उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 15:1 – 15:21
कार्यक्रम : #0033
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अध्याय 15
प्रिय मित्रों आप सभी को जय मसीह की। आज के अध्ययन में आप का स्वागत है। हम अध्याय 14 में देख रहे थे कि मलिकिसिदक अब्राम को आशीष देता है। और हमने देखा था कि प्रभु यीशु मसीह किस प्रकार मलिकिसिदक की रीति पर सदा का याजक है। अब हम आते हैं 15वें अध्याय में। इस का विषय है।
विषय: परमेश्वर स्वयं को अब्राम की ढाल और प्रतिफल के रूप में प्रकट करता हैं, अब्राम का विश्वास तथा अब्राम के साथ परमेश्वर की वाचा
परमेश्वर स्वयं को अब्राम की ढाल और प्रतिफल के रूप में प्रकट करता हैं
मित्रों, हम इस अध्याय 15 में बाइबल के एक महान विषय को पाते हैं। उत्पत्ति 15वें अध्याय के पद 1 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:1 “इन बातों के पश्चात् यहोवा का यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुँचा: “हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल मैं हूँ।”
अब हम देखते हैं कि परमेश्वर अब्राम के सामने चौथी बार प्रगट होता है। परमेश्वर इस व्यक्ति को उन्नत करते हुए आगे लिए चल रहा था। परमेश्वर इस बार अब्राम के इसलिए उपस्थित होता है क्योंकि उसने विश्वास का एक बड़ा कदम उठाते हुए, अपने भतीजे लूत को उन पूर्व के राजाओं से छुड़ाया था तथा सदोम के राजा ने जो लूट का माल उसे देना चाहा था उसे अपने विश्वास के कारण लेने से इन्कार कर दिया था।
परमेश्वर अब्राम से कहता है, “हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल मैं हूँ।” मेरे मित्रों यह कथन महान और अद्भुत है। यद्यपि हमें अभिलेखों में इस बात का उल्लेख नहीं मिलता है, पर मैं आप से कहना चाहता हूँ कि ऐसा प्रतीत होता है कि, अब्राम उस युद्ध के दौरान बड़े खतरे में पड़ गया था और सोच रहा था कि वह जीवित वापस आएगा या नहीं। उस समय परमेश्वर उसे स्मरण दिलाता है कि याद रख, “हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल मैं हूँ, मैं तेरी ढाल हूँ।”
साथ ही कहता है, “हे अब्राम, मत डर; तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल मैं हूँ।” दूसरे शब्दों में परमेश्वर कहता है, तूने लेट का माल त्याग कर अच्छा काम किया है। अब मैं तेरा प्रतिफल हूँ, मैं तुझे प्रतिफल दूँगा। आप देख सकते हैं मित्रों कि यदि एक मनुष्य परमेश्वर पर विश्वास और भरोसा कर के उसकी ओर तकता रहता है, तो परमेश्वर उसके जीवन में क्या नहीं कर सकता!
यदि आपको लगता है कि अब्राम उन नेक और भले मनुष्यों में से एक है हर सुबह जिनके सिर के ऊपर का आभा मुडल चमकाता है, या वह बहुत अच्छा व्यक्ति था, तो आप गलत हैं। अब्राम बहुत व्यवहारिक व्यक्ति था, और अब वह सीधे मुद्दे की बात पर आता है। मुझे लगता है कि परमेश्वर को हमारा ऐसा व्यवहार पसंद आता है। एक स्पष्टवादी व्यक्ति। काश हम अपनी झूठी पवित्रता और पाखंडी व्यवहार से छुटकारा पा लें, जिसे आज अनेक कट्टरपंथी अपनाते हैं। ध्यान दीजिए कि अब्राम आगे क्या कहता है – यह बहुत अद्भुत है। आगे पद 2 और 3 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:2 “अब्राम ने कहा, “हे प्रभु यहोवा, मैं तो निर्वंश हूँ, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्कवासी एलीएजेर होगा, अतः तू मुझे क्या देगा?”
उत्पत्ति 15:3 “और अब्राम ने कहा, “मुझे तो तू ने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूँ कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा।”
अब्राम परमेश्वर से क्या कहना चाहता था: “हे प्रभु मुझे और धन-सम्पत्ति नहीं चाहिए। मुझे कुछ और नहीं चाहिए। मेरे मन और हृदय को जो बात परेशान कर रही है कि मैं बिना सन्तान के हूँ और मुझे एक पुत्र चाहिए। तूने मुझे जातियों का पिता बनाने का वादा किया है, तू ने पतिज्ञा किया है कि मेरी सन्ताने समुद्र की रेत के समान अनगिनत होंगी। परन्तु मेरी तो एक भी अपनी सन्तान नहीं है।“ उस समय की हम्मुराबी कानून व्यवस्था के अनुसार, एलीएजेर, उसका सेवक और सारे कर्मचारियों का प्रबन्धक था, उसकी सन्तानें ही अब्राम के उत्तराधिकारी होंगे, यदि उसे कोई सन्तान न हुई तो। तब पद 4 में परमेश्वर उससे कहता है।
उत्पत्ति 15:4 “तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुँचा, “यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।”
मित्रों जब मनुष्य परमश्वर के सामने व्यपहारिक होता है तब परमेश्वर भी उनके साथ व्यवहारिक बन जाता है। परमेश्वर कहता है, “अब्राम मैं तुझे एक पुत्र दूँगा, वही तेरा वारिस होगा।”
अब परमेश्वर अब्राम का हाथ पकड़ कर उसे रात को बाहर लाता है, और पद 5 में कहता है।
उत्पत्ति 15:5 “और उसने उसको बाहर ले जा के कहा, “आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है?” फिर उसने उससे कहा, “तेरा वंश ऐसा ही होगा।”
मित्रों यह बहुत कमाल की बात है। पहले परमेश्वर ने उससे कहा कि उसकी संतान समुद्र के तट की रेत की तरह अनगिनत होगी, और अब वह कहता हैं कि वे आसमान के तारों की तरह अनगिनत होंगे। अब्राम तारों को गिन नहीं सकता था। वह लगभग चार हज़ार तारे देख सकता था, लेकिन जिस इलाके में वह देख रहा था, वहाँ शायद पचास हज़ार से भी अधिक तारे रहे होंगे। अब्राम अपनी संतान को गिन नहीं सकता था, और आप भी आज उसकी सन्तानों को गिन नहीं सकते।
इस मनुष्य अब्राहम की वास्तव में दो सन्तानें है। एक शारीरिक रूप से इस्राएल का राष्ट्र और दूसरा है आत्मिक रूप से कलीसिया, या सारे विश्वासी। परन्तु कलीसिया अब्राहम की सन्तान कैसे ठहरती है? विश्वास के द्वारा। जो प्रभु यीशु पर विश्वास करता है। पौलुस गलातियों 3:29 में गलातियों की कलीसिया को कहता है कि वे प्रभु यीशु में विश्वास करने के द्वारा अब्राहम की सन्तान ठहरे हैं।
कई साल पहले, एक बार डॉ मैक्गी, जो कि एक गैर यहूदी इसाई हैं, अपने कुछ यहूदी मित्रों से मूसा की महिमामय व्यवस्था के बारे में वार्तालाप कर रहे थे और बता रहे थे कि कैसे यह व्यवस्था प्रभु यीशु मसीह में पूरी होती है। वे आगे उनसे कहते हैं कि उन्हें बहुत खुशी है वे सभी अब्राहम की सन्तान हैं। उन्होंने उनसे यह कहते हुए बात आरंभ की कि उन्हें उनसे बात करके खुशी हो रही है क्योंकि वे जानते हैं कि वे अब्राहम की सन्तान हैं। लेकिन जब उन्होंने उनसे यह कहा कि वे स्वयं भी अब्राहम की सन्तान हैं तो वे हैरानी से एक-दूसरे को देखने लगे। और फिर उन्होंने उन्हें बताया कि वे कैसे अब्राहम की सन्तान हैं। परमेश्वर की वाचा में अब्राहम के ये दो वंश शामिल हैं, और यह एक बहुत ही अद्भुत सच्चाई है।
अब्राहम का विश्वास
उत्पत्ति 15:6 “उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।“
मित्रों, पवित्रशास्त्र बाइबल में यह एक महान वक्तव्य है, “तब उसने यहोवा पर विश्वास किया।“ इसका मतलब यह हुआ, कि अब्राम ने परमेश्वर से कहा, “आमीन“ अर्थात् ऐसा ही हो। तब परमेश्वर ने कहा, “मैं तेरे लिए ऐसा करूँगा।“ और तब अब्राम परमेश्वर से कहता है, “मैं आप पर विश्वास करता हूँ। आमीन। मैं इस बात पर विश्वास करता हूँ।“ और यह अब्राम के लिए धार्मिकता गिना गया।
पौलुस प्रेरित रोमियों की पत्री 4:1-5 पद में कहता हैं, “इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्त हुआ? क्योंकि यदि अब्राहम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमण्ड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्वर के निकट नहीं। पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।” काम करनेवाले की मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्क समझा जाता है। परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।“ “इसलिये हम क्या कहें हमारे शारीरिक पिता अब्राहम को क्या प्राप्त हुआ?“ – तो अब्राहम ने शरीर के द्वारा से क्या पाया है। मुझे लगता है कि शब्दों को बदलने से अर्थ बेहतर समझ में आता है।
“पवित्रशास्त्र क्या कहता है? यह कि “अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया।” उसका विश्वास करना धार्मिता गिना गया। वह वैसा नहीं था, परन्तु परमेश्वर ने उसे वैसा ही माना।
“परन्तु वह जो काम नहीं करता, वरन् भक्तिहीन को धर्मी ठहराने वाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।“ अगर आप अपने उद्धार के लिए कुछ कर सकते तो, तब परमेश्वर आप को उद्धार देने के लिए बाघ्य होता। परन्तु मेरे मित्रों, परमेश्वर अपने अनुग्रह के अलावा किसी अन्य बात से उद्धार नहीं देता। उसके पास उद्धार देने का इसके सिवाए कोई माध्यम नहीं है। और यदि आप उद्धार प्राप्त मनुष्य है, तो उसका केवल एक तरीका है कि आप ने परमेश्वर पर विश्वास किया, प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धरकर्ता स्विकार किया तथा आप ने सह भी विश्वास किया कि परमेश्वर ने आप के लिए उद्धार उपलब्ध कराया है।
परन्तु जो काम नहीं (अर्थात, कोई भी कार्य ऐसा नहीं कर सकता) करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, (किन लोगों के लिए? सारे भक्तिहीनो के लिए) उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।“ उसके विश्वास को उस बात के लिए गिना जाता है, जो वह है नहीं, अर्थात धर्मिकता गिना जाता है।
अब्राहम ने केवल परमेश्वर पर विश्वास किया। जो कुछ परमेश्वर ने कहा उसने उसे ग्रहण किया, और उस पर विश्वास किया। आप इसी तरह उद्धार पाते हैं। यह कि परमेश्वर ने आप के लिए कुछ किया है, यह कि प्रभु यीशु आप के बदले में मारा गया और फिर जीउठा। प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करने के द्वारा से ही परमेश्वर आप को धर्मी टहरा देते हैं।
गलातियों की पत्री के तीसरे अध्याय में भी यही महान सच्चाई प्रगट की गई है। गलातियों 3:6-9 “अब्राहम ने तो परमेश्वर पर विश्वास किया और यह उसके लिये धार्मिकता गिनी गई।” अतः यह जान लो कि जो विश्वास करनेवाले हैं, वे ही अब्राहम की सन्तान हैं। और पवित्रशास्त्रने पहले ही से यह जानकर कि परमेश्वर अन्यजातियों को विश्वास से धर्मी ठहराएगा, पहले ही से अब्राहम को यह सुसमाचार सुना दिया कि “तुझ में सब जातियाँ आशीष पाएँगी।” इसलिये जो विश्वास करनेवाले हैं, वे विश्वासी अब्राहम के साथ आशीष पाते हैं।“ वह विश्वास जो अब्राहम में था उसने उसे परमेश्वर में विश्वासयोग्य ठहरा दिया, परन्तु वह विश्वासयोग्य होने के कारण नहीं बचाया गया। वह विश्वास करने के कारण बचाया गया। हमारे लिए यह जानपना आवश्यक है।
अब्राहम के साथ परमेश्वर की वाचा
पद 7 और 8 में आगे लिखा है।
उत्पत्ति 15:7 “तब उसने उससे कहा, “मैं वही यहोवा हूँ जो तुझे कसदियों के ऊर नगर से बाहर ले आया, कि तुझ को इस देश का अधिकार दूँ।”
उत्पत्ति 15:8 “उसने कहा, “हे प्रभु यहोवा, मैं कैसे जानूँ कि मैं इसका अधिकारी हूँगा?”
हम फिर देखते हैं कि अब्राम बहुत ही व्यवहारिक व्यक्ति है। वह वास्तविकता का सामना करने में विश्वास करता हैं, और मुझे लगता है कि हमें भी ऐसा ही करना चाहिए। आज हमें अपने मसीही जीवन में सच्चाई की आवश्यकता है। अगर आपके जावन में सच्चाई नहीं है, तो आप में कुछ भी नहीं है। आजकल बहुत से लोग सिर्फ़ चर्च जाने और उसमें रहने का नाटक करते हैं। अब्राम बहुत व्यवहारिक था। वह कुछ जानना चाहता था, और लिखित तौर पर कुछ चाहता था।
क्या आप जानते हैं कि संभवतः परमेश्वर उसे क्या कहने जा रहा है? परमेश्वर उसे कहने जा रहा है कि, “अब्राम, मैं बहुत आनन्दित हूँ कि तूने यह कहा, क्योंकि मैं न्यायालय में तुझ से मिलने वाला हूँ। मैं एक लेख्य प्रमाणक या नोटरी के पास जाऊँगा और इस इक़रारनामे को वास्तविक बनाऊँ जिसे मैं तुम्हारे साथ बनाने जा रहा हूँ, तुम एक पुत्र प्राप्त करने जा रहे हो। तुम मुझसे वहाँ पर नीचे मिलाना और मैं उस खाली चिन्हित स्थान पर हस्ताक्षर करूँगा।“ अब इससे पहले कि तुम मुझे पत्र लिखो और विरोध करो, मैं कहना चाहता हूँ कि तुम सही हो। क्योंकि बाइबल हमें अब्राम और परमेश्वर के, न्यायालय में मिलने के बारे में कुछ नहीं कहती है, और न ही लेख्य प्रमाणक या नोटरी के पास जाने का कोई वर्णन मिलता है। परन्तु आज की कानून व्यवस्था के अनुसार परमेश्वर ने अब्राम को वही कहा जो उचित था। यहाँ पद 9 और 10 हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अब्राम से क्या कहा, लिखा है।
उत्पत्ति 15:9 “यहोवा ने उससे कहा, “मेरे लिये तीन वर्ष की एक कलोर, और तीन वर्ष की एक बकरी, और तीन वर्ष का एक मेढ़ा, और एक पिण्डुक और कबूतर का एक बच्चा ले।”
उत्पत्ति 15:10 “इन सभों को लेकर उसने बीच से दो टुकड़े कर दिया, और टुकड़ों को आमनेदृसामने रखा; पर चिड़ियों के उसने टुकड़े नहीं किए।“
परमेश्वर ने अब्राम से एक बलिदान तैयार करने को कहा। उसे एक कलोर, एक बकरी और एक मेढ़ा लाने को कहा और उसे दो टुकड़े करके उसके पास आमने-सामने रखने के लिए कहा। उसने पिण्डुक और कबूतर को उसने नहीं काटा परन्तु एक को एक तरफ और दूसरे को दूसरी तरफ रखा।
उन दिनों में जब भी वाचा बांधी जाती थी तो इसी प्रकार से बांधी जाती थी। मान लीजिए कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भेड़ खरीदने के लिए राज़ी हो गया था। तो वे इसी रीति से बलिदान तैयार करते थे। इस संधि का पहला पक्ष दूसरे पक्ष के साथ हाथ मिलाता था और वे अपनी संधि घोषित करते थे और तब वे बलिदान के बीच से होकर चलते थे। उन दिनों का यह तरीका आज हमारे न्यायालय जाने और लेख्य प्रमाणक रोटरी द्वारा पंजीक्रित कर उसके सामने हस्ताक्षर करने के समान है। तो यहाँ पर हम देखते हैं कि परमेश्वर अब्राम के साथ उस समय की कानून व्यवस्था के अनुसार कार्य कर रहा था।
यिर्मयाह की पुस्तक उसके 34:18 में हम इस रीति रिवाज़ को पाते हैं, जो उन दिनों में प्रचलित था, न केवल इन्हीं लोगों के बीच में, परन्तु उस समय के सभी लोगों में, यह प्रथा प्रचलित थी: लिखा है, यिर्मयाह 34:18 “जो लोग मेरी वाचा का उल्लंघन करते हैं और जो प्रण उन्होंने मेरे सामने और बछड़े के दो भाग करके उसके दोनों भागों के बीच से जाकर किया परन्तु उसे पूरा न किया।“ उन दिनों की विधि यही थी कि वे बलिदान को लेकर उसके दो टुकड़े करते थे और उसके बीच से होकर गुजरने के द्वारा वाचा बाँधते थे।
मित्रों यहाँ पर ध्यान दीजिए कि, अब्राम ने परमेश्वर के निर्देशानुसार सब कुछ तैयार कर दिया। तब पद 11 में आगे लिखा है।
उत्पत्ति 15:11 “जब मांसाहारी पक्षी लोथों पर झपटे, तब अब्राम ने उन्हें उड़ा दिया।“
यह एक मानवीय दृष्य है। अब्राम सब कुछ तैयार करने के बाद, जब परमेश्वर का इन्तज़ार कर रहा था, तब माँसाहारी पक्षी, माँस पर झपटते हैं – गिद्ध और कौआ सड़ी गली चीज़ों पर उतरते हैं। पर अब्राम उनको दूर भगा रहा था क्योंकि वे बलिदान पर झपट्टा मारने के लिए तैयार हैं। मित्रों, यदि आप ऐसी परिस्थिति में वहाँ होते और सब रखे बलिदानों को देख कर और उन दिनांे की प्रथा को जानते हुए आप शायद इस प्रकार कहते, “भाई अब्राम, ऐसा लगता है, कि आप जिसके साथ वाचा बाँधने वाले हैं, वह इस वाचा में कोई रूचि नहीं रखता हैं। मुझे लगता है कि वह नहीं आने वाला है। अब्राम यह सुनकर जवाब देता, नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मैं नहीं समझता कि वह देरी कर रहा हैं, उसने मुझसे कहा है कि सब कुछ तैयार कर के रखना और वह वाचा बाँधने के लिए उपस्थित होगा। तब आगे पद 12 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:12 “जब सूर्य अस्त होने लगा, तब अब्राम को भारी नींद आई; और देखो, अत्यन्त भय और महा अन्धकार ने उसे छा लिया।“
यह एक अनहोनी बात लगती है कि परमेश्वर उसे गहरी नींद में डाल देता हैं, जबकि उसे अब्राम के साथ वाचा बाँधनी थी। परन्तु यह एक असाधारण वाचा है। परमेश्वर बलिदान के बीच में से होकर गुजाने वाला था, क्योंकि परमेश्वर कुछ प्रतिज्ञा करके कुछ देने वाला था। परन्तु अब्राम बलिदान के बीच में से होकर गुजाने वाला नहीं था, क्योंकि अब्राम कुछ देने की प्रतिज्ञा नहीं करने वाला था। अब्राम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, इतना ही काफी था।
मित्रों संसार में करीब 2000 वर्ष पूर्व कुछ ऐसा ही हुआ था जा परमेश्वर ने अपने पुत्र को संसार में भेजा था। परमेश्वर पिता ने संसार से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया। और वह पुत्र पृथ्वी पर आकर संसार के पापों के लिए मरने को तैयार हो गया – आप के और मेरे और पूरे संसार के पापों के लिए – ताकी जो कोई उस पर विश्वास करे (अर्थात उसके उपहार को मात्र स्विकार करे) वह नाश न हो पर अनन्त जीवन पाए। यही यूहन्ना 3:16 में लिखा हुआ है। 2000 साल पहले मैं उस वाचा के बांधे जाने के समय उपलब्ध नहीं था, परन्तु परमेश्वर पिता और परमेश्वर पुत्र वहाँ उपस्थित थे, और पुत्र प्रभु यीशु उस क्रूस पर चढ़ गया और मेरे पापों के लिए मारा गया। मैं अपने पापों में मरा हुआ था निषक्रीय था। मैं उस वाचा में कुछ भी नहीं कर सकता था और न आप कर सकते थे मित्रों।
मित्रों, अब्राम ने भी कुछ प्रतिज्ञा नहीं की। मान लीजिए यदि परमेश्वर अब्राम से कहता, “अब्राम यदि तुम प्रतिज्ञा करो कि प्रतिदिन तुम प्रार्थना करोगे, तो मैं तुम्हारे लिए अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करूँगा।“ और मान लीजिए किसी एक दिन अब्राम प्रार्थना करना भूल जाता, तो वाचा समाप्त हो जाती या टूट जाती। इसलिए परमेश्वर को अपनी तरफ की वाचा को अच्छा बनाने की आवश्यकता नहीं है। परन्तु परमेश्वर ने कहा कि वह अपना कार्य पूरा करेगा। और वह मनुष्यों से सिर्फ एक काम करने को कहता हैं, कि वो केवल आमीन कहें। कहने का मतलब है कि उस पर विश्वास करें। मित्रों, आपको परमेश्वर पर विश्वास करना है और जो कुछ उसने किया है उस पर। मित्रों, परमेश्वर पर विश्वास करना ही उद्धार है।
वर्षों पहले हमारे देश के किसी गांव में एक माँ थी जिसका बेट कॉलेज पढ़ने के लिए शहर गया हुआ था। और जब वापस आश्या तो वह एक अविश्वासी के रूप में आया। उस माँ ने अपने बेट को बताया कि परमेश्वर द्वारा दिया गया उद्धार कितना अद्भुत और महान है जो उसने पाप्त कर लिया है। बेटा इस बात पर सन्देहवादी बन चुका था और वह थोड़ा क्रोधित भी हुआ। अन्त में उसने पूछा, “आप कैसे जानती हैं कि आपका उद्धार हो गया है? आपकी इस छोटी आत्मा की कोई कीमत नहीं है।“ वह संसार की विशालता से उसकी तुलना करने लगा और कहा, कि परमेश्वर उसके बारे में सब कुछ भूल सकता है और वह कभी भी अपने उद्धार के प्रति निश्चित नहीं हो सकती है। वह कुछ नहीं बोली और चुपचाप बेटे को सुबह का नाश्ता परोसती रही। जब उसने अपना काम खत्म कर लिया तो वह उसके साथ बैठ गई और कहा, “मेरे पुत्र तुम जानते हो, मैं इसी के बारे में सोच रही हूँ।“ हो सकता है तुम बिल्कुल ठीक हो। मेरी छोटी आत्मा अधिक कीमती नहीं है। हो सकता है कि परमेश्वर के इस विशाल संसार में वह मुझे कभी भी नहीं खोएगा। परन्तु यदि वह मुझे नहीं बचाता है, तो वह मुझसे भी कहीं अधिक नुकसान उठाने वाला है। मैं तो सिर्फ अपनी छोटी नगण्य (निरर्थक) आत्मा को खोऊँगी। परन्तु वो अपनी मान मर्यादा को खो देगा, क्योंकि उसने मेरी आत्मा को बचाने की प्रतिज्ञा दी है। वह बचाने के लिए राज़ी हुआ हैः “ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन को प्राप्त करे।“ परमेश्वर ही है जो बलिदानों में होकर गुज़रा अर्थात् परमेश्वर ने वाचा बाँधी। वह हमरे उद्धार को पूरा करता है। तब आगे पद 13 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:13 “तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “यह निश्चय जान कि तेरे वंश पराए देश में परदेशी होकर रहेंगे, और उस देश के लोगों के दास हो जाएँगे; और वे उनको चार सौ वर्ष तक दुरूख देंगे।“
धर्मशास़्त्र बाइबल में तीन बार यहूदियों के अपने राष्ट्र और भूमि से विस्थापित किए जाने की भविष्यद्वाणी कह गई है। पर यहाँ पर पहली बार है कि उनके पनुःस्थापन की भी भविष्यद्वाणी की गई है, और वे इस बार वापस आए। इसके बाद वे बेबीलोन की बंधुआई में गए। उन्हें बंदी बनाकर ले जाया गया, और वे वापस आ गए। सन् 70 ई. में यरूशलेम नष्ट हो गया, और तीसरी बार वे विस्थापित किए गए। वे तब से आज तक कभी वापस नहीं लौटे हैं। उस ज़मीन पर उनकी वर्तमान मौजूदगी किसी भी तरह से पवित्र शास्त्र की भविष्यवाणी पूर्ती नहीं है। लेकिन परमेश्वर के वचन के अनुसार, वे एक दिन ठीक वैसे ही वापस आएंगे जैसा कि भविष्यवाणी की गई है। आगे पद 14 और 15 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:14 “फिर जिस देश के वे दास होंगे उसको मैं दण्ड दूँगा: और उसके पश्चात् वे बड़ा धन वहाँ से लेकर निकल आएँगे।“
उत्पत्ति 15:15 “तू तो अपने पितरों में कुशल के साथ मिल जाएगा; तुझे पूरे बुढ़ापे में मिट्टी दी जाएगी।“
निश्चित रूप से अब्राहम के वंश मिस्र से बड़ा धन लेकर वापस आए, परन्तु अब्राहम उसे देखने के लिए जीवित नहीं था। तब पद 16 में आगे लिखा है।
उत्पत्ति 15:16 “पर वे चौथी पीढ़ी में यहाँ फिर आएँगे: क्योंकि अब तक एमोरियों का अधर्म पूरा नहीं हुआ है।”
परमेश्वर अब्राम से कहता हैं, “मैं तुम्हें इस समय इस देश में नहीं रख सकता, क्योंकि मैं एमोरियों से भी प्रेम करता हूँ, मैं उन्हें भी मौका देना चाहता हूँ कि वे मेरी ओर लौट आएँ।“ और परमेश्वर ने एमोरियों को चार सौ साल का एक लम्बा समय दिया। क्या यह काफी नहीं था? कि वे उसकी ओर फिरते या नहीं। उस पूरे देश में केवल एक ही जन फिरकर परमेश्वर के पास आया। वह कनानी स्त्री जिसका नाम राहाब था, जो वेश्या थी। वह परमेश्वर की ओर फिरी और परमेश्वर पर विश्वास किया। मित्रों, आज परमेश्वर आपसे भी सिर्फ उस पर विश्वास करने को कहता है। परमेश्वर ने एमोरियों को एक लम्बा समय दिया ताकि वे परमेश्वर की ओर फिरें। तब आइए हम पद 17 को पढ़ें लिखा है।
उत्पत्ति 15:17 “और ऐसा हुआ कि जब सूर्य अस्त हो गया और घोर अन्धकार छा गया, तब एक अंगीठी जिसमें से धूआँ उठता था और एक जलती हुई मशाल दिखाई दी जो उन टुकड़ों के बीच में से होकर निकल गई।“
अंगीठी और जलती हुई मशाल, दोनों मसीह यीशु की ओर इशारा करती है। अंगीठी वास्तव में न्याय को दर्शाती है और मशाल मसीह यीशु को दर्शाती है जो जगत की ज्योति है। तब पद 18 से 21 में लिखा है।
उत्पत्ति 15:18 “इसी दिन यहोवा ने अब्राम के साथ यह वाचा बाँधी, “मिस्र के महानद से लेकर परात नामक बड़े नद तक जितना देश है,“
उत्पत्ति 15:19 “अर्थात् केनियों, कनिज्जियों, कदमोनियों,“
उत्पत्ति 15:20 “हित्तियों, परीज्जियों, रपाइयों,“
उत्पत्ति 15:21 “एमोरियों, कनानियों, गिर्गाशियों और यबूसियों का देश मैं ने तेरे वंश को दिया है।”
अब यहाँ परमेश्वर उस भूमि को चिन्हित करता हैं जिसे उसने अब्राम को देने की प्रतिज्ञा की हैं। जो भी हो, अब्राम ने इस प्रतिज्ञा के लिए क्या किया? कुछ भी नहीं किया। उसने सिर्फ परमेश्वर पर विश्वास किया। परमेश्वर आपको भी अपने अनुग्रह के द्वारा बचाएगा। जब आप उस बात पर विश्वास करेंगे जो उसने आप के लिए किया है। यदि आप के पास इस संबंध में कोई प्रश्न है तो कृपया हमारे नम्बर पर संपर्क करें। आइए प्रार्थना के साथ समाप्त करें।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
