उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 17:6 - 18:4
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 17:6 – 18:4
कार्यक्रम : #0035

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प्रिय मित्रों आप सभी को नमस्कार। आशा है आप परमेश्वर के वचन पर चलते हुए उसके अनुग्रह में बढ़ते जा रहे हैं। एक बार फिर से आप का स्वागत है। पिछले प्रसारण में हम अब्राम के साथ परमेश्वर की वाचा को देख रहे थे। आज हम उसी वाचा के कुछ प्रमुख बातों को गहराई से मनन करेंगे। तो आइए हम अपने अध्ययन में आगे बढ़तें हुए पढ़ें उत्पत्ति 17 अध्याय के पद 6 और 7 में लिखा है।

परमेश्वर की वाचा

उत्पत्ति 17:6 “मैं तुझे अत्यन्त फलवन्त करूँगा, और तुझ को जाति जाति का मूल बना दूँगा, और तेरे वंश में राजा उत्पन्न होंगे।“
उत्पत्ति 17:7 “और मैं तेरे साथ, और तेरे पश्चात् पीढ़ीदृपीढ़ी तक तेरे वंश के साथ भी इस आशय की युग-युग की वाचा बाँधता हूँ, कि मैं तेरा और तेरे पश्चात् तेरे वंश का भी परमेश्वर रहूँगा।“

परमेश्वर ने अब्राहम से किस प्रकार की वाचा बांधा था मित्रों? यह युग-युग की वाचा है। अगर यह युग-युग के लिए है तो, तो आज भी वो अच्छी है। यह निश्चित तौर पर भली है। अगर हम प्रभु यीशु पर विश्वास रखते हैं तो परमेश्वर ने आप को मुझे अनन्त जीवन देने की प्रतिज्ञा की है – उसी वाचा के कारण जो परमेश्वर ने बांधी थी। मित्रों, यदि परमेश्वर अब्राहम के साथ बाँधी गई इस वाचा को भली बनाने या पूरी करने नहीं जा रहा है तो आपको अपनी भलाई खुद देख लेना चाहिए। परन्तु आपके लिए मेरे पास एक सन्देश है। वह आपके साथ की गई वाचा को पूरा करने जा रहे हैं। और वह अब्राहम के साथ की गई वाचा को भी पूरा करने जा रहा है। तब आगे पद 8 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:8 “और मैं तुझ को, और तेरे पश्चात् तेरे वंश को भी, यह सारा कनान देश जिसमें तू परदेशी होकर रहता है, इस रीति दूँगा कि वह युग-युग उनकी निज भूमि रहेगी, और मैं उनका परमेश्वर रहूँगा।”

यहाँ परमेश्वर अब्राहम से कहता हैं कि वह क्या करने जा रहा हैं। परमेश्वर कहता हैं, “मैं तुझे अधिक फलवन्त करूँगा और तुझसे एक जाति उत्पन्न करूँगा… और तेरे और मेरे बीच में एक वाचा स्थापित करूँगा और तेरी सन्तानों के साथ भी… और मैं तुझे और तेरे बाद, तेरे वंश को यह कनान देश युग-युग के लिए दे दूँगा।“
परमेश्वर ने इन लोगों के साथ युग-युग की वाचा बांधा है। इसलिए कि यह ऐसी है, वह आसानी से तोड़ी नहीं जा सकती, और न ही वह ऐसी है जो आसानी से समाप्त हो जाए। परमेश्वर ने उन्हें कोई 99 वर्ष की लीज़ पर वह भूमि नहीं दिया था जो आसानी से समाप्त हो जाए। परमेश्वर ने उन्हें अनन्त काल के लिए अधिकार दिया है।

इब्रानी या यहूदी लोग उस भूमि पर जीन बार काबिज़ हो पाए हैं, और वह उनकी ही है, परन्तु महत्वपूर्ण बात यह है कि वे उस भमि को कुछ निश्चित शर्तों के अन्तर्गत ही प्राप्त कर सकते हैं। सबसे पहले परमेश्वर ने उन्हें मिस्र देश में भेजा और वहाँ वे सताए गए। वे लगभग 70 लोग मिस्र में एक परिवार के रूप में गए थे, लेकिन वे एक राष्ट्र बनकर वहाँ से निकले, जिनकी संख्या 10 से 15 लाख की थी। उसके बाद वे फिर प्रतिमा आराधना और परमेश्वर की गवाही न देने के कारण बेबीलोन की गुलामी में भेजे गए। इसके बात हम देखते हैं कि मसीह का तिरस्कार करने के कारण वे तीसरी बार सन् 70 ई. में पुनः बँधुआई मंे भेजे गए। तब से वे अब तक लौटकर वापस नहीं आए हैं। परमेश्वर ने पहले ही घोषणा कर दिया था कि वे तीन बार देश से बाहर बँधुआई में जाएँगे, और तीन बार फिर से अपने देश में लौटेंगे। वे दो बार लौटकर वापस आ चुके हैं। (वर्तमान में उनकी देश वापसी को मैं प्रतिज्ञा की पूर्णता नहीं मानता)। जब वे अगली बार लौटेंगे, तो मैं उसे इस रीति से लेता हूँ कि वे फिर कभी अपने देश से निशकासित नहीं किए जाएँगे। जब परमेश्वर उन्हें एकत्र कर अपने देश में वापस लाएगा, उस समय प्रभु यीशु का हज़ार वर्ष का राज्य होगा। तब आगे पद 9 से 11 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:9 “फिर परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, “तू भी मेरे साथ बाँधी हुई वाचा का पालन करना; तू और तेरे पश्चात् तेरा वंश भी अपनी-अपनी पीढ़ी में उसका पालन करे।“
उत्पत्ति 17:10 “मेरे साथ बाँधी हुई वाचा, जिसका पालन तुझे और तेरे पश्चात् तेरे वंश को करना पड़ेगा, वह यह है: तुम में से एक एक पुरुष का खतना हो।“
उत्पत्ति 17:11 “तुम अपनी अपनी खलड़ी का खतना करा लेना: जो वाचा मेरे और तुम्हारे बीच में है, उसका यही चिह्न होगा।“

खतना वाचा का चिन्ह है। इस्राएलियों ने वाचा का सदस्य बनने के लिए स्वयं अपना खतना नहीं करवाया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके पास परमेश्वा द्वारा दी गई प्रतिज्ञा थी। खतना वही स्थान रखता है, जो आज एक विश्वासी के जीवन में भले काम रखते हैं। आप उद्धार पाने या बचाए जाने के लिए भले कार्य नहीं करते हैं परन्तु भले काम इसलिए करते हैं क्योंकि आप उद्धार प्राप्त कर चुके हैं या बचाए जा चुके हैं।

मैं स्मरण करता हूँ कि अपनी जवानी के दिनों, मेरी क्लास के बहुत से मित्रों की संगती में मैं रहा, उन में से कुछ भले, कुछ बुरे और कुछ बहुत ही बुरे थे। पर एक बात थी जिसने मुझे उस बुरी संगती से बचाए रखा, वह था अपने पिता के नाम को बदनाम न करने का भय। अपने पिता के कारण मैं उन बुरी बातों से दूर रहा। अब ध्यान दीजिए कि मैं उन बुरी बातों से दूर रहने के कारण अपने पिता का पुत्र नहीं ठहरा। मैं तो पहले से ही अपने पिता का पु़त्र था ही, परन्तु च्यूँकि मैं अपने पिता का पुत्र था मैं उन कामों से दूर रहा। वाचा का चिन्ह खतना है। खतना वह नहीं है जिस कारण वे वाचा के अधीन आते हैं, पर खतना उस वाचा का चिन्ह है जो उन्हें दी गई है। तब पद 12 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:12 “पीढ़ी पीढ़ी में केवल तेरे वंश ही के लोग नहीं पर जो तेरे घर में उत्पन्न हुआ हो, अथवा परदेशियों से रूपा देकर मोल लिया जाए; ऐसे सब पुरुष भी जब आठ दिन के हो जाएँ, तब उनका खतना किया जाए।“

क्या आपने इस बात पर ध्यान दिया, कि प्रभु यीशु मसीह के जन्म का अभीलेख कितना सावधनीपूर्वक प्रगट किसा या है? उस नन्हे बालक के जन्म से संबंधित सभी व्यवस्था पूरी की गई है। उसके बारे में यह लिखा गया है कि वह अब्राहम की सन्तान और दाऊद की सन्तान है। वह दाऊद के वंश में से था तथा जन्म के बाद आठवें दिन उसका खतना किया गया। गलातियों की पत्री 4:4 में पौलुस प्रेरित कहता हैं, “वह व्यवस्था के अधीन उत्पन्न हुआ।“ तब आगे पद 13 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:13 “जो तेरे घर में उत्पन्न हो, अथवा तेरे रूपे से मोल लिया जाए, उसका खतना अवश्य ही किया जाए; इस प्रकार मेरी वाचा जिसका चिह्न तुम्हारी देह में होगा वह युग-युग रहेगी।“

यहाँ पर हम दोबारा, खतने को एक चिन्ह के रूप में देखते हैं, जो वाचा का चिन्ह था। उन्हें वाचा प्राप्त करने के लिए खतना की आवश्यकता नहीं थी। मैं विश्वास करता हूँ कि आप इसके महत्व को देख पा रहे हैं। और आज भी यही सत्य है। आज बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि यदि वे कलीसिया के सदस्य बन जाएं या फिर बपतिस्मा ले लें, तो वे उद्धार पा लेंगे। मेरा विचार है कि यदि आप उपर प्राप्त व्यक्ति हैं तो आप दोनो काम करेंगे, कलीसिया की सदस्यता भी लेंगे और बपतिस्मा भी लेंगे। परन्तु आप बचाए जाने या उद्धार प्राप्त करने के लिए ऐसा नहीं करेंगे, यही तरीका है। हमें चीजों को सही क्रम में रखना है। गाड़ी के पीछे बैल नहीं पर गाड़ी के आगे हमें बैल को बांधना है तब ही गाड़ी आगे बढ़ेगी। कुछ लोगों के विचार में उद्धार के लिए वे गाड़ी आगे रखे हुए है और उसे उद्धार मान कर चा रहे हैं। बपतिस्मा उद्धारा का चिन्ह है पर बपतिस्मा से उद्धार प्राप्त नहीं होता। तक आगे पद 14 में लिखा है।
(बैल गाड़ी का चित्र)

उत्पत्ति 17:14 “जो पुरुष खतनारहित रहे, अर्थात् जिसकी खलड़ी का खतना न हो, वह प्राणी अपने लोगों में से नष्ट किया जाए, क्योंकि उसने मेरे साथ बाँधी हुई वाचा को तोड़ दिया।”

यहाँ पर सही बात तो यह है कि कुछ लोग थे जिन्होंने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। (जब वे मिस्र देश से निकलकर आए तब व्यावहारिक तौर पर पूरी जाति ही अनाज्ञाकारी बनी रही)। इस अनाज्ञाकारिता का मतलब था कि प्रत्येक को व्यक्तिगत रीति से इस वाचा से बाहर कर दिया जाए। जो भी हो, जहाँ तक, इस राष्ट्र या जाति का सवाल है कि कोई व्यक्ति या समूह इस वाचा को जिसे परमेश्वर ने अब्राहम के साथ और उसकी सन्तानों के साथ बान्धा है, वह अनन्त है और उसे कोई नहीं तोड़ सकता। यह एक अनन्तकालीन वाचा है। जिस व्यक्ति ने इस वाचा को तोडा, उसे बाहर निकाल दिया गया, परन्तु वाचा स्थिर बनी रही। यह कितनी अद्भुत बात है। तब पद 15 में जिखा है।

उत्पत्ति 17:15 “फिर परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, “तेरी जो पत्नी सारै है, उसको तू अब सारै न कहना, उसका नाम सारा होगा।“
परमेश्वर सारै के नाम को बदल कर सारा कर दिया। आगे पद 16 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:16 “मैं उसको आशीष दूँगा, और तुझ को उसके द्वारा एक पुत्र दूँगा; और मैं उसको ऐसी आशीष दूँगा कि वह जाति जाति की मूलमाता हो जाएगी; और उसके वंश में राज्य-राज्य के राजा उत्पन्न होंगे।”
अगर यह बुजुर्ग अब्राहम जातियों का मूल पिता होने जा रहा है तो सारा भी जातियों कि मूलमाता हो जाएगी।
उत्पत्ति 17:17 “तब अब्राहम मुँह के बल गिर पड़ा और हँसा, और मन ही मन कहने लगा, “क्या सौ वर्ष के पुरुष के भी सन्तान होगी और क्या सारा जो नब्बे वर्ष की है पुत्र जनेगी?”

वृद्ध अब्राहम इसे सुनकर हँसा। पर यह हँसी अविश्वास की नहीं थी। मैं सोचता हूँ कि यह हँसी, एक आनन्द को प्रगट करने की थी, कि इस उम्र में भी मैं पिता बन सकता हूँ। मुझे भरोसा है कि आपमें से कई लोगों के ऐसे कुछ अनुभव अवश्य रहे होंगे। मित्रों, प्रतिदिन परमेश्वर हमारे जीवन में कुछ ऐसी बातें करता हैं, जिसे देखकर कभी-कभी हमें हँसी आ साकती है। यद्यपि हम उसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं, कि क्या है कैसे करना है, परन्तु हम उसके बारे में सोचकर हँसते हैं। यह कुछ ऐसा है, जिसे आपने, पहले नहीं सुना है। यहाँ पर हम देखते हैं, “कि सारा की कोख लगभग मर चुकी है। और अब्राहम भी जैसे मरी हुई दशा में है।“ क्या आपने कभी ध्यान दिया है, कि पौलुस प्रेरित इसका वर्णन कैसे करते हैं? रोमियों 4:17-22 “जैसा लिखा है, “मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है”: उस परमेश्वर के सामने जिस पर उसने विश्वास किया, और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं उनका नाम ऐसा लेता है कि मानो वे हैं। उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि “तेरा वंश ऐसा होगा,” वह बहुत सी जातियों का पिता हो। वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ, और न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की; और निश्चय जाना कि जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरा करने में भी समर्थ है। इस कारण यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।“ अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया और परमेश्वर द्वारा किये गए आश्चर्यकर्म और भलाई के द्वारा उत्साह से भर गया।
लेकिन अचानक उसके मन मंे तीर की तरह एक विचार आता है, वह उस छोटे लड़के के बारे में सोचता है, जो उसी का है, और जिसका नाम इश्माएल है। तब पद 18 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:18 “और अब्राहम ने परमेश्वर से कहा, “इश्माएल तेरी दृष्टि में बना रहे! यही बहुत है।”

अब्राहम कह रहा था, “हे प्रभु यह छोटा लड़का जो मेरे घर मंे बड़ा हो रहा है…“ प्रगट है, अब्राहम, इश्माएल से प्रेम करता है। कुछ समय बाद जब अब्राहम ने उसे घर से निकाल दिया, उस समय इश्माएल चौदह वर्ष का था। मैं नहीं सोचता कि इसके बाद, अब्राहम कभी उसे देख पाया होगा। मैं नहीं जानता आप इश्माएल के बारे मंे क्या सोचते हैं लेकिन वह अब्राहम का पुत्र था और अब्राहम अपने पुत्र से प्रेम करता था। अपने बेटे को घर से निकालना, अब्राहम के लिए एक बहुत ही कठिन कार्य था।

मैं सोचता हूँ कि अब्राहम इस बारे में बहुत बार सोचा होगा, “कि उसने हाजिरा को अपना कर बहुत बड़ी गलती कर दिया है।“ आप देख सकते हैं कि अब्राहम का पाप एक ऐसा पाप था जिसने न केवल उस पर विपत्ति लाया परन्तु आरंभ से ही उस पूरी भूमि पर भी। आप यह न कहें कि पाप कोई छोटी बात है या फिर आप उसके साथ रह सकते हैं। गलातियों 6:7 में लिखा है, “धोखा न चााओ, परमेश्वर ठट्ठों नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा।“ मनुष्य जो बोता है उसके समान नहीं काटता है परन्तु जो बोता है वही काटता है। अब्राहम वही काट रहा था जो कुछ उसने बोया था। कहता है, “इश्माएल तेरी दृष्टि में बना रहे! यही बहुत है।” आगे पद 19 में कहता है।

उत्पत्ति 17:19 “तब परमेश्वर ने कहा, “निश्चय तेरी पत्नी सारा के तुझ से एक पुत्र उत्पन्न होगा; और तू उसका नाम इसहाक रखना; और मैं उसके साथ ऐसी वाचा बाँधूँगा जो उसके पश्चात् उसके वंश के लिये युग-युग की वाचा होगी।“

दूसरे शब्दों में परमेश्वर कह रहा है कि मैं, इश्माएल को ग्रहण नहीं करूंगा। परमेश्वर कभी बहुविवाह को अनुमति नहीं देता है। इसलिए कि इसका उल्लेख बाइबल में है आप यह मान कर न ख्लें कि परमेश्वर इसकी अनुश्ंसा करता है या अनुमति देता है। यह पाप है। ऐसा कुछ लिखा नहीं है। तब 20 और 21 में लिखा है।

इश्माएल की विरासत

उत्पत्ति 17:20 “इश्माएल के विषय में भी मैं ने तेरी सुनी है; मैं उसको भी आशीष दूँगा, और उसे फलवन्त करूँगा और अत्यन्त ही बढ़ा दूँगा; उस से बारह प्रधान उत्पन्न होंगे, और मैं उस से एक बड़ी जाति बनाऊँगा।“
उत्पत्ति 17:21 “परन्तु मैं अपनी वाचा इसहाक ही के साथ बाँधूँगा जो सारा से अगले वर्ष के इसी नियुक्त समय में उत्पन्न होगा।”

परमेश्वर अपनी की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करता हैं। आप परमेश्वर को न तो इस काम से राोक सकते हैं न ही टाल सकते हैं। परमेश्वर वही करता है जो उसने कहा है। परमेश्वर ऐसी बातें कर रहा हैं, जैसे इसहाक का जन्म हो चुका है और वह उनके मध्य में है। परमेश्वर जो नहीं है उन चीजों के बारे में ऐसे बातें करता है मानो हैं। और कहता है अगले वर्ष होने वाला है। पद आगे पद 22 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:22 “तब परमेश्वर ने अब्राहम से बातें करनी बन्द की और उसके पास से ऊपर चढ़ गया।“

दूसरे शब्दों में अब्राहम अब तुझे बिल्कुल शान्त रहना है। मित्रों, कुछ चीज़ें हैं, जिसके लिए मुझे और आपको परमेश्वर से मांगना अब बन्द कर देना चाहिए। ऐसे समय होते हैं जब आपने बहुत मांग लिया है और अब आप को अपना मुँह बंद कर देना चाहिए। कई बार लोग परमेश्वर को प्रार्थना करके भी कष्ट पहुँचाते हैं, जबकि उन्हें उनकी प्रार्थना का उत्तर मालूम होता है कि वह न में है। परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, बस अब यही एक है। और बहुत हो चुका, अब दोबारा इसे याद दिलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैंने इसे स्वीकार नहीं किया है और इसके हाँ कहने का मेरा कोई इरादा नहीं है। इसलिए अब परमेश्वर, अब्राहम की दूसरी प्रार्थनाओं का उत्तर देने जा रहा था। हम आगे देखते हैं, कि परमेश्वर अब्राहम की प्रार्थना सुनते हैं, पर यह वाचा केवल इसहाक के साथ ही कायम रहेगी न की इश्माएल के साथ। यह निश्चित हो चुका है इसलिए अब लगता है कि अब्राहम परमेश्वर के मन को बदलने का प्रयास नहीं करेगा। मित्रों, आज बहुत से लोग हैं जो परमेश्वर से उन चीज़ों के लिए प्रार्थना करते हैं, जिसे सुनने के लिए परमेश्वर तैयार नहीं है या उत्तर देने का इरादा नहीं है। कुछ निश्चित विषय पर लोगों के लिए प्रार्थना करने बारे में मैं बहुत सावधान रहने की कोशिश करता हूँ। दतब आगे पद 23 से 27 में लिखा है।

उत्पत्ति 17:23 “तब अब्राहम ने अपने पुत्र इश्माएल को लिया; और उसके घर में जितने उत्पन्न हुए थे, और जितने उसके रुपये से मोल लिये गए थे, अर्थात् उसके घर में जितने पुरुष थे उन सभों को ले के उसी दिन परमेश्वर के वचन के अनुसार उनकी खलड़ी का खतना किया।“
उत्पत्ति 17:24 “जब अब्राहम की खलड़ी का खतना हुआ तब वह निन्यानवे वर्ष का था।“
उत्पत्ति 17:25 “और जब उसके पुत्र इश्माएल की खलड़ी का खतना हुआ तब वह तेरह वर्ष का था।
उत्पत्ति 17:26 “अब्राहम और उसके पुत्र इश्माएल दोनों का खतना एक ही दिन हुआ।“
उत्पत्ति 17:27 और उसके घर में जितने पुरुष थे, जो घर में उत्पन्न हुए तथा जो परदेशियों के हाथ से मोल लिये गए थे, सब का खतना उसके साथ ही हुआ।“

खतना वाचा का चिन्ह है जिसे परमेश्वर ने आब्राहम के साथ बांधा था। कोई कह सकता है, “इश्माएल को इसमें क्यों शामिल किया गया?“ क्या परमेश्वर ने यह प्रतिज्ञा नहीं किया था कि इश्माएल भी एक महान राष्ट्र बनेगा? यहाँ पर इश्माएल के द्वारा भी एक बड़ा राष्ट्र बनने जा रहा था इसलिए वह इसमें शामिल किया गया है, लेकिन यह वह नहीं है जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने अब्राहम से आरंभ में की थी। ये उस राष्ट्र का पिता नहीं हो सकता था, जिसे परमेश्वर बनाना चाहते हैं, और जिसमें से मसीह का आना निश्चित था।
इसके साथ ही 18वां अध्याय समाप्त होता हैं और हम 19वें अध्याय से अपना मनन जारी रखेंगे, जिसका विषय है।

अध्याय 18

विषय: परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को दोहराता है, तथा परमेश्वर सदोम और अमोरा के आने वाले विनाश की घोषणा करता है।

मित्रों आप जब तक नए नियम में नहीं पहुँच जाते, आप समझ नहीं पाएंगे कि उत्पत्ति का 18 और 19 अध्याय बाइबल में क्यों जोड़ा गया है। वे अब्राहम की कहानी से अलग प्रतीती होते है। उसमें हमें सदोम और अमोरा का विनाश देखने को मिलता है।

अध्याय 18 एक लम्बा अध्याय है जिसमें परमेश्वर अब्राहम को सदोम और अमोरा के दण्ड के बारे में बताता है तथा अब्राहम उन्हें नाश न करने के विषय मध्यस्थता करता है। मेरे विचार में यह एक अशीषित मसीही जीवन का चित्रण है। परन्तु अध्याय 19 में सदोम और अमोरा के साथ में लूत भी है, जिसे मैं उसके द्वारा लिए गए निर्णय के कारण अभिषापित जीवन कहना चाहुँगा।

दुर्भाग्य से आज दोंनों प्रकार के मसीही पाए जाते हैं, आशीषित और अभिषापित दोनों। ऐसे बहुत से हैं जिन्होंने अपने जीवन की नईयाँ डुबो दिया है, वे परमेश्वर की इच्छा से पूर्णतः बाहर जा चुके हैं। मैं एक पल के लिए भी यही नहीं कहूँगा कि उन्होंने अपना उद्धार खो दिया है, परन्तु निश्चित तौर पर उन्होंने बाकी सब कुछ खो दिया है। जैसा पौलुस 1 कुरिन्थियों 3ः15 में कहता है, “… पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते-जलते।“

परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा को पुनः दोहराता है।
आगे अध्याय 18 के पद 1 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 18:1 “अब्राहम मम्रे के बांज वृक्षों के बीच कड़ी धूप के समय तम्बू के द्वार पर बैठा हुआ था, तब यहोवा ने उसे दर्शन दिया:”
अब्राहम अपने बुढ़ापे की अवस्था में, मम्रे में रह रहा था, जहाँ परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया। आगे पद 2 में लिखा है।
उत्पत्ति 18:2 “और उस ने आँख उठाकर दृष्टि की तो क्या देखा, कि तीन पुरूष उसके सामने खड़े हैं: जब उस ने उन्हें देखा तब वह उन से भेंट करने के लिये तम्बू के द्वार से दौड़ा, और भूमि पर गिरकर दंडवत् की और कहने लगा।”

मित्रों, यहाँ पर ध्यान दीजिए कि अब्राहम किस प्रकार की अतिथि सेवा कर रहा था। यहाँ पर मुख्य विषय यह है, अब्राहम, बहुत ही दयालु और अतिथि सत्कार करनेवाला व्यक्ति है। हम आगे पद 3 और 4 में पढ़ते है,

उत्पत्ति 18:3 “हे प्रभु, यदि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है तो मैं विनती करता हूँ, कि अपने दास के पास से चले न जाना।“
उत्पत्ति 18:4 “मैं थोड़ा सा जल लाता हूँ और आप अपने पाँव धोकर इस वृक्ष के तले विश्राम करें।”

मित्रों, यह हम सभों को विचित्र सा लगता है कि एक राहगीर को जिसे आप नहीं जानते हैं, अब्राहम कहता हैं, आइए पैर धोकर आराम कीजिए। मैं समझता हूँ कि आज के दिनों में हममें से कोई भी ऐसा नहीं करेगा। परन्तु यह उस समय की परंपरा रही होगी। आप उस घटना को याद कीजिए जब प्रभु यीशु मसीह उपरौठी कोठरी में थे और उन्होंने अपने शिष्यों के पैर धोए। यहाँ पर हमारे लिए एक अद्भुत आत्मिक सन्देश है। अब्राहम कहता हैं, “आप लोग अपने पाँव धो लें।“ यह अतिथि सत्कार का एक वास्तविक तरीका था, जब कोई अतिथि घर में आता था तो उसके जूता खोलकर पाँव धोते थे। मैं नहीं जानता कि कौन सा सही है। परन्तु मैं व्यक्तिगत रीति से जूता उतारना पसन्द करता हूँ। मैं समझता हूँ कि उन दिनों में यह एक बड़ी प्रथा या परंपरा थी। वास्तव में जब आप किसी के घर में जाते हैं और आपके जूते उतार कर आप के पाँव धोए जाते हैं, तो आपको अपनापन लगता है। मित्रों, यहाँ पर अब्राहम वास्तव में अपने अतिथियों का स्वागत राजसी तरीके से कर रहा था, किसी प्रकार की घटी व कमी होने नहीं दे रहा है।
आइए मित्रों हम अपने परमेश्वर को धन्यवाद दे कि वह अपनी वाचा के प्रति पक्का है और अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करता है। आइए हम प्रार्थना के साथ अध्ययन समाप्त करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

आज के पैसेज से आपने जो मुख्य बात सीखी, उसे लिखें।

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