उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 14:1 – 14:24
कार्यक्रम : #0032
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अध्याय 14
प्रिय मित्रों प्रभु यीशु मसी के नाम में प्रेम भरा नमस्कार। सत्यवचन बाइबल अध्ययन में एक बार फिर से स्वागत है दोस्तों। पिछले प्रसारण के अंत में, हम 13वें अध्याय में अब्राम की गवाही के रूप में, उसके द्वारा बनाई गई वेदि को देख रहे थे। अब हम 14वें अध्याय में आते हैं जिसका विषय है।
विषय: पूर्वी राजाओं के द्वारा सदोम और अमोरा को अधीनता में लेना, अब्राम का लूत को उनसे छुड़ाना, लूट का माल लेने से अब्राम का इन्कार करना
अध्याय 14 में सब से पहले वर्णित युद्ध को पाते हैं, जिसमें अब्राम, अपने भतीजे लूत को छुड़ाता है, और यहाँ पर हम सब से पहले याजक का भी पदार्पण होता हैं, जिस समय अब्राम मलिकिसिदक के द्वारा आशीषित किया गया। यही दो महान सत्य इस स्थान पर देखे जा सकते हैं। एक प्रकार से देखें तो यह अध्याय बहुत ध्यान देने योग्य है। यह इस कहानी के साथ मेल यहाँ नहीं खाता है। और ऐसा लगता है कि इसे छोड़ भी दिया जाता, फिर भी इसके बिना कहानी आगे बढ़ सकती थी। परन्तु उत्पत्ति की पुस्तक में यह एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है।
पूर्वी राजाओं के द्वारा सदोम और अमोरा को अधीनता में लेना
आइए हम पढ़े उत्पत्ति 14 अध्याय का पद 1 और 2
उत्पत्ति 14:1 “शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्याेक, और एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, और गोयीम के राजा तिदाल के दिनों में ऐसा हुआ।“
उत्पत्ति 14:2 “कि उन्होंने सदोम के राजा बेरा, और अमोरा के राजा बिर्शा, और अदमा के राजा शिनाब, और सबोयीम के राजा शमेबेर, और बेला जो सोअर भी कहलाता है, इन राजाओं के विरुद्ध युद्ध किया।“
मित्रों, सर्वप्रथम मैं आपको बता दूँ कि यह एक ऐतिहासिक अभिलेख है। इस अध्याय के पहले ग्यारह पदों में, यह दर्शाया गया है कि पूर्व के राजाओं ने सदोम और अमोरा को पराजित किया। कई वर्षों तक तार्किक विद्वानों ने इसे मानने से इन्कार कर दिया था क्योंकि उनका कहना था कि इन लोगों के नाम संसार के एतिहास की पुस्तकों मंे शामिल नहीं हैं। इसलिए यह एक तर्कहीन कहानी है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि इन राजाओं के नाम स्मारकों पर और शिलालेखों पर लिखे मिले हैं। जो दर्शाते हैं कि वे अस्तित्व में थे। वास्तव में अम्रापेल को जिसे सामाजिक इतिहास में हम्मुराबी के रूप् में जाना जाता हैं। और जिन लेखों का संग्रह हमारे पास है, वो अत्याधिक महत्वपूर्ण और सार्थक है।
उस समय युद्ध हुआ और यही पहला युद्ध है जिसका उल्लेख पवित्रशास्त्र बाइबल में किया गया है। मानवजाति ने प्रारंभिक दिनों से ही युद्ध करना आरंभ कर दिया था। यद्यपि यह पहला युद्ध है जिसके अभिलेख मौजूद है परन्तु मैं नहीं जानता कि यह पहला युद्ध था या नहीं। मैं नहीं समझता कि लेखक इस प्रकार हम पर प्रभाव डालने का प्रयास कर रहा है। इस युद्ध को अभिलेखित करने का मुख्य कारण यह था कि इस युद्ध में अब्राम का भतीजा लूत शामिल था। अब पद 3 और 4 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:3 “इन पाँचों ने सिद्दीम नामक तराई में, जो खारे ताल के पास है, एका किया।“
उत्पत्ति 14:4 “बारह वर्ष तक तो ये कदोर्लाओमेर के अधीन रहे; पर तेरहवें वर्ष में उसके विरुद्ध विद्रोह किया।“
इसी बगावत की वजह से पूरब के राजा सदोम और अमोरा के खिलाफ आए। इन राजाओं में पहले ही युद्ध हो चुके थे, क्योंकि पूरब के राजाओं ने मैदान के इन शहरों को अपने कब्ज़े में कर लिया था, लेकिन ये शहर बगावत पर उतर आए थे। पद 5 से 11 में हम पढ़ते हैं कि कैसे पूर्व के राजाओं ने उन राजाओं को हराया जो मृत सागर के निचले हिस्से के आसपास एकत्र हुए थे। ओ पद 12 में हम पढ़ते हैं।
उत्पत्ति 14:12 “और अब्राम का भतीजा लूत, जो सदोम में रहता था, उसको भी धन समेत वे लेकर चले गए।“
लूत सदोम में रहता था और उसे बंधक बना कर ले जाया गया। इस युद्ध के लिखे जाने का भी महत्वपूर्ण कारण है कि अब्राम अपने भतीजे लूत के साथ क्या करने जा रहा था।
अब्राम का लूत को छुड़ाना
उत्पत्ति 14:13 “तब एक जन जो भागकर बच निकला था उसने जाकर इब्री अब्राम को समाचार दिया; अब्राम तो एमोरी मम्रे, जो एश्कोल और आनेर का भाई था, उसके बांज वृक्षों के बीच में रहता था; और ये लोग अब्राम के संग वाचा बाँधे हुए थे।“
जब पूरब के राजा अपने कैदियों के साथ सदोम और अमोरा के इलाके से लौट रहे थे, तो वे मृत सागर के पश्चिमी किनारे के साथ उत्तर की ओर बढ़ते रहे, जो हेब्रोन और मम्रे से अधिक दूर नहीं था, जहाँ अब्राम रहा करता था। आप उस स्थान पर खड़े हो सकते हैं जहाँ उस दिन अब्राम खड़ा था और आप मृत सागर की तरफ होने वाली किसी भी हलचल को देख सकते हैं। इसलिए जब अब्राम को खबर मिली, तो उसने तुरंत दुश्मनो का पीछा करना शुरू कर दिया, जो उत्तर की ओर बढ़ रहा थे।
लिखा है कि “ये लोग अब्राम के संग वाचा बाँधे हुए थे।“ ध्यान दें कि अब्राम के साथ लोगो का एक समुह था। उस दिन दुश्मन के द्वारा पीछा करने या हमले की वजह से उन्हें एक साथ खड़ा होना पड़ा। उन्हें या तो साथ रहना था या अलग-अलग मरना था ।तब पद 14 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:14 “यह सुनकर कि उसका भतीजा बन्दी बना लिया गया है, अब्राम ने अपने तीन सौ अठारह शिक्षित, युद्ध कौशल में निपुण दासों को लेकर जो उसके कुटुम्ब में उत्पन्न हुए थे, अस्त्र-शस्त्र धारण करके दान तक उनका पीछा किया।“
यह बहुत चौंकाने वाला है, तथा यह अब्राम की संपत्ति और उसकी समृद्धी की हद के बारे में कुछ बताता है। इससे हमें अनुमान लगता जाता है कि अब्राम के पास कितने नौकर चाकर थे। उसके घर में, 318 हथियार बंद सुरक्षाकर्मी थे तो उसके पास बिना हथियार के कितने नौकर रहे होंगे आप अनुमान लगा सकते हैं? उदाहरण के लिए, औरतें, बच्चे और बूढ़े भी रहे होंगे – लेकिन 318 हथियार बंद थे। इतने सारे नौकर चाकर और मज़दूर होने का मतलब है कि अब्राम मवेशी और भेड़-बकरियां पालन का काफी बड़ा व्यपारी रहा होगा।
तब आगे लिखा है, “अस्त्र-शस्त्र धारण करके दान तक उनका पीछा किया।“ दान उत्तर में ऊपर स्थित है। आगे पद 15 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:15 “और रात को अपने दासों के अलग-अलग दल बाँधकर उन पर चढ़ाई करके उनको मार लिया और होबा तक, जो दमिश्क के उत्तर की ओर है, उनका पीछा किया।“
अब्राम उत्तर में दमिश्क तक उनका पीछा करता रहा, जो एक लम्बा रास्ता है। तत्पश्चात अब्राम अपने दासों को दो भाग में विभाजित कर दिया। एक दल ने संभवतः दुश्मनों पर पीछे से आक्रमण किया जब ये लोग उनका पीछा कर रहे थे। और दूसरा दल उनके साथ साथ चलता रहा, जब पहले दल ने दुश्मनों पर आक्रमण किया और वे युद्ध के लिए मुड़े, तब सभी दल पहले दल के साथ मिल गए। इसके परिणामस्वरूप् अब्राम विजयी हुआ। कम से कम वह उन्हें तितर-बितर करने में सफल रहा जिससे वे मरूभूमि में भाग गए, और अपनी लूट और बन्धुए छोड़ कर भाग खड़े हुए। पब अगले पद 16 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:16 “और वह सारे धन को, और अपने भतीजे लूत और उसके धन को, और स्त्रियों को, और सब बन्दियों को लौटा ले आया।“
आप देख सकते हैं कि वे महिलाओं और पुरूषों को बंदी बना कर ले जा रहे थे। अब्राम ने यहाँ पर एक महान् काम किया। और यह सब कुछ उसने अपने भतीजे लूत के लिए किया। यही कारण है कि यहाँ पर इन सब घटनाओं का वर्णन किया गया है। यह निश्चित रीति से कहा जा सकता है कि यह अध्याय असंगत नहीं है। यह अब्राम के जीवन का एक हिस्सा है, जो बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। तब पद 17 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:17 “जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीतकर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नामक तराई में, जो राजा की तराई भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया।“
सदोम का राजा अब्राम से मिलने को निकला। लेकिन अब कोई और है जो अब्राम से मिलने को आ रहा है, और यह अच्छी बात है कि वह आए, क्योंकि सदोम का राजा अब्राम के सामने एक बड़ी परिक्षा रखने जा रहा था। आगे पद 18 औंर 19 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:18 “तब शालेम का राजा मलिकिसिदक, जो परमप्रधान ईश्वर का याजक था, रोटी और दाखमधु ले आया।“
उत्पत्ति 14:19 “और उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो।“
मेरे पास यहाँ कई सवाल हैं, और मुझे यकीन है कि आपके पास भी होंगे। सबसे पहले, यह आदमी मेल्कीसेदेक संसार में कहाँ से आया? वह पवित्र बाइबल के पन्नों पर केवल रोटी और दाखमधु लेकर आते प्रगट किया गया है, वह अब्राम को आशीर्वाद देता है, और फिर वह पवित्र बाइबल के पन्नों से गायब हो जाता है – बस इतना ही। मुझे इस बात की हैरानी है कि वह कहाँ से आया, और कहाँ चला गया, और मुझे इस बात की भी हैरानी है कि उसका क्या काम था।
उसके बारे में लिखा है कि वह सालेम का राजा था, पर साथ ही साथ वह परमप्रधान ईश्वर का याजक भी था। पर अब मेरे मन में एक और प्रश्न आता है: उसे परमप्रधान ईश्वर के बारे में कैसे पता चला? उसने उसे कहाँ खोजा। एल-एलोहीम सर्वोच्च परमेश्वर है, जो स्वर्ग और पृथ्वी का रचने वाला परमेश्वर है, दूसरे शब्दों में, जीवित परमेश्वर, उत्पत्ति अध्याय 1 का परमेश्वर, नूह का परमेश्वर, हनोक का परमेश्वर। यहाँ उस परमेश्वर के बारे में कहा गया है, यह कोई स्थानीय देवता नहीं है। एच सी ल्युपोल्ड उत्पत्ति पर लिखी अपनी पुस्तक में कहते है, यहाँ पर “पूरी तरह से एकईवरवादी सोच को प्रगट किया गया है।“ डॉ. सैमुअल एम. ज़्वेमर, अपनी पुस्तक “धर्म की उत्पत्ति“ में कहते हैं कि इससे पता चलता है कि बहुदेववाद से पहले एकईवरवाद उपस्थित था। दूसरे शब्दों में, सभी मनुष्यों को जीवित और सच्चे ईश्वर का ज्ञान था। जैसा रोमियों 1:21 में लिखा है, “इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहाँ तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया।“ पौलुस आगे यहाँ तक कहता हैं कि मनुष्य उस हद तक नीचे गिरते चले गया जहाँ उसने सृष्टिकर्ता से अधिक सृष्टि की आराधना करना शुरू कर दिया।
फिर भी यहाँ पर हम अब्राम के दिनों मे देखते हैं कि यहाँ पर एक व्यक्ति है जो उन दिनों संसार में महायाजक था। उसे सच्चे और जीवित परमेश्वर के बारे में ज्ञान था। वह सच्चे और जीवित परमेश्वर का याजक था। और वह रोटी और दाखमधु लेकर अब्राम के पास आता है, जो प्रभु-भोज के समय उपयोग की जाने वाली वस्तुएं हैं। मुझे इस बात का आश्चर्य होता है कि उस समय उसके दिमाग में क्या चल रहा था? मलिकिसिदक परमेश्वर के बारे में कितना जानता था?
मलिकिसिदक का उल्लेख बाइबल में तीन बार किया गया है। उत्पत्ति की इस पुस्तक के अलावा भजन संहिता 110:4 में जो आने वाले मसीह की भविष्यद्वाणी है, “……. तू मेल्कीसेदेक की रीति पर सर्वदा का याजक है।” अंततः इब्रानियों की पत्री में अनेक बार उसका उल्लेख किया गया है। इब्रानियों की पत्री को पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि उसके उद्गम या आरंभ के बारे में क्यों कुछ भी उत्पत्ति की पुस्तक में प्रगट नहीं किया गया है। उसके माता-पिता के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है, और यह एक अजीब सी बात है, क्योंकि उत्पत्ति की पुस्तक एक पारिवारिक पुस्तक है। जो परिवार के उद्गम के बारे में बताती है। जब भी हम इस पुस्तक में देखते हैं तो पाते हैं कि परिवार के मुख्य व्यक्ति का नाम अवश्य लिखा गया है, जिसके द्वारा वंश या पीढ़ी आगे बढ़ती है। (जैसे मलिकिसिदक का नाम है), कि “वह फलाने का पुत्र है“ या “फलाने का वंशज हैं।“ लेकिन मलिकिसिदक के वंशज के बारे में हमें कुछ भी जानकारी नहीं दी गई है। इब्रानियों की पत्री का लेखक इस बात को स्पष्ट करता है कि क्यों मलिकिसिदक के माता-पिता का नाम या उसके प्रारंभ या अन्त के दिनों का वर्णन नहीं किया गया है, क्योंकि यह मसीह की पुरोहिताई के पद का आरंभ, मलिकिसिदक के बाद की सूची में है। इसकी सेवा में हमारे प्रभु यीशु ने क्या किया, कि उसने अपने आपको बलिदान कर दिया और परमपवित्रस्थान में प्रवेश किया जो आज स्वर्ग है। और मसीह की पुरोहिताई, हारुन के सूची का अनुसरण करती है। परन्तु व्यक्तित्व में हमारे प्रभु के दिनों का कोई आरंभ या अन्त नहीं है, और उसकी पुरोतिहाई, मलिकिसिदक की सूची का अनुसरण करती है। एक राजा होने के नाते, मसीह अब्राहम की सन्तान है, वह दाऊद का पुत्र है, यह सब कुछ हमें मत्ती रचित सुसमाचार में बताया गया है। परन्तु यूहन्ना रचित सुसमाचार 1:1 और 1:14 में हम पढ़ते हैं, “आदि में वचन था, वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था… और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी जैसी पिता के एकलौते की महिमा।“ जहाँ तक सृष्टि की बात है, उसका कोई भी आरंभ और अन्त नहीं है, वह अनन्तकालीन परमेश्वर है, और स्वर्ग की महिमा को छोड़कर आया, और वचन देहधारी हुआ और हमने उसकी महिमा देखी। हम मलिकिसिदक में यीशु मसीह के अद्भुत चित्रण को पाते हैं।
लिखा है वह, रोटी और दाखमधु लेकर आया, अब मुझे मालूम हुआ कि मलिकिसिदक क्यों रोटी और दाखमधु लेकर आया था। क्योंकि पवित्रशास्त्र इसके बारे में 1 कुरिन्थियों 11:26 में कहता है, “क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।“ मलिकिसिदक यीशु मसीह की मृत्यु की भविष्यद्वाणी या पूर्व घोषणा कर रहा था।
उसी आधार पर उसने अब्राम को आशीर्वाद दिया: “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो।“ एल एलोहीम जो सृष्टिकर्त्ता है। यह व्यक्ति उन दिनों संसार में महायाजक था। और प्रभु यीशु मसीह आज संसार का महायाजक हैं। प्रभु यीशु मसीह मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक हैं, हारून की रीति पर नहीं। जैसा यहाँ पर दर्शाया गया है, कि हारून सिर्फ इस्राएलियों और तम्बू के लिए था। परन्तु यीशु मसीह अपने मानव रूप में मलिकिसिदक रीति पर संसार का महायाजक है।
तब आगे 14 के 20 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:20 “और धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।” तब अब्राम ने उसको सब वस्तुओं का दशमांश दिया।“
अब्राम ने आरंभ में ही मलिकिसिदक को दसवा अंश दिया। वह दसवा अंश देने के बारे में कैसे जानता था? स्पष्ट रूप से यह परमेश्वर की ओर से उसे प्रकाशन मिला था और इसी प्रकार अन्य कार्यों के लिए भी मिला।
अब्राम लूट का माल लेने से इंकार करता है।
उत्पत्ति 14:21 “तब सदोम के राजा ने अब्राम से कहा, “प्राणियों को तो मुझे दे, और धन को अपने पास रख।”
यह एक परिक्षा थी। हम्मुराबी व्यवस्था के अनुसार जो उन दिनों में थी, अब्राम को लूट का माल और लोगों को लेने का पूरा अधिकार था। लेकिन सदोम का राजा चालाक था। उसने कहा, कि हमें लोगों को दे दे और लूट का माल और संपत्ति अपने लिए रख ले, यह तुम्हारे लिए है। यही अब्राम के लिए एक परीक्षा थी। उसके बाद, जब भी कोई उससे कहता, कि अब्राम निश्चय ही धनवान मनुष्य है, परमेश्वर ने उसे आशीष दिया है। लेकिन मेरे विचार में इस पर सदोम का राजा कहता, “मेरे कारण वह आशीषित हुआ है, परमेश्वर ने उसे आशीष नहीं दी है, मैंने उसे लूट का माल दिया है। अब्राम यह जानता था इसलिए वह आगे कहता है।
उत्पत्ति 14:22 “अब्राम ने सदोम के राजा से कहा, “परमप्रधान ईश्वर यहोवा, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है।“
अब्राम अभी भी मलिकिसिदक के आशीर्वाद के प्रभाव में था और यह बहुत अच्छा हुआ कि उसकी मुलाकात मलिकिसिदक से हो गई। मित्रों, परमेश्वर हमेशा हमें आने वाली परीक्षा के लिऐ पहले तैयार करता हैं, ताकि हम उसका सामना कर सकें। 1 कुरिन्थियों 10:13 में परमेश्वर कहता है कि वह कभी हमें सामर्थ्य से बाहर परिक्षा में पड़ने नहीं देता। “तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है। परमेश्वर सच्चा है और वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको।“ परमेश्वर ने अब्राम को इसके लिए तैयार कर दिया था। तब पद 23 में कहता है।
उत्पत्ति 14:23 “उसकी मैं यह शपथ खाता हूँ, कि जो कुछ तेरा है उसमें से न तो मैं एक सूत, और न जूती का बन्धन, न कोई और वस्तु लूँगा कि तू ऐसा न कहने पाए कि अब्राम मेरे ही कारण धनी हुआ।“
ऐसा लगता है कि जब अब्राम निकल रहा था तब सम्भवतः उसने परमेश्वर से वाचा बाँध कर कहा था कि “हे परमेश्वर, मैं लूट का माल लेने के लिए इस युद्ध में नहीं जा रहा हूँ। मैं किसी संपत्ति के पीछे नहीं हूँ। मैं अपने भतीजे लूत को छुड़ाना चाहता हँू।“ और परमेश्वर ने उसे ऐसा करने के लिए अनुमति दी। और अब अब्राम, सदोम के राजा से ये सारी बातें गवाही के तौर पर कहता है। अब्राम कह सकता था, “कि मैं जीवित और सच्चे परमेश्वर की उपासना करता हूँ। और मैंने कसम खाई है कि मैं लूट में से कुछ भी नहीं लूँगा। आप मुझे धनवान नहीं बना सकते हैं। मैं आपको जूते के बन्धन तक मुझे देने नहीं दूँगा। क्योंकि यदि आपने ऐसा कर दिया तो आप चारों ओर जाकर कहेंगे कि आपने मुझे धनी बना दिया। इसलिए यदि मैं धनी बनूँ तो परमेश्वर ही मुझे धनी बनाए।“ अब आगे पद 24 में लिखा है।
उत्पत्ति 14:24 “पर जो कुछ इन जवानों ने खा लिया है और उनका भाग, जो मेरे साथ गए थे अर्थात् आनेर, एश्कोल, और मम्रे, मैं नहीं लौटाऊँगा, वे तो अपना अपना भाग रख लें।”
लेकिन अब्राम ने कहा, कि लूट पर अन्य पुरुषों का अधिकार है और वे अपना हिस्सा लें सकते हैं। परन्तु मैं कुछ नहीं लूंगा हूँ। जो कुछ भी इन जवानों खा लिया है वह उनकी मज़दूरी है। परन्तु मेरे लिए, तू कुछ भी न दे सकेगा।
मित्रों, आज प्रश्न यह है कि आप किसकी ओर खड़े हैं? अब्राम के साथ या सदोम के राजा के साथ? वह आपको धनी बना देगा लेकिन परमेश्वर से आपको दूर कर देगा। आप किस ओर रहना चाहते हैं। कृपया विचार करें।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
