उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक

बाइबिल के माध्यम से - उत्पत्ति 12:10 - 12:18
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डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 12:10 – 12:18
कार्यक्रम : #0031

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प्रिय मित्रों नमस्कार। आशा है आप परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने के लिए तैयार बैठे हैं। आप सभी का स्वागत है मित्रों। पिछले अध्ययन में हमने अब्राहम को परमेश्वर द्वारा दी गई तीन प्रतिज्ञाओं को जाना था। अब हम उसके जीवन में दूसरी बार कलंक लगने की बात को देखते हैं।

अब्राम का विश्वास से चूकना।
आइए हम पढ़ें अध्याय 12 का पद 10, लिखा है

उत्पत्ति 12:10 “उस देश में अकाल पड़ा: इसलिये अब्राम मिस्र देश को चला गया कि वहाँ परदेशी होकर रहे, क्योंकि देश में भयंकर अकाल पड़ा था।“

अब्राम जिस देश में था वह आशीषित भूमि थी। इसलिए परमेश्वर ने उसे कभी भी उस स्थान को छोड़ने के लिए नहीं कहा। परन्तु उस देश में अकाल पड़ा, और मैं सोचता हूँ कि एक सुबह अब्राम ने अपने तम्बू के पर्दे को हटाकर बाहर देखा, और अपनी पत्नी सारै से कहा, “ऐसा लगता है कि सब लोग मिस्र देश की ओर जा रहे हैं, तुमको तो मालूम है कि यहाँ अकाल पड़ा हुआ है और यह और अधिक भीषण होता जा रहा है, ऐसा लगता है कि हमें भी मिस्र देश में जाने के बारे में सोचना चाहिए।“

मित्रों, इस बात पर ध्यान दीजिए कि परमेश्वर ने उसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा था। जब पिछली बार, परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया, तो उसने कहा, “अब्राम यही वह भूमि है, जिसे मैं तुझे देने पर हूँ। तू आशीष का स्रोत होगा, और मैं तुझे यहाँ पर आशीश देनेवाला हूँ।“ परन्तु आप देखिए कि अब्राम, ने परमेश्वर पर विश्वास नहीं किया, और वह मिस्र देश को चला गया। याद रखें मित्रों, बाइबल में, मिस्र सांसारिकता को दर्शाता है, या सांसारिकता का चित्र प्रस्तुत करता है। और आप इसे हर समय पाएँगे। मैं समझता हूँ कि आज भी यह सांसारिकता का चित्र है। परन्तु हम देखते हैं कि अब्राम मिस्र देश को चला गया।

यह एक अद्भुत बात है, कि संसार आज मसीहियों को, कैसे अपनी ओर खींच रहा है। मित्रों, यह कितनी आश्चर्य की बात है कि मसीही लोग किस प्रकार से संसार की ओर खिंचते चले जा रहे हैं। और कैसे वे अपने बचाव के लिए अनेक तर्क प्रस्तुत करते हैं।

मित्रों, जो भी हो, वहाँ तुरन्त उनके लिए एक समस्या आ खड़ी हुई, और वह सारै से संबंधित थी, क्योंकि वह बहुत ही सुन्दर स्त्री थी। आइए अब आगे पद 11 और 12 को पढ़ें।

उत्पत्ति 12:11 “फिर ऐसा हुआ कि मिस्र के निकट पहुँचकर, उसने अपनी पत्नी सारै से कहा, “सुन, मुझे मालूम है कि तू एक सुन्दर स्त्री है।“
उत्पत्ति 12:12 “और जब मिस्री तुझे देखेंगे तब कहेंगे, ‘यह उसकी पत्नी है,’ इसलिये वे मुझ को तो मार डालेंगे, पर तुझ को जीती रख लेंगे।“
मित्रों, जैसा कि आप में से सम्भवतः कई लोग इस बात को जानते हैं, कि मृत सागर के उत्तरी क्षेत्र में कुछ पुराने लेख प्राप्त हुए हैं जो गुफ़ाओं में से मिले हैं, जो मृत सागर स्क्रोल (लेख) या “डेड सी स्क्रॉल“ के नाम से जाने जाते हैं। सबसे पहले कुछ अविश्वासी विद्वानों ने यह प्राप्त किये और सोचा कि हम इसके द्वारा बाइबल को गलत ठहरा सकेंगे। लेकिन क्या आपने ध्यान दिया कि बड़े-बड़े विरोधी कैसे शान्त बैठ गए? उन्होंने उसमें ऐसा कुछ नहीं पाया, जो बाइबल का खंडन या विरोध कर सके।

मित्रों, वही अभीलेख इस बात का विवरण देते हैं जैसा उत्पत्ति 13:7 में लिखा है, कि परमेश्वर ने अब्राम से कहा, “उठ, उस भूमि की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर“। ऐसा कहने के बाद, अब्राम की छानबीन का चित्रण हमें इसी संरक्षित लेख (स्क्रोल) में मिलता है। यह स्क्रोल (लेख) हमें पहले व्यक्ति अर्थात् अब्राम के द्वारा उसकी यात्रा का वर्णन देता है। यह इस बात को पक्का करता है कि जो बातें बाइबल में इस भूमि की सुन्दरता और उपजाऊ के विषय कही गई थीं वह सही है, जिन लोगों ने इस भूमि को आँखों से देखा, उन्होंने बाइबल के लेख की गवाही दी है। आज बहुत से लोग उस देश को देखने के लिए जाते हैं, और वे यह नहीं समझ पाते हैं कि, इस भूमि को कैसे मधु और दूध की धारावाली भूमि (देश) कहा जा सकता है। उनका विचार सही है, व्यवस्थाविवरण की पुस्तक हमें बताती है कि किस कारण से वह भूमि उजाड़ हो गई, जिसे आज हम देखते हैं। परन्तु अब्राम के दिनों में यह महिमापूर्ण भूमि थी।
फिर भी कुछ समय के लिए वहाँ पर अकाल पड़ा। और ऐसे कठिन समय में अब्राम कनान देश छोड़कर, मिस्र देश को चला गया।

जैसे-जैसे वह मिस्र के निकट आया, उसने इस बात पर ध्यान दिया कि वह एक समस्या में पड़ने वाला है। क्योंकि उसकी पत्नी अति सुन्दर थी। इसलिए उसने अपनी पत्नी सारै से कहा जैसा हम पद 13 में पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 12:13 “अतः यह कहना, ‘मैं उसकी बहिन हूँ’, जिससे तेरे कारण मेरा कल्याण हो, और मेरा प्राण तेरे कारण बचे।”

“कृपया यह कहना कि मैं उसकी बहन हूँ,“ यह आधा झूठ था जिसे हम आगे देखेंगे। मित्रों, आधा झूठ कभी-कभी पूरा झूठ बोलने से भी बदतर होता है, और यह निश्चय ही धोखा देने के उद्देश्य से था। अब्राम का डर सच साबित हुआ। क्योंकि राजा फ़िरौन, उसकी पत्नी सारै को ले गया कि उसे अपनी रानी बनाए। लेकिन हम एस्तेर की पुस्तक से इस बात को जानते हैं कि उन दिनों में रानी बनने से पहले, शुद्धिकरण का समय होता था। और उन्हीं समयों में परमेश्वर ने राजा फ़िरौन और उसके घराने पर बड़ी विपत्ति भेजी कि राजा इस बात को जान ले कि वह सारै को अपनी पत्नी होने के लिए न ले। तब हम आगे पद 18 से 20 में पढ़ते है।

उत्पत्ति 12:18 “तब फ़िरौन ने अब्राम को बुलवाकर कहा, “तू ने मेरे साथ यह क्या किया? तू ने मुझे क्यों नहीं बताया कि वह तेरी पत्नी है?“

उत्पत्ति 12:19 “तू ने क्यों कहा कि वह तेरी बहिन है? मैं ने उसे अपनी ही पत्नी बनाने के लिये लिया; परन्तु अब अपनी पत्नी को लेकर यहाँ से चला जा।”

उत्पत्ति 12:20 “और फ़िरौन ने अपने आदमियों को उसके विषय में आज्ञा दी और उन्होंने उसको और उसकी पत्नी को, सब सम्पत्ति सहित जो उसकी थी, विदा कर दिया।“

यहाँ पर हम देख सकते हैं कि परमेश्वर अब्राम और सारै के जीवन में सुरक्षा प्रदान कर रहा था परन्तु वह स्वयं उन पर प्रगट नहीं हुआ, जब तक वे मिस्र देश से लौट नहीं गए। मित्रों, इसके साथ ही अध्याय 12 यहाँ समाप्त होता है, पर हम अध्याय 13 से अपने अध्ययन को जारी रखेंगें जिसका विषय है।

अध्याय 13

विषय: अब्राम का लूत से अलग होना, लूत का सदोम जाना, परमेश्वर का अब्राम को दर्शन देना और प्रतिज्ञाओं को पुनः दुरूस्त करना

अध्याय 13 में हम अब्राम की मिस्र देश से वापसी देखते हैं। अब्राम और लूत मिस्र देश को छोड़कर प्रतिज्ञा के देश, कनान में वापस लौट आते हैं। लूत अब्राम से अलग होकर सदोम को चला जाता है। और तब परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता हैं। मित्रों, आप इस बात पर ध्यान दीजिए कि जब तक अब्राम मिस्र में था और जब तक वह लूत से अलग नहीं हुआ परमेश्वर ने उसे दर्शन नहीं दिया। जैसे ही वह मिस्र देश से लौटकर प्रतिज्ञा की भूमि में आया और लूत से अलग हुआ, परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया।

अब्राम और लूत का अलग होना

आइए हम पढ़े उत्पत्ति 13 उसका 1 और 2 पद लिखा है।
उत्पत्ति 13:1 “तब अब्राम अपनी पत्नी और अपनी सारी सम्पत्ति लेकर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़कर कनान के दक्खिन देश में आया।“
उत्पत्ति 13:2 “अब्राम भेड़-बकरी, गाय-बैल, और सोने-रूपे का बड़ा धनी था।“

अब्राम उन दिनों अपने देश का धनाढ्य व्यक्ति था जिसके पास बहुत सम्पत्ति थी। तब पद 3 में लिखा है।

उत्पत्ति 13:3 “फिर वह दक्खिन देश से चलकर बेतेल के पास उसी स्थान को पहुँचा, जहाँ पहले उसने अपना तम्बू खड़ा किया था, जो बेतेल और ऐ के बीच में है।“

अब्राम यरूशलेम के उत्तर की ओर चला गया। वह दक्षिण की तरफ हेब्रोन को आया और अब वह यरूशलेम के उत्तर में बेतेल की ओर बढ़ता है। तब पद 4 में लिखा है।

उत्पत्ति 13:4 “यह स्थान उस वेदी का है, जिसे उसने पहले बनाई थी; और वहाँ अब्राम ने फिर यहोवा से प्रार्थना की।“
मित्रों, यद्यपि अब्राम ठोकर खाकर गिरा फिर भी वह परमेश्वर के पास वापस आता है। अब्राम के पास हमेशा, वेदी की ओर आने के लिए एक मार्ग खुला रहता है, चाहे उड़ाऊ पुत्र, कोई भी स्त्री या पुरुष जो परमेश्वर के पास वापस आना चाहते हैं। परमेश्वर पिता अपनी बाहें फैलाए आपको स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। क्या आप परमेश्वर की ओर लौटना चाहते हैं? तब आगे पद 5 में लिखा है।

उत्पत्ति 13:5 “लूत के पास भी, जो अब्राम के साथ चलता था, भेड़-बकरी, गाय-बैल, और तम्बू थे।“

लूत ने मिश्र में अच्छा काम किया था ।तब आगे पद 6 औश्र 7 में लिखा है।

उत्पत्ति 13:6 “इसलिये उस देश में उन दोनों के लिए पर्याप्त स्थान न था कि वे इकट्ठे रहें: क्योंकि उनके पास बहुत धन था इसलिये वे इकट्ठे न रह सके।“
उत्पत्ति 13:7 “अब्राम और लूत की भेड़-बकरी और गाय-बैल के चरवाहों में झगड़ा हुआ। उस समय कनानी और परिज्जी लोग उस देश में रहते थे।“

मित्रों, यदि आप परमेश्वर के वचन को आप से बात करने दें तो यह आश्चर्यजनक काम करता है। क्या आप ने ध्यान दिया? अब्राम ने मिस्र में दो चीज़ें प्राप्त की, जिसने उसे असहनीय दुःख दिया। पहली है धन-संपत्ति और दूसरा है उसकी मिस्री दासी जिसका नाम हाजिरा था। हाजिरा के बारे में हम आगे देखेंगे। लेकिन अब हम उसकी संपत्ति को देखते हैं, जो लूत और उसे अलग होने के लिए मजबूर कर रही थी, क्योंकि संपत्ति के कारण दोनों के नौकरों के बीच में झगड़े हो रहे थे।

मित्रों, क्या आपने इस कथन पर ध्यान कियाः “उस समय उस देश में कनानी और परिज्जी जातियाँ रहती थीं?“ अब्राम के चरवाहे और लूत के चरवाहे झगड़ रहे थे और तब अब्राम और लूत असहमत होते हैं। यहाँ पर रोचक बात यह है, कि संभवतः उस समय कनानी लोग परिज्जी से कहा होंगा, “देखो वे फिर झगड़ रहे हैं। जब वे इस देश में आए तब जीवित और सच्चे परमेश्वर के लिए एक वेदी बनाई, उस समय हम लोग अब्राम को कैसे देखते थे। जब वह पहली बार आया तो हमें लगा कि वह एक अद्भुत व्यक्ति है। हम जानते हैं कि वह एक ईमानदार व्यक्ति था, सत्यवादी था, परन्तु अब उसे देखो। उनके झगडे को देखो। मैं नहीं सोचता की कनानी और परिज्जी उनके इस प्रकार के व्यवहार से प्रभावित हुए होंगे।

मित्रों, जब कलीसिया के अन्दर में ही इस प्रकार के मनमोटाव और झगड़े हैं, तो बाहर का एक अविश्वासी व्यक्ति भी इसे जानेगा, आप को मालूम है कि वह क्या कहेगा, “यदि यही मसीहत है तो मैं इसका भागीदार नहीं बनना चाहता। मैं लड़ाई बाहर ही कर सकता हूँ, मुझे लड़ने के लिए कलीसिया में जुड़ने की आवश्यकता नहीं है।“ प्रभु यीशु मसीह ने अपनों से और कलीसिया से यह नहीं कहा था कि, “यदि तुम कट्टरवादी बन कर और कलीसिया की स्थापना करोगे तो लोग इससे जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो।“ परन्तु उसने यूहन्ना 13ः35 में कहा था कि “यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो“। परिज्जी और कनानी जो पुराने बदमाश या शैतान हैं, इस बात को जानते हैं, कि कलीसिया में आंतरिक लड़ाई चल रही है।

इसके आगे पद 8 और 9 में लिखा है।
उत्पत्ति 13:8 “तब अब्राम लूत से कहने लगा, “मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई-बन्धु हैं।“
उत्पत्ति 13:9 “क्या सारा देश तेरे सामने नहीं? इसलिये मुझ से अलग हो जा; यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊँगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए, तो मैं बाईं ओर जाऊँगा।”
आप देख सकते हैं कि अब्राम ही विभाजन करता है। ऐसा करने के लिए आप के पास बड़ा दिल होना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें, तो अब्राम कह रहा था, लूत जैसा चाहे चुनाव कर ले और जो कुछ बच जाए वह अब्राम लेलेगा।

लूत का सदोम को जाना

उत्पत्ति 13:10 में हम पढ़ते हैं

उत्पत्ति 13:10 “तब लूत ने आँख उठाकर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नष्ट न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।“

उन दिनों में यह बहुत सुन्दर स्थान था।
पद 11 और 12 में आगे लिखा है।

उत्पत्ति 13:11 “इसलिये लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए।“
उत्पत्ति 13:12 “अब्राम कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।“

यह बहुत रोचक हैं। सम्भवतः लूत ने उस पूरे समय में जब वह अब्राम के साथ उस भूमि पर जीवन यापन करता रहा, रात्रि के समय लूत अपने तम्बू के पर्दे को हटाकर बाहर की ओर देखता रहा होगा और अपनी पत्नी से कहता होगा, “देखो कितनी सुन्दर जगह है?“ सुबह उठकर कहता होगा, “देखो उस तराई में वह कितना सुहावना लग रहा है।“ दूसरों के खेत की फसल हमेशा ही हरी-भरी लगती है। दूसरों की थाली में घी अधिक नज़र आता है। जब वह दिन आया कि लूत चुनाव करे और वहाँ से जाए, आप जानते हैं कि वह किस दिशा में गया। मित्रों, इस बामत को ध्यान रखें, कोई भी मनुष्य अचानक पाप में नहीं गिरता है। यह हमेशा ही कुछ समय के बाद, उस पर हावी होता है। लूत ने अपनी आंखें उठाकर उस मैदानी क्षेत्र को देख और उस क्षेत्र में बढ़ गया। यह उसके जीवन की सबसे बड़ी गलती थी जो उसने की ।पर लूत इसे नहीं जानता था।

तब पद 13 में आगे लिखा है।

उत्पत्ति 13:13 “सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।“
हम आगे चल कर देखेंगे कि सदोम में लूत और उसके परिवार का क्या हुआ।

परमेश्वर अब्राम के सामने उपस्थित होता है और अपनी प्रतिज्ञा की पुष्टी करता है।

उत्पत्ति 13:14 “जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात् यहोवा ने अब्राम से कहा, “आँख उठाकर जिस स्थान पर तू है वहाँ से उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, चारो ओर दृष्टि कर।“

लिखा है, “जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात् यहोवा ने अब्राम से कहा।“ यह अब्राम को परमेश्वर का तीसरा दर्शन था।

तब आगे परमेश्वर कहता है, “आँख उठाकर जिस स्थान पर तू है वहाँ से उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, चारो ओर दृष्टि कर।“ यही वह भूमि है जिसे परमेश्वर तुझे देने जा रहा है। परमेश्वर ने अब्राम को दर्शन देना जारी रखा और बाद में अन्य पुरखों को भी दर्शन दिया। परमेश्वर ने उस भूमि के चारों ओर सीमा-रेखा तय कर दी। दूसरों शब्दों में उसने उनके लिए सीमा निर्धारित कर दी और उसने बताया कि वह भूमि कहाँ तक है। वह इस बारे में बहुत ही स्पष्ट था।

क्या में आप के मन में एक विचार लाने का प्रयास कर सकता हूँ मित्रों?
मित्रों, स्वर्ग एक वास्तविक स्थान है, उसी प्रकार प्रतिज्ञा का देश भी वास्तविक है। एक सुन्दर उपद्वीप जो कहीं और नहीं परन्तु एक वास्तविक स्थान है जिसके बारे में परमेश्वर का वचन भी निश्चित है। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में परमेश्वर इसे और अधिक स्पष्ट करते हुए, इसके चारों ओर बाड़ा खड़ा करता हैं, और इसके बारे में हम सब, कुछ जान सकते हैं। परमेश्वर सिर्फ सैद्धांतिक बातें ही प्रगट नहीं करता, परन्तु जो उसके साथ है वास्तविक और सच है उसे प्रगट करता है।
आगे पद 15 और 16 में हम पढ़ते है।

उत्पत्ति 13:15 “क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूँगा।“
उत्पत्ति 13:16 “और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत करूँगा, यहाँ तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।“

ध्यान दें मित्रों कि परमेश्वर इस व्यक्ति के लिए क्या करता है, किस हद तक जाता है। वह उस भूमि को चिन्हित करते हुए अब्राम से कहता है कि तेरे वंश को युग युग के लिये दूँगा। वह इस बात की भी घोषणा करता है कि उसका वंश पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत होगा। जैसा उसके साथ पूर्ण हुआ। तब आगे पद 17 में हम पढ़ते हैं।

उत्पत्ति 13:17 “उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर, क्योंकि मैं उसे तुझी को दूँगा।”

यह एक रोचक बात है कि मृत सागर स्क्रोल या डेड सी स्क्रोल या अभिलेखों में से एक, उत्पत्ति की पुस्तक के उस विशेष भाग का वर्णन करता है और यह वर्णन उस भूमि पर रहनेवाले पहले व्यक्ति अब्राम के द्वारा दिया गया है। यह भूमि उन दिनों में एक अद्भुत भूमि थी। आगे पद 18 में लिखा है।

उत्पत्ति 13:18 “इसके पश्चात् अब्राम अपना तम्बू उखाड़कर, मम्रे के बांज वृक्षों के बीच जो हेब्रोन में थे, जाकर रहने लगा; और वहाँ भी यहोवा की एक वेदी बनाई।“

अब्राम निश्चित रूप से वेदि बनाने वाला मनुष्य था। आप कह सकते हैं कि अब्राम जहाँ कहीं भी गया उसने गवाही के रूप में एक वेदि बनाई और उस स्थान में छोड़ी। मनुष्य ने चांद पर अपने पद चिन्ह छोड़े है। वे एक झण्डा लगा कर, एक स्मारक छोड़ कर बताना चाहते हैं कि हम यहाँ आए थे। पर वे कभी वहाँ परमेश्वर का वचन बाइबल रख कर नहीं आए। यही बात अब्राम की सोच, उस समय के लोगों की सोच और आज के लोगों की सोच में अन्तर को प्रगट करता है। अब्राम के लिए सब से महत्वपूर्ण था परमेश्वर के लिए वेदि बनाना, और यही उसके हर जगह किया।

मित्रों, मम्रे शब्द का एक अर्थ होता है, “समृद्धि“ तथा हेब्रोन का अर्थ होता है, “सहभागिता।“ वह रहने के लिए एक अद्भुत स्थान है। आज के समय में हम निश्चित रूप से उस वृक्ष और कुआ को चिन्हित कर सकते हैं, कि जहाँ अब्राम था वहाँ, बहुत से लोग आज उस स्थान पर जाते हैं। वास्तव में वह रोचक स्थान है जो मम्रे और हेब्रोन के मध्य में है। और यह वही स्थान है, जहाँ अब्राम ने निवास किया था। यह रहने के लिए अच्छा स्थान है जहाँ समृद्धि और परमेश्वर के साथ सहभागिता होती है। ऐसे लगता है कि यह अब्राम का घर रहा होगा, और वह स्थान जहाँ उसे दफनाया गया।

पर आप सह याद रखें कि परमेश्वर के साथ बने रहना और उसकी सुरक्षा प्राप्त करते रहना दो अलग बातें हैं। अब्राम को परमेश्वर की सुरक्षा मिल रही थी पर वह उसकी उपस्थिति में नहीं था। क्या आप इन दोनों का अंतर समझ पा रहे हैं। हमें परमेश्वर की उपस्थिति में बने रहना है। तब सारी आशीष और सुरक्षा अपने आप हम पर बनी रहेगी। आइए धन्यवाद और प्रार्थना करें।

अध्ययन मार्गदर्शिका

जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ

उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि

लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।

उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।

उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।

मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।

उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।

I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)

  • A. सृष्टि, अध्याय 1-2
    1. स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
    2. पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
    3. पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
      • a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
      • b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
      • c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
      • d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
      • e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
      • f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
      • g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
      • h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
  • B. पतन, अध्याय 3-4
    1. पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
    2. पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
  • C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
    1. आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
    2. जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
    3. जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
    4. जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
    5. जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
  • D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
    1. जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
    2. बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
  • रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
    • उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
    • उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
    • उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
    • उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
    • उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
    • उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)

II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)

  • A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23

    (परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)

    1. अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
    2. अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
    3. पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
    4. परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
    5. साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
    6. परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
    7. परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
    8. दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
    9. अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
    10. इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
    11. परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
    12. सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
  • B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26

    (एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)

    1. अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
    2. अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
    3. परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
  • C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
    1. याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
    2. याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
    3. याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
    4. याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
    5. याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
    6. याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
    7. याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
    8. याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
    9. याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
    10. एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
  • D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
    1. याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
    2. यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
    3. मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
      1. पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
      2. यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
    4. मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
      1. यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
      2. याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
      3. याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
      4. यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
      5. यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
      6. याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
      7. याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
      8. याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
    5. याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
      1. याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
      2. कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50

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