उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 21:1 - 21:34
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 21:1 – 21:34
कार्यक्रम : #0038

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प्रिय मित्रों आप सभी को प्रभु यीशु के नाम में प्रेम भरा नमस्कार और स्वागत है। आज हम अपने अध्ययन को अध्याय 21 से आरंभ करने जा रहे हैं। जिसका विषय है।

विषय: इसहाक का जन्म, हाजिरा और इश्माएल का निकाला जाना हैं, बीरशिबा के निकट अब्राहम और अबीमेलेक

पिछले अध्याय का केन्द्र था कि पाप का हल निकाला जाना चाहिए, पाप का अंगिकार किया जाना चाहिए, और अब्राहम और सारा के जीवन में इसहाक के जन्म के पहले पाप का निराकरण हो जाना चाहिए। अब 21वें अध्याय में हम इसहाक का जन्म देखते हैं। आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 21 अध्याय का पद 1 और 2

इसहाक का जन्म

उत्पत्ति 21:1 “यहोवा ने जैसा कहा था वैसा ही सारा की सुधि ले के उसके साथ अपने वचन के अनुसार किया।“
उत्पत्ति 21:2 “सारा अब्राहम से गर्भवती हुई; और उसके बुढ़ापे में उसी नियुक्त समय पर जो परमेश्वर ने उस से ठहराया था, एक पुत्र उत्पन्न हुआ।“

मित्रों आप देखेंगे कि इसहाक और मसीह यीशु के जन्म में हमें बहुत समानता देखने को मिलती है। मैं विश्वास करता हूँ कि इसहाक का जन्म हमें इसलिए दिया गया था कि मानवजाति के सामने मसीह के जन्म की महान सच्चाई प्रगट की जा सके। इसहाक का जन्म परमेश्वर द्वारा नियुक्त समय में हुआ, और पौलुस गलातियों 4:4 में कहता है, “परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के अधीन उत्पन्न हुआ।“ तब आगे पद 3 से 7 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 21:3 “अब्राहम ने अपने उस पुत्र का नाम जो सारा से उत्पन्न हुआ था इसहाक रखा।“
उत्पत्ति 21:4 “और जब उसका पुत्र इसहाक आठ दिन का हुआ, तब उसने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार उसका खतना किया।“
उत्पत्ति 21:5 “जब अब्राहम का पुत्र इसहाक उत्पन्न हुआ तब अब्राहम एक सौ वर्ष का था।“
उत्पत्ति 21:6 “और सारा ने कहा, “परमेश्वर ने मुझे प्रफुल्लित किया है; इसलिये सब सुननेवाले भी मेरे साथ प्रफुल्लित होंगे।”
उत्पत्ति 21:7 “फिर उसने यह भी कहा, “क्या कोई कभी अब्राहम से कह सकता था कि सारा लड़कों को दूध पिलाएगी? पर देखो, मुझ से उसके बुढ़ापे में एक पुत्र उत्पन्न हुआ।”

मित्रों, यहाँ पर कुछ महान सच्चाई प्रस्तुत की गई है जिसे हमें ध्यान देना आवश्यक है। सब से पहले इसहाक का जन्म चमत्कारिक था। वह प्रकृति के विपरीत था स्वभावित तौर पर असंभव था। रोमियों की पत्री के 4:19 में पौलुस अब्राहम के संदर्भ में कहता है, “वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ।“ गर्भ की मरी हुई की सी दशा। परमेश्वर मृत्यु से जीवन का संचार करता है। यह एक अलौकिक जन्म था। हमें इस सच्चाई पर ध्यान देना होगा कि परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह के अलौकिक जन्म को संसार पर अचानक ही प्रगट नहीं किया। उसने मनुष्यों को इस के लिए पहले से तैयार किया, और इस प्रकार हमें वर्षों पहले इसहाक के चमत्कारिक जन्म को प्रगट करता है।

हम यह भी पाते हैं कि परमेश्वर को इस दौरान अब्राहम और सारा दोनों के साथ जूझना पड़ा। उन्हें यह मानना पड़ा कि इस विषय में वे दोनों कुछ नहीं कर सकते थे, कि उन्हें एक सन्तान उत्पन्न हो। अब्राहम 100 और सारा 90 वर्ष की हो चुकी थी। दूसरे शब्दों में इसहाक के जन्म में उन दोनों का कोई योगदान नहीं था। तब आगे पद 8 में कहता है।

उत्पत्ति 21:8 “वह लड़का बढ़ा और उसका दूध छुड़ाया गया; और इसहाक के दूध छुड़ाने के दिन अब्राहम ने बड़ा भोज किया।“

वह छोटा बालक माता के दूध पर निर्भर था, पर वह दिन भी आया जब उससे माता का दूध छुड़ाया गया। इस में भी हमारे लिए शिक्षा है। जब भी एक माँ पालने में पड़े वचचे के लिए बोतल में दूध तैयार करती रहती है, उस बच्चे का शरीर उसके लिए मचलता रहता है। वह अपना हाथ, पैर हवा में चलाता और आवज करता रहता है क्योंकि उसे पीने के लिए दूध चाहिए होता है। 1 पतरस 2:2 लिखा है, “नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।“ मित्रों, दूध की लालसा करने वाले नवजात शीशु के समान, वचन रूपी दूध की लालसा करने वाला एक नए विश्वासी होना कितना अद्भुत है। लेकिन एक दिन आता है, जब आप एक विश्वासी के रूप में बढ़ने लगते हैं, और सिर्फ भजन संहिता 23 और यूहन्ना 14 अध्याय को पढ़ने के बजाय आप पूरी बाइबल पढ़ने की कोशिश करते हैं। कृपया आप अपने आत्मिक जीवन में आगे बढ़ते जाएं। जीवन भर मसीह में बालक न बने रहें। इब्रानियों की पत्री 5:13-14 पद में परमेश्वर द्वारा दी गई चेतावनी देखें, “क्योंकि दूध पीनेवाले बच्चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है। पर अन्न सयानों के लिये है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियाँ अभ्यास करते-करते भले-बुरे में भेद करने में निपुण हो गई हैं।“ मित्रों, हमें वचन में बढ़ने की आवश्यकता है। तब पद 9 और 10 में लिखा है।
हाजिरा और इश्माएल का घर से निकाला जाना

उत्पत्ति 21:9 “तब सारा को मिस्री हाजिरा का पुत्र, जो अब्राहम से उत्पन्न हुआ था, हँसी करता हुआ दिखाई पड़ा।“
उत्पत्ति 21:10 “इस कारण उसने अब्राहम से कहा, “इस दासी को पुत्र सहित निकाल दे; क्योंकि इस दासी का पुत्र मेरे पुत्र इसहाक के साथ भागी नहीं होगा।”

छोटे बच्चे इसहाक के घर में आगमन के कारण निश्चित तौर पर घर में बड़ी परेशानी उत्पन्न होने लगी। हम देखते हैं कि वह लड़का जो हाजिरा का पुत्र था, अर्थात इश्माएल, वह हँसी करता दिखाई देता है। अब हमें इश्माइल का व्यवहार और चरित्र दिखाई देने लगता है। इस समय तक वह बहुत सुशील और सभ्य बालक दिखाई दे रहा था, परन्तु अब, परिवार में एक और बालक के आगमन के बाद, इश्माएल अपना रंग दिखाने लगता है।

एक प्रकार से देखा जाए तो यह उस सच्चाई को प्रगट करता है कि एक विश्वासी में दो स्वभाव होते हैं। जब तक आप के जीवन में परिवर्तन न आए, आप में पुराना स्वाभाव रहता है, और वही आप का नियंत्रण करता है। आप वही करते हैं जो आप करना चाहते हैं। जैसा एक गीत के बोल कहते हैं आप वही करते रहते हैं जो आप के स्वाभाव में होता है, और जो आप स्वाभाविक रूप से करते हैं, आवश्यक नहीं की वह अच्छा हो। परन्तु जब आप का नया जन्म हो जाता है, आप को एक नया स्वाभाव प्राप्त होता है। और जब आप को नया स्वाभाव प्राप्त हो जाता है, उसके बाद ही मुख्य समस्या आरंभ होती है। पौलुस रोमियों 7:19 में पुराने और नए स्वाभाव के बीच के द्वंद्व के बारे में लिखते हुए कहता है, “क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूँ, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता, वही किया करता हूँ।“ अर्थात नया स्वाभाव जिस काम को करना नहीं चाहता, पुराना स्वाभाव वही करना चाहता है, तथा पुराना स्वाभाव शरीर को नियंत्रित करता है। तब आप के जीवन में ऐसा समय आता है, जब आप को निर्णय लेना पड़ता है कि आप किस स्वाभाव के साथ जीवन जीना चाहते हैं। आप को परमेश्वर के सामने समर्पण करने के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। या तो आप परमेश्वर के पवित्र आत्मा को अपने जीवन का नियंत्रण करने देते हैं, या फिर आप अपने शरीर की इच्छा और अभिलाषा के अनुसार जीवन जीते हैं। परमेश्वर की सन्तान के लिए इसके अलावा कोई तीसरा विकल्प नहीं होता। दासी की स्त्री के पुत्र को बाहर निकाला जाएगा। यही बात हमें उत्पत्ति की पुस्तक में दिखाई गई है कि दासी हाजिरा के पुत्र को घर से बाहर निकाला जाएगा। तब आगे पद 11 में लिखा है।

उत्पत्ति 21:11 “यह बात अब्राहम को अपने पुत्र के कारण बहुत बुरी लगी।“

यदि शारीरिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जितना इसहाक अब्राहम का पुत्र था उतना ही इश्माएल भी था। इसहाक तो अभी-अभी पैदा हुआ था, जो उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता था। परन्तु इश्माएल तो काफी वर्षों से घर में रह रहा था। वह अब तो किशोरावस्था में आ चुका था। अब्राहम भी उससे लगाव रखता था। परन्तु अगर अब्राहम उसे घर से निकाल देता है तो यह बहुत दुःखद होने जा रहा था। मैं फिर से यह कहना चाहता हूँ कि, परमेश्वर उस कार्य को स्विकार नहीं करता है जो अब्राहम और सारा ने किया था, इस कारण परमेश्वर इश्माएल को भी स्विकार नहीं कर सकता था। यह पाप है। परमेश्वर इसकी अनुमति नहीं देता है, और न ही कभी देगा। अब्राहम के लिए यह दुःखद घटना थी, परन्तु इस बेइज्जती से उभरने के लिए उसे इश्माएल को बाहर भेजना ही होगा। बेचारी सारा उस बड़े लड़के का मजाक उड़ाना बर्दाश्त कर रही थी।

एक विश्वासी होने के नाते आप इन दोनों स्वाभाव के साथ ताल-मेल बना कर नहीं जी सकते। आप को एक निर्णय लेना ही होगा। याकूब 1:8 में याकूब कहता है, “वह व्यक्ति दुचित्ता है और अपनी सारी बातों में चंचल है।“ यह बात आज कई विश्वासियों में अस्थिरता और असुरक्षा की भावना को प्रगट करती है। वे संसार के साथ भी चलना चाहते हैं, और फिर वे प्रभु के साथ भी चलना चाहते हैं। वे आध्यात्मिक तौर पर दुचित्ते हैं, वे दो नावों में पांव रखने का प्रयास करते रहते हैं, पर आप ऐसा नहीं कर सकते। यूनानी लोग एक दौड़ कराते थे जिसमें वे दो घोड़ों को एक साथ बाँध् देते थे, और घुड़सवार एक पैर एक घोड़े पर और दूसरा पैर दूसरे घोड़े पर रखता था, और दौड़ शुरू हो जाती थी। यह दौड़ तब तक ही अच्छी चलती थी जब दोनों घोड़े एक साथ दौड़ते रहते थे। आप में और मुझ में दो स्वाीााव होते हैं, एक काला घोड़ा है और दूसरा सफेद घोड़ा है। अगर वे दोनों साथ चलते रहें तो बहुत अच्छा होगा, परन्तु ऐसा हो नहीं सकता। सफेद घोड़ा अलग दिशा में जाएगा और काला घोड़ा विपरीत दिशा में। जब ऐसा होगा तब हमें अपना मन में निर्णय करना होगा कि हम किस स्वाभाव के साथ जाना चाहते है। रोमियों 6:13 में लिखा है, “…… अपने आपको ………….परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगों को धार्मिकता के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।“ आगे बढ़ते हुए पौलुस रोमियों 8:3-4 में कहता है, जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल होकर न कर सकी, उसको परमेश्वर का पवित्र आत्मा पूरा कर सका। व्यवस्था मनुष्य के पुराने स्वाभाव को नियंत्रण करने का काम करते हुए असफल रही। परन्तु अब परमेश्वर का आत्मा, हमारे नए स्वाभाव को सामर्थ्य देकर वह काम पूरा कर सकता है जो व्यवस्था कभी न करा सकी।

हाजिरा के पुत्र इश्माएल का चरित्र अब दिखाई देने लगता है। यह वही स्वाभाव है जिसे हम भविष्य में एक राष्ट्र के रूप में प्रगट होते देख सकते हैं, एक ऐसा राष्ट्र जाक विद्रोही है और जिसका हाथ अपने भाई के विरूद्ध उठा हुआ है। सदियों से उसका यही चरित्र रहा है।

जैसा मैंनें पहले कहा था, इसहाक के जन्म में हम आने वाले प्रभु यीशु मसीह की झलक देख सकते हैं। परमेश्वर ने अचानक ही मानवजाति पर कुंवारी से पुत्र के जन्म को प्रगट नहीं किया। इससे पहले उसने बहुत सी घटनाओं के द्वारा हमें तैयार किया, जिसमें यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, शिमशोन और इसहाक का जन्म शालिम है। मैं इस समय इसहाक और प्रभु यीशु मसीह के जन्म के बीच उल्लेखनीय तुल्ना प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

(1) इसहाक और मसीह यीशु दोनों के जन्म की प्रतिज्ञा की गई थी। जब परमेश्वर ने अब्राहम को कसदियों के ऊर से पच्चीस साल पहले बुलाया था, तब परमेश्वर ने उससे कहा, “मैं तुझे और सारा को एक पुत्र दूँगा।“ अब पच्चीस वर्ष गुजर चुके हैं और परमेश्वर ने अपनी प्रतिज्ञा को पूरी किया। परमेश्वर ने इस्राएल राष्ट्र से भी कहा था, “देखो एक कुँवारी गर्भवति होगी और पुत्र जनेगी।“ जब समय पूरा हुआ तब प्रभु यीशु मसीह का जन्म बैतलहम में हुआ, जो उस प्रतिज्ञा की पुर्ती थी। आप ने देखा कि दोनों के जन्म की प्रतिज्ञा की गई थी।

(2) दोनों के जन्म की प्रतिज्ञा और उसके पूर्ण होने के बीच में एक लम्बा अंतराल है। वास्तव में परमेश्वर के प्रतिज्ञा करने और इसहाक का जन्म होने में कुल पच्चीस वर्ष लग गए, की प्रतिज्ञा के पूर्ण होने में। परन्तु मसीह यीशु के जन्म होने में आप को कई पीढ़ियों पीछे जाना पड़ेगा। उदाहरण के लिए – “दाऊद के वंश से एक उत्पन्न होगा“ परमेश्वर ने यह प्रतिज्ञा यीशु मसीह के जन्म के करीब हज़ार वर्ष पहले की थी। यह यहाँ पर एक बिल्कुल सटीक बैठता है।

(3) होने वाले बच्चे की घोषणा सारा और मरियम, दोनों को असंभव प्रतीत हुई थी। आप को याद होगा कि जब अब्राहम और सारा सदोम को जा रहे थे तब परमेश्वर का दूत उसे दर्शन देता है, और इसहाक के जन्म की घोषणा करता है। यह उन्हें पूर्णतः असंभव ज्ञात हुआ। सारा मन में हँस कर कहने लगी, “मैं तो बूढ़ी हूँ, …………. तो क्या मुझे यह सुख होगा?” तब कुँवारी के पुत्र जनने पर किसने पहले प्रश्न उठाया था? मरियम ने ही। जब स्वर्गदूत ने उससे कहा था, तब लूका 1:34 में मरियम कहती है, “यह कैसे होगा। मैं तो पुरुष को जानती ही नहीं।”

(4) इसहाक और प्रभु यीशु दोनों के नामों की भी घोषणा उनके जन्म से पहले की गई थी। अब्राहम और सारा से कहा गया था कि उनका एक पुत्र उत्पन्न होगा और उसका नाम इसहाक रखना। तथा यीशु मसीह के जन्म के साथ भी हम यही पाते हैं। मत्ती 1:21 में लिखा है, स्वर्गदूत ने यूसुफ से कहा, “तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा“।

(5) दोनों का जन्म परमेश्वर द्वारा नियुक्त समय में हुआ। इस अध्याय के पद 2 में लिखा है, “सारा अब्राहम से गर्भवती हुई; और उसके बुढ़ापे में उसी नियुक्त समय पर जो परमेश्वर ने उस से ठहराया था, एक पुत्र उत्पन्न हुआ।“ तथा प्रभु यीशु मसीह के जन्म के संदर्भ में हम पाते हैं कि गलातियों 4:4 में पौलुस कहता है, “परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के अधीन उत्पन्न हुआ।“

(6) दोनों का जन्म चमत्कारिक था। इसहाक का जन्म भी एक आश्चर्यकर्म था और प्रभु यीशु मसीह का जन्म भी, दोनों में किसी पुरूष की कोई भूमिका नहीं थी।

(7) वे दोनों पुत्र अपने पिता के लिए आनन्द का कारण थे। 21:3 में लिखा है, “अब्राहम ने अपने उस पुत्र का नाम जो सारा से उत्पन्न हुआ था इसहाक रखा।“ जिसका का अर्थ है हँसी। यही नाम उसने अपने पुत्र को दिया, क्योंकि इससे पहले जब परमेश्वर ने पुत्र देने की घोषणा की थी तो वह हँसा था, क्योंकि इसमें उसका मात्र एक आनन्द था। यीशु मसीह के बारे में हम देखते हैं, कि मत्ती 3:17 में पिता परमेश्वर ने आकाश में से कहा, “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस से मैं अति प्रसन्न हूँ“। दोनों ही पुत्र अपने पिता के आनन्द के कारण थे।

(8) दोनों ही पुत्र, अपनी मृत्यु तक अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी रहे। उत्पत्ति के 22 अध्याय में हम देखेंगे कि इसहाक अपने पिता के द्वारा बलिदान किया गया। उस समय वह कोई 8-9 साल को छोटा बालक नहीं था, इसहाक उस समय करीब 33 वर्ष का था, और वह मृत्यु तक अपने पिता का आज्ञाकारी बना रहा। जैसा यह इसहाक के लिए सत्य था वैसा ही प्रभु यीशु मसीह के लिए भी सत्य था। इसहाक के जन्म और मृत्यु में प्रभु यीशु मसीह के जन्म और मृत्यु का अद्भुत चित्रण प्रगट किया गया हैं।

(9) अंततः, इसहाक का चमत्कारिक जन्म यीशु मसीह के पुनरुत्थान को दर्शाता है। हमने पहले ही रोमियों 4:19 में पौलुस प्रेरित द्वारा कहे गए वचन को देखा है, “अपने मृतक समान शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई दशा………“। मृत्यु से जीवन आया, यही पुनरुत्थान है। इस पर ज़ोर देने के बाद वह रोमियों 4:25 में प्रभु यीशु मसीह के विषय में कहता हैं, “वह हमारे अपराधों के कारण पकड़वाया गया और हमारे धर्मी ठहराए जाने के लिए जिलाया भी गया“। हमें इसहाक में प्रभु यीशु मसीह की एक असाधारण तस्वीर मिलती है।

अब हम अध्याय 21 के पद 12 में आगे देखते हैं कि परमेश्वर कैसे अब्राहम, और हाजिरा तथा उसके पुत्र इश्माएल के साथ दया का व्यवहार प्रगट करता है।

उत्पत्ति 21:12 “परन्तु परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, “उस लड़के और अपनी दासी के कारण तुझे बुरा न लगे; जो बात सारा तुझ से कहे, उसे मान, क्योंकि जो तेरा वंश कहलाएगा वह इसहाक ही से चलेगा।“

परमेश्वर अब्राहम को याद दिलाता है कि वह प्रतिज्ञा किए हुए पुत्र के रूप में इश्माएल को ग्रहण नहीं करने वाला है। पद 13 में लिखा है।

उत्पत्ति 21:13 “दासी के पुत्र से भी मैं एक जाति उत्पन्न करूँगा, इसलिये कि वह तेरा वंश है।”

परमेश्वर ने कहा, “ “दासी के पुत्र से भी मैं एक जाति उत्पन्न करूँगा, इसलिये कि वह तेरा वंश है।” इसकारण इश्माएल से भी एक महान राष्ट्र उत्पन्न होने वाला था। तब आगे पद 14 से 21 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 21:14 “इसलिये अब्राहम ने सबेरे तड़के उठकर रोटी और पानी से भरी चमड़े की थैली भी हाजिरा को दी, और उसके कन्धे पर रखी, और उसके लड़के को भी उसे देकर उसको विदा किया। वह चली गई, और बेर्शेबा के जंगल में भटकने लगी।“
उत्पत्ति 21:15 “जब थैली का जल समाप्त हो गया, तब उसने लड़के को एक झाड़ी के नीचे छोड़ दिया।“
उत्पत्ति 21:16 “और आप उस से तीर भर के टप्पे पर दूर जाकर उसके सामने यह सोचकर बैठ गई, “मुझ को लड़के की मृत्यु देखनी न पड़े।” तब वह उसके सामने बैठी हुई चिल्ला चिल्ला के रोने लगी।“
उत्पत्ति 21:17 “परमेश्वर ने उस लड़के की सुनी; और उसके दूत ने स्वर्ग से हाजिरा को पुकार के कहा, “हे हाजिरा, तुझे क्या हुआ? मत डर; क्योंकि जहाँ तेरा लड़का है वहाँ से उसकी आवाज़ परमेश्वर को सुन पड़ी है।“
उत्पत्ति 21:18 “उठ, अपने लड़के को उठा और अपने हाथ से सम्भाल; क्योंकि मैं उसके द्वारा एक बड़ी जाति बनाऊँगा।”
उत्पत्ति 21:19 “तब परमेश्वर ने उसकी आँखें खोल दीं, और उसको एक कुआँ दिखाई पड़ा; तब उसने जाकर थैली को जल से भरकर लड़के को पिलाया।“
उत्पत्ति 21:20 “और परमेश्वर उस लड़के के साथ रहा; और जब वह बड़ा हुआ, तब जंगल में रहते रहते धनुर्धारी बन गया।“
उत्पत्ति 21:21 वह पारान नामक जंगल में रहा करता था; और उसकी माता ने उसके लिये मिस्र देश से एक स्त्री मँगवाई।“

धर्मशास्त्र इससे आगे इश्माएल की वंशावली का उल्लेख नहीं करता है, परन्तु उसके वंशज आज भी अरब देश की मरूभूमि में पाए जाते हैं। आगे पद 22 से 23 में लिखा है।

बीरशिबा में अब्राहम और अबीमेलेक के बीच सन्धि

उत्पत्ति 21:22 “उन दिनों में ऐसा हुआ कि अबीमेलेक अपने सेनापति पीकोल को संग लेकर अब्राहम से कहने लगा, “जो कुछ तू करता है उसमें परमेश्वर तेरे संग रहता है।“
उत्पत्ति 21:23 “इसलिये अब मुझ से यहाँ इस विषय में परमेश्वर की शपथ खा कि तू न तो मुझ से छल करेगा और न कभी मेरे वंश से करेगा, परन्तु जैसी करुणा मैं ने तुझ पर की है वैसी ही तू मुझ पर और इस देश पर भी, जिसमें तू रहता है, करेगा।”

दूसरे शब्दों में अबीमेलेक अब्राहम के साथ एक सन्धि या वाचा बांधना चाहता है और इस कारण वे अच्छे मित्र बन जाते हैं। जब आगे पद 31 से 33 में लिखा है।

उत्पत्ति 21:31 “उन दोनों ने जो उस स्थान में आपस में शपथ खाई, इसी कारण उसका नाम बेर्शेबा पड़ा।“
उत्पत्ति 21:32 “जब उन्होंने बेर्शेबा में परस्पर वाचा बाँधी, तब अबीमेलेक और उसका सेनापति पीकोल उठकर पलिश्तियों के देश में लौट गए।“
उत्पत्ति 21:33 “फिर अब्राहम ने बेर्शेबा में झाऊ का एक वृक्ष लगाया और वहाँ यहोवा से जो सनातन ईश्वर है प्रार्थना की।“

हम देखते हैं कि अब्राहम जहाँ कहीं भी गया उसने परमेश्वर का नाम लेना नहीं छोड़ा। तब अन्तिम पद 34 में लिखा है।

उत्पत्ति 21:34 “अब्राहम पलिश्तियों के देश में बहुत दिनों तक परदेशी होकर रहा।“

आगे चल कर हमें बताया गया है कि अब्राहम सदैव ही इस देश में जिसे परमेश्वर ने प्रतिज्ञा स्वरूप दिया था परदेशी और यात्री की तरह रहा, यह पद इस बात का सबूत है। मित्रों हम भी इस संसार में परदेशी और यात्री है और हमें भी अब्राहम के जीवन से सीखने की आवश्यकता है कि कैसे विश्वास में बने रहें और इस संसार में अपना जीवन व्यतीत करें। आइए धन्यवाद और प्रार्थना के साथ अध्ययन समाप्त करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

आज के पैसेज से आपने जो मुख्य बात सीखी, उसे लिखें।

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