के बाद परमेश्वर अब्राहम को न तो दर्शन देते हैं और न ही कुछ करते को कहता है। यह सर्वोच्च परिक्षा है जो इस मनुष्य पर लाई गई थी।
मित्रों, यदि आपको बाइबल से दस महान अध्यायों को चुनना हो तो, आप अवश्य ही अध्याय 22 को शामिल करेंगे। उसका एक कारण यह भी है कि पहली बार, यहाँ मानव बलिदान करने की सलाह दी गई है। यह परमेश्वर की योजना और उद्देश्य में था कि वह इसे स्पष्ट करे, कि मानव बलिदान गलत है। यह घटना इस बात को प्रगट करती है, और साथ ही यह भी प्रगट करती है कि पापियों को बचाने के लिए परमेश्वर की योजना में एक जीवन को भी बलिदान करना ज़रूरी है। मनुष्यों के पुत्रों में ऐसा कोई भी नहीं है, जो उस बलिदान का स्थान ले सके। केवल परमेश्वर का पुत्र यीशु ही मनुष्य था। पौलुस एक रोचक बात कहता हैं, “उसने अपने एकलौते पुत्र को भी न रख छोड़ा।“ परन्तु आप इसमें जोड़ सकते हैं, उसने अब्राहम के पुत्र को छोड़ दिया और उसे इसहाक का बलिदान करने नहीं दिया।
आप इस अध्याय की तुल्ना भजन संहिता 22 अध्याय और यशायाह 53 से कर सकते है। मैंने पहली बार इस अध्याय में इन महान सत्यों को देखा जो मसीह के क्रूस को चित्रित करते हैं, यह विस्मयकारी था। आप पाते हैं कि न केवल इसहाक के जन्म में, परन्तु इसहाक के बलिदान में भी यीशु मसीह के जीवन के साथ एक अनोखी समानता है।
याकूब 2:21 में याकूब इस संदर्भ में एक रोचक वक्तव्य देता है जो बाइबल के अन्य भागों के विरोधाभास में लगता है। याकूब 2:21 “जब हमारे पिता अब्राहम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्या वह कर्मों से धार्मिक न ठहरा था?“ परन्तु पौलुस रोमियों 4:1-3 में कहता है, “इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्वर के निकट नहीं। पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।” अब सही कौन है? याकूब या फिर पौलुस? मेरा मानना है कि दोनों ही सही हैं। सब से पहली बात कि दोनों एक ही बात बल दे रहे हैं – विश्वास। याकूब विश्वास के कार्यों के बारे में बात कर रहा है, न कि व्यवस्था के कामों के बारे में। तथा पौलुस, परमेश्वर के सामने धार्मी ठहराए जाने की बात कह रहा है। उत्पत्ति 15 अध्याय का हवाला देते हुए, जब अब्राहम ने विश्वास के पथ पर चलना आरंभ किया था। उस समय केवल परमेश्वर ही उसके हृदय के विचारों को जानता था। और परमेश्वर ने देखा कि अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया। उत्पत्ति 15:6 “उसने (अब्राहम) यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।“ परन्तु हम आगे देखते हैं कि अब्राहम कई बार असफल हुआ। मैं सोचता हूँ कि उसके पड़ोसियों ने कहा होगा, “हम इसमें कुछ भी धार्मिकता नहीं देखते हैं।“ परन्तु वह दिन आया, जब अब्राहम ने अपने बेटे को बलिदान के लिए वेदी पर रखा, तब कठोर से कठोर हृदय वाले पलिश्ति को भी अब्राहम की इस क्रिया को देखकर स्वीकार करना पड़ा होगा कि अब्राहम ने अपने विश्वास को कर्म के द्वारा प्रगट किया। याकूब कहता है कि अब्राहम कर्मों से धर्मी ठहराया गया। वह कब धर्मी ठहराया गया? जब उसने इसहाक को बलिदान किया। परन्तु अब प्रश्न उठता है, क्या अब्राहम ने वास्तव में इसहाक को वेदि पर बलिदान किया था? निश्चित तौर पर मित्रों उत्तर है उसने नहीं किया, परन्तु वह बलिदान करने की इच्छा रखता था। इसी इच्छा रखने वाली क्रिया के बारे में याकूब बात कर रहा है। जो इस बात को प्रगट करता है कि अब्राहम ने विश्वास का कार्य किया। यहाँ पर याकूब उत्पत्ति के 22वें अध्याय में दिखाए गए विश्वास के कार्य पर बल दे रहा है, और पौलुस अब्राहम के उस विश्वास के बारे में बात कर रहा है जो पंद्रहवें अध्याय में उसके हृदय में था।
परमेश्वर अब्राहम को इसहाक का बलिदान करने की आज्ञा देता है।
आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 22 अध्याय का पद 1
उत्पत्ति 22:1 “इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि परमेश्वर ने अब्राहम से यह कहकर उसकी परीक्षा की, “हे अब्राहम!” उसने कहा, “देख, मैं यहाँ हूँ।”
यहाँ पर अंग्रेजी में एक कठोर शब्द का उपयोग किया गया है जिसका अर्थ होता है, किसी को लालच दे कर परिक्षा में डालना, परन्तु हिन्दी में परिक्षा शब्द का उपयोग किया गया है जिसका अर्थ है किसी को परखना या उसका परिक्षण करना। याकूब अपनी पत्री में स्पष्ट करता है कि परमेश्वर बुराई के द्वारा किसी की परिक्षा नहीं करता। परमेश्वर लोगों के विश्वास को परखने के लिए परिक्षण करता है। जब परमेश्वर ने अब्राहम को परखा तब उसे कुछ अनोखा करने को कहा। तब आगे पद 2 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 22:2 “उसने कहा, “अपने पुत्र को अर्थात् अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिस से तू प्रेम रखता है, संग लेकर मोरिय्याह देश में चला जा; और वहाँ उसको एक पहाड़ के ऊपर जो मैं तुझे बताऊँगा होमबलि करके चढ़ा।”
इस अध्याय के तुरन्त बाद हमें उत्पत्ति 23:1 में बताया गया है कि सारा की आयु 127 वर्ष की हुई तब उसकी मृत्यु हो गई। जब आप इस आधार गणना करते हैं तो हमें पता चलता है कि इसहाक कोई छोटा बालक नहीं था। जब सारा 90 साल की थी तब इसहाक का जन्म हुआ था और 127 वर्ष में उसकी मृत्यु हुई। इसका अर्थ है करीब 37 वर्ष बीत चुके थे। यद्यपि इस अध्याय में उसे बेटा कहकर संबोधित किया गया है इसलिए हमको यह पता नहीं चलता कि वह 30 साल से उपर का रहा होगा। संभवतः वह 30 या 33 वर्ष की आयु में था।
जब परमेश्वर कहता है, “अपने पुत्र को अर्थात् अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिस से तू प्रेम रखता है।” यह अब्राहम के लिए कितना हृदयविदारक रहा होगा। प्रभु यीशु मसीह ने परमेश्वर की त्रीएकता में पुत्र का स्थान लिया है। “तेरा एकलौता पुत्र“ – उसी प्रकार प्रभु यीशु को भी परमेश्वर का एकलौता पुत्र कहा गया है। “अपने एकलौते पुत्र इसहाक को, जिस से तू प्रेम रखता है” – प्रभु यीशु ने कहा था “मेरा पिता मुझ से प्रेम रखता है।“
“उसे संग लेकर मोरिय्याह देश में चला जा।“ बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि मोरिय्याह में यह वही स्थान है जहाँ कई सदियों बाद सुलैमान ने मन्दिर बनवाया था तथा वही स्थान है जहाँ प्रभु यीशु मसीह बलिदान किया गया थाय अर्थात शहरपनाह के बाहर। जब मैं यरूशलेम गया था तब मैंने देखा कि मन्दिर का स्थल और गुलगुता पहाड़ ज़्यादा दूर नहीं है, वे एक ही पर्वत श्रृंख्ला पर हैं, उनके बीच से मार्ग काटकर बनाया गया है। परन्तु यह उसी पर्वत पर है, जिसे मोरिय्याह कहा जाता था। हम यह नहीं कह सकते कि प्रभु यीशु ठीक उसी स्थान पर बलिदान किया गया, क्योंकि हम नहीं जानते, परन्तु उसकी मृत्यु उसी पवर्त श्रृंख्ला पर हुई जिस पर अब्राहम ने इसहाक को बलिदान करने के लिए चढ़ाया था।
आगे कहता है, “और वहाँ उसको एक पहाड़ के ऊपर जो मैं तुझे बताऊँगा होमबलि करके चढ़ा।” मूसा की व्यवस्था के दिए जाने तक केवल होम बलि ही चढ़ाई जाती थी, इसके बाद पापबलि और दोषबलि चढ़ाई जाने लगी। यहाँ पर होमबलि यीशु मसीह का चित्रण करता है कि वह कौन है? यह बलिदान में मानव का चढ़ाया जाना है, और स्पष्ट रीती से यह एक नेतिक प्रश्न उत्पन्न करता है, क्या नरबलि गलत नहीं है? जीहाँ, नैतिक तौर पर यह गलत है। अगर आप उस दिन अब्राहम से मुलाकात करते जिस दिन वह इसहाक के साथ मोरिय्याह को जा रहा था, आप शायद उससे पूछते, अब्राहम तुम कहाँ जा रहे हो? संभवतः वह जवाब देता, “इसहाक को बलिदान करने जा रहा हूँ।“ तब शायद आप कहते, “क्या आप नहीं जानते हैं, कि ऐसा करना गलत है?“ जी हाँ! मुझे सिखाया गया है, कि यह गलत है। तब अब्राहम उत्तर देता, जी हाँ! मुझे सिखाया गया है, कि यह गलत है। मैं जानता हूँ कि यहाँ पड़ोसी देशों में मानव बलि चढ़ाई जाती हैं, पलिश्ती लोग मोलेक देवता को नरबलि चढ़ाते हैं, परन्तु मुझे इसके विपरीत सिखाया गया है। तब आप उससे पूछते कि फिर तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? और त बवह आप को समझाने का प्रयास करता कि, मैं वही कर रहा हूँ जो परमेश्वर ने आज्ञा दी है। मैं इसे नहीं समझ पाता, लेकिन मैं पिछले पचास वर्षों से उसके साथ-साथ चल रहा हूँ। उसने मुझे कभी असफल होने नहीं दिया और न ही कभी उसने मुझे ऐसा कार्य करने को कहा है जो मेरे लिए भला न हो। मैं यह समझ नहीं पाता हूँ, लेकिन मैं यह विश्वास करता हूँ कि यदि मैं उसके साथ चलता रहा, तो वह इसहाक को मृतकों में से ज़िन्दा कर देगा। मैं विश्वास करता हूँ कि वह ऐसा करेगा।
इसहाक के साथ अब्राहम की यह अद्भुत तस्वीर है। तब पद 3 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:3 “अतः अब्राहम सबेरे तड़के उठा और अपने गदहे पर काठी कसकर अपने दो सेवक, और अपने पुत्र इसहाक को संग लिया, और होमबलि के लिये लकड़ी चीर ली; तब निकल कर उस स्थान की ओर चला, जिसकी चर्चा परमेश्वर ने उससे की थी।“
अब्राहम होम बलि के लिए अपने साथ इसहाक और लकड़ी ले कर आगे बढ़ता है। तब पद 4 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:4 “तीसरे दिन अब्राहम ने आँखें उठाकर उस स्थान को दूर से देखा।“
अब्राहम को वहाँ पहुँचने में तीन दिन लगे, परन्तु इस बात को याद रखिए कि तीसरे दिन ही, उसने अपने पुत्र इसहाक को जीवित वापस पाया, अर्थात् मृत्यु से जीवन, जैसे वह पहले था। अब्राहम के देखने का तरीका यही था कि उसका पुत्र इसहाक, उसके लिए तीसरे दिन जीवित किया गया। हमारे सामने यह एक महान चित्रण है। तब पद 5 में कहता है।
उत्पत्ति 22:5 “और उसने अपने सेवकों से कहा, “गदहे के पास यहीं ठहरे रहो; यह लड़का और मैं वहाँ तक जाकर, और दण्डवत् करके, फिर तुम्हारे पास लौट आएँगे।”
यहाँ से आगे जो भी कार्य संपादित किया जाना है वह पिता और पुत्र के बीच में होगा, अर्थात अब्राहम और इसहाक के बीच। वास्तव में परमेश्वर ने क्रूस के कार्य में मनुष्य को दूर रखा। दोपहर की कड़ी धूप के समय अंधेरा छा गया, और मनुष्य को क्रूस से दूर कर दिया गया। लिखा है, जब रात आती है जिसमें कोई मानव काम नहीं कर सका। तथा अंत के उन तीन घंटों में वह क्रूस वेदी बन गया, जिस पर परमेश्वर का मेमना जो सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लेता है वह बलिदान किया गया। यह कार्य उस क्रूस पर केवल पिता और पुत्र के मध्य था। मनुष्य उससे बाहरा था और उसमें उसका कोई योगदान नहीं था। वही चित्र यहाँ भी दिखाया गया है, केवल अब्राहम और इसहाक अकेले। तब पद 6 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:6 “तब अब्राहम ने होमबलि की लकड़ी ले अपने पुत्र इसहाक पर लादी, और आग और छुरी को अपने हाथ में लिया; और वे दोनों एक साथ चल पड़े।“
कहता है, “तब अब्राहम ने होमबलि की लकड़ी ले अपने पुत्र इसहाक पर लादी।“ आप को याद होगा कि मसीह यीशु भी अपना क्रूस स्वयं उठा कर गया था। यहाँ पर आग न्याय को प्रगट करती है, और छूरी न्याय के कार्य और बलिदान को संपादित करने या अंजाम देने को प्रगट करती है। आगे पद 7 और 8 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:7 “इसहाक ने अपने पिता अब्राहम से कहा, “हे मेरे पिता,” उसने कहा, “हे मेरे पुत्र, क्या बात है?” उसने कहा, “देख, आग और लकड़ी तो हैं; पर होमबलि के लिये भेड़ कहाँ है?”
उत्पत्ति 22:8“ अब्राहम ने कहा, “हे मेरे पुत्र, परमेश्वर होमबलि की भेड़ का उपाय आप ही करेगा।” और वे दोनों संग संग आगे चलते गए।“
आगे पढ़ने पर पद 13 में हम पाते हैं कि लिखा है, “एक मेढ़ा अपने सींगों से एक झाड़ी में फँसा हुआ है;अतः अब्राहम ने जाके उस मेढ़े को लिया, और अपने पुत्र के स्थान पर उसे होमबलि करके चढ़ाया।“ तब अब्राहम कहता है कि यहोवा स्वयं मेम्ने का उपाय करेगा। परन्तु वहाँ पर कोई मेम्ना नहीं था वह तो एक मेढ़ा था। इसमें भिन्नता है। मेम्ने का प्रबंध तब तक नहीं हुआ, जब तक कई शताब्दियों के बाद यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने उसे पहचान न लिया और यूहन्ना 1:29 में यह कहते हुए स्पष्ट नहीं किया, “देखो, यह परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है।“ अब्राहम ने अपने बेटे से कहा, “परमेश्वर स्वयं ही होमबलि के लिए मेम्ने का प्रबंध करेंगे।“ यहाँ पर महत्त्वपूर्ण बात यह हैं कि अब्राहम भविष्यद्वक्ता के समान बातें कर रहा था।
अब अब्राहम अपने बेटे को होमबलि चढ़ाने के लिए तैयार हैं, यद्यपि वह पूर्ण रीति से इसे नहीं समझ पा रहा था। तब पद 9 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 22:9 “जब वे उस स्थान को जिसे परमेश्वर ने उसको बताया था पहुँचे; तब अब्राहम ने वहाँ वेदी बनाकर लकड़ी को चुन चुनकर रखा, और अपने पुत्र इसहाक को बाँध कर वेदी पर की लकड़ी के ऊपर रख दिया।“
इसहाक कोई छोटा बच्चा नहीं था जिसे अब्राहम को बांधना पड़ता। वह एक वयस्क था, तथा मैं विश्वास करता हूँ कि यदि बल की बात की जाए तो वह अब्राहम से अधिक ताकतवर रहा होगा। परन्तु इसहाक यह सब आज्ञाकारिता में कर रहा था। प्रभु यीशु मसीह भी क्रूस पर यह कहते हुए चढ़ गया, “मेरी नहीं पर तेरी इच्छा पूरी हो।“ वह परमेश्वर की इच्छा पूरी करने को क्रूस पर चढ़ा था। यह भी एक अद्वीतीय तस्वीर है। तब पद 10 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:10 “फिर अब्राहम ने हाथ बढ़ाकर छुरी को ले लिया कि अपने पुत्र को बलि करे।
इस समय मैं और आप भी शायद यही कहते, “अब्राहम क्या तुम ऐसा ही करने जा रहे हो?” ऐसा लगता है कि परमेश्वर तुमको अनुमति देने जा रहा हैं। अब्राहम कहा था, “मैं निश्चित हूँ, मुझे सिखाया गया है कि यह गलत है, पर मैं इसे समझ नहीं पा रहा हूँ, परन्तु मैंने आज्ञा पालन भी सीखा है।“
अब्राहम के जीवन में यह बहुत कठिन समय था। परमेश्वर ने उसे चार बड़े संकटों से गुजरने दिया था। जिनमें से हर एक उसकी आत्मा के लिए असली परीक्षा थी, उसके हृदय पर एक बड़ा बोझ था। सबसे पहले, उसे कसदियों के ऊर में अपने सभी सगे-संबंधियों को छोड़ने के लिए कहा गया। यह अब्राहम के लिए कठिन परीक्षा थी। उसने आरंभ में यह बहुत अच्छे से नहीं किया, लेकिन फिर भी, वह अलग हो ही गया। फिर उसके भतीजे लूत के साथ अगली परिक्षा आई। अब्राहम लूत से बहुत प्यार करता था, अगर वह उससे प्यार नहीं करता, तो वह उसे अपने साथ लेकर नहीं जाता। लेकिन एक समय आया जब उन्हें अलग होना पड़ा, और लूत सदोम चला गया। फिर हाजिरा से जन्में उसके बेटे, इश्माएल के साथ एक परिक्षा आई। इस पर अब्राहम परमेश्वर को पुकार उठा, “ऐसा हो कि वह तेरे सामने रहने पाए।“ वह इश्माएल से प्रेम करता था और उससे अलग होना नहीं चाहता था। वह अलगाव से घृणा करता था। अब अब्राहम के सामने उसके जीवन की चौथी और सब से बड़ी परिक्षा आती है, उसे इसहाक को बलिदान करने कहा जाता है। अब्राहम इन बातों को समझ नहीं पा रहा था, सिर्फ एक कारण ये कि, परमेश्वर ने उससे कहा था, जैसा इब्रानियों 11ः18 में भी लिखा है, “इसहाक से तेरा वंश कहलाएगा, वही अपने एकलौते को चढ़ाने लगा।“ अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया कि वह इसहाक को मृतकों में से भी जिला सकता है। परन्तु जहाँ तक अब्राहम का सवाल है, वह इस बलिदान को चढ़ाने के लिए तैयार था।
परमेश्वर अब्राहम को इसहाक का बलिदान करने से रोकता है।
याकूब लिखता है कि अब्राहम अपने पुत्र का बलिदान चढ़ाने के द्वारा से धर्मी ठहरा। पर आप एक मिनट रूकें। क्या अब्राहम ने अपने बेटे का बलिदान किया? क्या आप की बाइबल में ऐसा लिखा है कि, अब्राहम नें अपने बेटे पर छूरी चलाया? नहीं, मेरी बाइबल में भी ऐसा नहीं लिखा है। पर आगे पद 11 और 12 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:11 तब यहोवा के दूत ने स्वर्ग से उसको पुकार के कहा, “हे अब्राहम, हे अब्राहम!” उसने कहा, “देख, मैं यहाँ हूँ।”
उत्पत्ति 22:12 “उसने कहा, “उस लड़के पर हाथ मत बढ़ा, और न उससे कुछ कर; क्योंकि तू ने जो मुझ से अपने पुत्र, वरन् अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा; इससे मैं अब जान गया कि तू परमेश्वर का भय मानता है।”
अब परमेश्वर को जान पड़ता है कि अब्राहम परमेश्वर का भय मानता है। उसने कैसे जाना? उसके कार्य के द्वारा, उस क्रिया से। इससे पहले विश्वास के द्वारा उसने जाना था। परमेश्वर आप के हृदय को देखता है। आप के मन को देखता है। वह जानता है कि आप सच्चे हैं या नहीं, परन्तु आप के मित्र और पड़ोसी यहाँ तक की आप के परिवार वाले भी आप के मन को नहीं जानते। वे केवल आप के कार्य के द्वारा से जानते हैं। यही कारण है कि याकूब कहता है, “कर्म बिना विश्वास मरा हुआ है।“ विश्वास को कुछ कार्य उत्पन्न करने की आवश्यकता है।
परमेश्वर ने अब्राहम को परखा। मैं विश्वास करता हूँ मित्रों, यदि परमेश्वर किसी मनुष्य को बुलाता है, परमेश्वर यदि किसी मनुष्य का उद्धार करता है, या फिर किसी मनुष्य जिसे वह उपयोग करने जा रहा है, उसे वह परखता है। परमेश्वर ने अब्राहम को परखा और परमेश्वर उन सभी को परखता है जो उसके हैं। वह आप को और मुझे भी परखता है, और ये परिक्षण हमारे विश्वास को दृढ़ तथा मजबूत करने के लिए होते हैं। हमें स्थापित करने के लिए, हमें उसकी सेवा के योग्य बनाने के लिए होते हैं। अब अब्राहम की एक बड़ी परीक्षा ली जाने वाली है, और इसके बाद परमेश्वर उससे कुछ भी नहीं पूछेगा। तब पद 13 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 22:13 “तब अब्राहम ने आँखें उठाईं, और क्या देखा कि उसके पीछे एक मेढ़ा अपने सींगों से एक झाड़ी में फँसा हुआ है; अतः अब्राहम ने जाके उस मेढ़े को लिया, और अपने पुत्र के स्थान पर उसे होमबलि करके चढ़ाया।“
अदन की वाटिका से लेकर मसीह यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने तक, इस छोटे पशु को बदले जाने का काम किया गया है जो उस आने वाले मसीहा की ओर इशारा करता था, यही कारण है कि परमेश्वर कभी भी मानव बलिदान की अनुमति नहीं देता है। परन्तु जब उसका पुत्र इस संसार में आया तब, वह उस क्रूस पर चढ़ा और मारा गया। रोमियों 8ः32 कहता है, “जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न देगा?“ वह क्रूस एक वेदी बन गई जिस पर पर परमेश्वर का मेम्ना जो जगत के पापों को उठा ले जाता है, बलिदान किया गया। यह अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। तब पद 14 में लिखा है।
उत्पत्ति 22:14 “अब्राहम ने उस स्थान का नाम यहोवा यिरे रखा। इसके अनुसार आज तक भी कहा जाता है कि यहोवा के पहाड़ पर उपाय किया जाएगा।“
अब्राहम अब उस स्थान का नामकरण करता है, जिसके लिए बहुत से लोग विश्वास करते हैं कि सुलैमान का मन्दिर उस पर ही बनाया गया था। गुलगुथा जिसे खोपड़ी का स्थान कहा जाता है, वह उसकी पवर्त श्रृंख्ला पर स्थित है जिस पर मन्दिर बनाया गया था। यहीं अब्राहम ने अपने बेटे को बलिदान किया था, और इसी पवर्त पर हमारा प्रभु यीशु मसीह बलिदान किया गया था। यह महिमामय और अद्भुत बात है जिसे हम यहाँ देखते हैं। अब्राहम ने उस स्थान का नाम, यहोवा-यिरे रखा, जिसका अर्थ है, यहोवा उपाय करेगा। यही वह स्थान है जहाँ परमेश्वर ने अब्राहम के लिए रास्ता बनाया था, दखल दिया था, मार्ग निकाला था।
आइए मित्रों हम उस परमेश्वर को धन्यवाद दें जो हमारे लिए मार्ग निकालता है। इन्टरवेन करता है। असंभव को संभव बनाता है। आइए प्रार्थना के साथ समाप्त करें। ।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
-
A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
-
B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
