उत्पत्ति : सृष्टि से पतन तक
आप क्या सुनेंगे
डॉ. जे. वर्नोन मैकगी के साथ बाइबिल के माध्यम से
पुस्तक : उत्पत्ति
अध्याय : उत्पत्ति 10:1 – 11:3
कार्यक्रम : #0028
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अध्याय 10
प्रिय मित्रों प्रेम भर नमस्कार। आशा करता हूँ कि आप परमेश्वर के अनुग्रह से सुरक्षित है तथा आज के अध्ययन में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। हमने पिछले प्रसारण में अध्याय 9 को समाप्त किया था और आज से हम अध्याय 10 से अपना मनन आरंभ करेंगे, जिसका विषय है।
विषय: येपेत की सन्तानें, हाम की सन्तानें और शेम की सन्तानें
मित्रों, यह परिवारों की वंशावलियों का अध्याय है, जिसके द्वारा से संसार के राष्ट्रों का आरंभ हुआ। दोस्तों इस अध्याय को मैं जितना महत्व दे रहा हूँ वह उससे अधिक की अपेक्षा करता है। यदि आप मानवजाति के विज्ञान और मानव विज्ञान में रूची रखते हैं अर्थात आप पृथ्वी पर मानव के विकास पर गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं तो आप एच एस मिलर की पुस्तक का उपयोग कर सकते हैं जो एथनोलॉजी में स्नात्कोत्तर स्नातक है, उन्होंने राष्ट्रों की उत्पत्ति का चार्ट बनाया है, जिसके लिए उन्होंने उत्त्पत्ति 10 अध्याय को इंसानी परिवार के तीन हिस्सों में बाँटने का आधार बनाया है, जो नूह की इन तीन सन्तानों: हाम, शेम और सेपेत में दिखाया गया है। एथनोलॉजी या मानव विज्ञान से यह साफ़ होता है कि ये न तो येपेत के पुत्र हैं और न ही हाम के पुत्र हैं जो कभी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें कुछ लोग इस्राएल के खोए हुए दस गोत्र कहते हैं।
यहाँ अध्याय 10 में हमारे पास नूह के तीनों पुत्रों की वंशावली है। तो आइए हम पढ़ें उत्पत्ति अध्याय 10 का पद 11, लिखा है।
उत्पत्ति 10:1 नूह के पुत्र शेम, हाम, और येपेत थे; उनके पुत्र जल-प्रलय के पश्चात् उत्पन्न हुए: उनकी वंशावली यह है।
सबसे पहले हम येपेत की वंशावली पद 2 से 5 में पाते हैं, और उसके बाद हाम की वंशावली जो पद 6 से 20 पद में दी गई है, ये वे विशिष्ट लोग हैं जो सृष्टि के आरंभ के दिनों में थे। और अन्त में शेम की वंशावली जिसे हम पद 21 से 32 में पाते हैं। मित्रों, इस बात पर ध्यान दें कि संपूर्ण बाइबल में परमेश्वर ने एक ही तरीके को अपनाया है, जिसमें उसने तिरस्कृत वंशावली को सबसे पहले रखा है और उस वंशावली के बारे में कुछ शब्द कहे हैं और इसके पश्चात् इस विषय को पूर्ण रीति से छोड़ दिया गया है। और पुनः इस विषय पर चर्चा नहीं की गई है, और अन्त में स्वीकृत की गई वंशावली को रखा गया है, वह वंशावली जो हमें प्रभु यीशु मसीह की ओर ले जाती है।
आइए अब हम येपेत के पुत्रों के बारे में देखें। जिसे हम इस पद में पढ़ते हैं, उत्पत्ति10:2
येपेत के पुत्र
उत्पत्ति 10:2 येपेत के पुत्र: गोमेर, मागोग, मादै, यावान, तूबल, मेशेक, और तीरास हुए।
(नूह का परिवार वृक्ष का चित्र)
श्री एच एस मिलर की रूपरेखा या चित्र के अनुसार शक वासी, स्लाव वासी, रूसी लोग, बुलगारिया के लोग, बोहेमिया के लोग, ध्रुवीय लोग, क्रोएशिया के लोग, ये सब मागोग से उत्पन्न हुए हैं। भारतीय और ईरान की प्रजाति के लोग – फ़ारसी, अफगानिस्तानी और कुर्द देश के लोग – मादै से उत्पन्न हुए हैं। और यावान से यूनानी, और रोमी, और रोमी राष्ट्रीयता के लोग जैसे फ्रेन्च, स्पेनिश, पोर्तगाली़ और इतालवी लोग आदि। जो तीरास से उत्पन्न हुए, वो तीरासियन कहलाए। टेयुटोन्स, जर्मनी के लोग और इससे पूर्व जर्मनी के लोग और यूरोप की प्रजातियाँ, उत्तरी क्षेत्र के जर्मन लोग, और पश्चिमी जर्मनी के लोग, जिसमें से निकलकर एक ऊपरी जर्मनी और निचली जर्मनी बाहर आता है। उसके बाद एन्गलो, सैक्सन और प्राचीन जर्मन जाति और अंग्रेज़ लोग हैं।
मित्रों, यह सच है कि मैं पूरी रूपरेखा को नहीं बता सकता हूँ लेकिन वास्तव में यह बहुत ही रोचक है। आप अमेरिका में बहुत से लोगों को, इसी वंश के कह सकते हैं।
हाम की सन्तानें
उत्पत्ति 10:6 हाम के पुत्र: कूश, मिस्र, फूत और कनान हुए।
जैसा कि आप देख सकते हैं कि हाम के और भी भाई थे, परन्तु शाप केवल कनान पर ही दिया गया था। अन्य पुत्रों पर शाप क्यों नहीं दिया गया इस बारे में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। कनान के वंश से सीदोनी, हित्ती, यबूसी, एमोरी, गिर्गाशी और हिव्वी आदि आते हैं।
और अब हाम के पुत्र कूश से अफ्रीका के लोग अर्थात, इथोपिया, मिस्र और लिबिया आदि देश के लोग आते हैं। ये सारी जातियाँ हैमिटिक या नीग्रो होते हैं। यहाँ हमारे पास कूश के पुत्रों का कुछ विवरण हैं जो हमें पद 7 और 9 में मिलता है।
उत्पत्ति 10:7 “और कूश के पुत्र सबा, हवीला, सबता, रामा, और सबूतका हुए। और रामा के पुत्र शबा, और ददान हुए।“
उत्पत्ति 10:8 “कूश के वंश में निम्रोद भी हुआ; पृथ्वी पर पहला वीर वही हुआ है।“
उत्पत्ति 10:9 “वह यहोवा की दृष्टि में पराक्रमी शिकार खेलनेवाला ठहरा, इस से यह कहावत चली है; “निम्रोद के समान यहोवा की दृष्टि में पराक्रमी शिकार खेलनेवाला।”
लिखा है, “कूश के वंश में निम्रोद भी हुआ; पृथ्वी पर पहला वीर वही हुआ है।“ वह उस संसार का महायोद्ध और शासक बनना चाहता था और उसने ऐसा प्रयास भी किया।
तब लिखा है, “वह यहोवा की दृष्टि में पराक्रमी शिकार खेलनेवाला ठहरा।“ इसका यह अर्थ नहीं कि वह जंगली जानवरों का शिकार करता था। कभी-कभी आपने देखा होगा कि किसी छोटे बच्चे को चिड़िया मारनेवाली बन्दूक दे दी जाती है, और जब वह बाहर जाता है और एक गौरया को मार लाता है, तब लोग कहते हैं, देखो वह छोटा निम्रोद है। उसने एक गौरैये को मार गिराया। परन्तु निम्रोद किसी गौरया को नहीं मार रहा था और न ही अफ्रीका देश के उन जंगली जानवरों का शिकार कर रहा था। परन्तु वह मनुष्य की आत्मा का शिकारी था। इस पद में कहे गए वचन का यही अर्थ है। तब आगे पद 10 में लिखा है।
उत्पत्ति 10:10 “उसके राज्य का आरम्भ शिनार देश में बेबीलोन, एरेख, अक्कद और कलने से हुआ।“
वह शिनार देश में उन महान नगरों का संस्थापक हुआ।
निम्रोद की एक रोचक कहानी है जो संसार की ऐतिहासिक पुस्तकों मंे भी पाई जाती है। एलेक्ज़ेनडर हिसलोप ने अपनी पुस्तक “दो बेबीलोन“ में इसकी पृष्ठभूमि दिया है कि किस प्रकार निम्रोद बाबेल के मीनार की कहानी में एक ज़िम्मेदार व्यक्ति था। यह वही निम्रोद है जिसने जलप्रलय के बाद सभी मानवजाति को एक जुट करने का प्रयास किया की एक ही देश और भाषा बनाने की कोशिष की। ताकि वह संसार का सबसे बड़ा शासक बन सके। मित्रों, वह एक विद्रोही बाबेल का संस्थापक और मनुष्य की आत्मा का शिकारी था। वह बिना किसी व्यवस्था के था, और वह जो संसार का अन्तिम शासक, मसीही विरोधी – आनेवाला है, वह उसका एक प्रतिरूप या छायाप्रति है जो अभी प्रगट नहीं हुआ है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि पहली महान सभ्यता हाम के पुत्रों आती है, हमें इस बात को स्मरण रखने की आवश्यकता है। मित्रों, कुछ वर्ष पहले हमने जो कुछ विद्यालय में सीखा/पढ़ा था, आज उन पुराने तरीकों को अपनाना सरल सी बात है। आज अश्वेत जाति के लोग अपने वंश के बारे में अधिक जानना चाहता है। मैं उन्हें दोष नहीं देता, क्योंकि उनहें कई हज़ार वर्ष पूर्व यह मौका नहीं दिया गया था। अश्वेत जाति के लोगों की कहानी का आरंभ इस पृथ्वी पर दो महान सभ्यताओं को स्थापित करने से है। वे हाम के पुत्र के वंशज से थे, और निम्रोद भी हाम का पुत्र था।
मैं इस वंशक्रम को आगे बढ़ाने का काम करने नहीं जा रहा हूँ। आप जानते हैं कि हम पवित्र आत्मा द्वारा दिए गए मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं। जिसमें वह तिरस्कृत वंश को पहले लेता हैं और बाद में उसे त्याग देता हैं। मित्रों, अब हम दूसरे वंश की ओर मुड़ते हैं जो हमें अब्राहम के वंशज अउसके बाद इस्राएली जाति और अन्त में यीशु मसीह के इस पृथ्वी पर आने की ओर ले जाता है, इस वंश का अनुसरण हम पुराने नियम की पुस्तक से ही करेंगे। परमेश्वर यहाँ पर थोड़े समय के लिए बाकी मानवजाति को अलग किनारे कर देता हैं, लेकिन कुछ समय के पश्चात् वह पुनः उनके पास वापस आता है।
मित्रों, मैं शाफीर द्वारा लिखी गई पुस्तक “वचन की दैविक एकता“ से आपको एक उदाहरण, देना चाहता हूँ: वे लिखते हैं कि,
“उत्पत्ति की पुस्तक का दसवाँ अध्याय बहुत ही ध्यान देने योग्य अध्याय है। इससे पहले कि परमेश्वर एक तरह से, सभी राष्ट्रों को उनके हाल पर छोड़ दें और अब्राहम से लेकर अपने चुने हुए लोग, इस्रादल से व्यवहार करना आरंभ करें, वह पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को कुछ समय के लिए प्रेम से विदा करता हैं, जैसे कह रहा हों, “मैं कुछ समय के लिए तुम्हें छोड़कर जा रहा हूँ, लेकिन मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। मैंने तुम्हें रचा है: मैंने तुम्हारे पूरे भविष्य की योजना बनाई है; और उनकी अलग-अलग वंशावलियों का पता लगाया जाता है।“
उत्पत्ति के 10वें अध्याय में सत्तर राष्ट्रों के नाम दिए गए हैं। उन में से 14 येपेत से हैं। 30 हाम से हैं, इस बात को न भूलें। यह आपको अश्वेत लोगों के आरंभ के बारे में एक अलग ही धारणा देगा। तथा शेम के वंशजों से 26 राष्ट्र। सब मिला कर 70 राष्ट्र जो इन तीनों के वंशजों से निकले हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि परमेश्वर हमें दिखाना चाहते हैं कि संसार के राष्ट्रों के साथ उन्होंने कैसा बर्ताव किया। पर एक प्रश्न उठता है कि आज पूरे संसार में श्वेत लोग ही क्यों विशिष्ट हैं? यह एक अच्छा प्रश्न है, और मैं आपको बताना चाहता हूँ कि वे क्यों वे विशिष्ट हैं। क्योंकि आरंभ में अश्वेत व्यक्ति ही थे, मिश्रित रंग के लोग जिनका वंश विशिष्ट था। और तब दाऊद और सुलैमान राजा के समय में शेम के पुत्रों ने इस संसार में एक अद्भुत प्रभाव डाला। और आप पाएँगे की शेम से अन्य राष्ट्र भी उत्पन्न हुए, जैसे सिरिया, लूदिया आरमीनिया, इसके अलावा योक्तान से अरबी लोग भी हैं। ये सारे महान राष्ट्र बाद मंे अस्तित्व में आये। संभवतः हम इस वर्तमान समय में हैं, जहाँ गोरे लोग आगे हैं। मित्रों, मुझे ऐसा लगता है कि ये तीनों प्रदर्शन कर रहे हैं कि चाहे वे हाम के पुत्र हैं या शेम के पुत्र हैं या येपेत के पुत्र, और वे तीनों ही इस संसार पर शासन करने में अयोग्य हैं। मैं यह विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर हमारे लिए इसे प्रदर्शित कर रहा हैं, और यह देखना एक अद्भुत बात है।
अब हम आगे बढ़ते हैं और पद 21 और 25 को पढ़ते हुए शेम के पुत्रों के विषय में देखते है, लिखा है।
शेम के पुत्र
उत्पत्ति 10:21 “शेम, जो सब एबेरवंशियों का मूलपुरुष हुआ, और जो येपेत का ज्येष्ठ भाई था, उसके भी पुत्र उत्पन्न हुए।“
उत्पत्ति 10:25 “और एबेर के दो पुत्र उत्पन्न हुए, एक का नाम पेलेग इस कारण रखा गया कि उसके दिनों में पृथ्वी बँट गई, और उसके भाई का नाम योक्तान था।“
पिछले बाइबल अध्ययन के समय जब मैं इस पद को देख रहा था तब मैंने “पृथ्वी बँट गई“ का अर्थ अलग तरीके से प्रगट किया था, जो इस पृथ्वी पर भौतिक बँटवारे को दर्शाता है, कि कुछ समय पहले पृथ्वी भौतिक रूप से एक विशाल महाविपत्ति में से होकर निकली। ये सारी बातें मूसा हमें पहले से ही इसलिए बता रहा हैं, ताकि वह हमें अगले अध्याय में बाबुल के मीनार के बारे में बता सकें। और उस समय पृथ्वी बँट चुकी थी। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि साधारण व्याख्या एक ही है जिससे बहुत से लोग चूक जाते हैं परन्तु हम इससे चूकना नहीं चाहते हैं।
आइए अब हम इस अध्याय के आखरी पद उत्पत्ति 10:32 को पढ़ें, लिखा है
उत्पत्ति 10:32 “नूह के पुत्रों के घराने ये ही हैं: और उनकी जातियों के अनुसार उनकी वंशावलियाँ ये ही हैं; और जल-प्रलय के पश्चात् पृथ्वी भर की जातियाँ इन्हीं में से होकर बँट गईं।”
मैं आप से कहनाचाहता हूँ कि यह बाइबल में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, यद्यपि हम ने से बहुत कम समय दिया है। आप देख सकते हैं कि उनके लिए जो वास्तव में मानव परिवार के निष्पक्ष, मूल्यनिर्धारण करना चाहते हैं उनके लिए यह एक बहुत ही अच्छा अध्ययन प्रदान कर सकता है। बहुत से लोगों ने इस विशिष्ट अध्याय को, मानव परिवार के निष्पक्ष, मूल्यनिर्धारण के उद्देश्य से उपयोग किया है। इसके साथ ही अध्याय 10 समाप्त होता है और अब हम अध्याय 11 से अध्ययन जारी रखेंगे।
अध्याय 11
विषय: बाबुल के मीनार का निर्माण, शेम से अब्राहम की वंशावली।
सर्वप्रथम हम बाबुल में मीनार निर्माण के विषय में देखेंगे। तो आइए हम पढ़ें उत्पत्ति 11 अध्याय का पद 1 लिखा है।
उत्पत्ति 11:1 सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा और एक ही बोली थी।
मैं नहीं जानता कि लोग उस समय कौन सी भाषा बोला करते थे। परन्तु हमारे पास इसकी जानकारी नहीं है। वास्तव में वह कौन सी भाषा थी हम नहीं जानते हैं। मैं विश्वास करता हूँ कि जो भी भाषा उस समय बोली जाती थी वह अवश्य ही स्वर्ग में बोली जाएगी। और वह इस भाषा से भी और अधिक अच्छी होगी, जिसे आज हम बोलते हैं, जो एक विशेष संज्ञा और क्रिया, क्रिया-विषेशण और विषेशण के साथ होगी। तब आगे पद 2 में लिखा है।
उत्पत्ति 11:2 “उस समय लोग पूर्व की ओर चलते चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उसमें बस गए।“
लिखा है, “उस समय लोग पूर्व की ओर चलते चलते,“ – कृपया यहाँ पर ध्यान दीजिए कि लिखा है, उन्होंने “पूरब की ओर यात्रा“ की। इसका मतलब यह हुआ कि मानवजाति पश्चिम की ओर जा रही थी। और उन्होंने शिनार देश में एक मैदान पाया जो टायग्रीस-युफ्राटीस की घाटी में था। तब हम आगे पद 3 में पढ़ते है, लिखा है।
उत्पत्ति 11:3 “तब वे आपस में कहने लगे, “आओ, हम ईटें बना बना के भली भाँति आग में पकाएँ।” और उन्होंने पत्थर के स्थान पर ईंट से, और चूने के स्थान पर मिट्टी के गारे से काम लिया।“
मित्रों उस क्षेत्र में पत्थर पाए नहीं जाते हैं इसलिए वे ईंटें बनाने लगे। और यही निर्माण कार्य में उनके वास्तविक चरित्र को प्रगट करता हैर्। इंटें आज भी हमारे घर बनाने की सामग्रियों में प्रचलित हैं, उस समय तक ईंट का प्रयोग, उसकी व्यावहारिकता के कारण से किया गया। क्योंकि इसकी आवश्यकता थी।
यहाँ पर आज हम अपने अध्ययन को रोकते हैं और अगले प्रसारण में हम इसे आगे बढ़ाएंगे। परन्तु हम उस बात को देखते है कि मनुष्य का पापी स्वाभाव उसे किसी न किसी तरह परमेश्वर के विरोध पाप करने का, आज्ञा उंलंघन करने को प्रेरित करता रहता है। आइए प्रार्थना के साथ अध्ययन समाप्त करें।
अध्ययन मार्गदर्शिका
जे. वर्नोन मैकगी के नोट्स और रूपरेखाएँ
सीखने के नोट्स
उत्पत्ति — बाइबिल की बीज-भूमि
लेखक: मूसा। उत्पत्ति नाम सेप्टुआगिंट (LXX) से लिया गया है, जो पुराने नियम का एक ग्रीक अनुवाद है जो अलेक्जेंड्रिया में 285-247 ईसा पूर्व के आसपास टॉलेमी फिलाडेल्फस के आदेश पर किया गया था। जोसेफस हमें बताता है कि 72 पुजारियों (प्रत्येक 12 जनजातियों में से छह) ने 72 दिनों में यह अनुवाद तैयार किया। मसीह और पॉल दोनों ने इस अनुवाद से उद्धृत किया।
उत्पत्ति का अर्थ है “उत्पत्ति,” “स्रोत,” “जन्म।” ग्रीक क्रिया gennao — “जन्म देना” या “पैदा करना” से व्युत्पन्न, यह शुरुआत और स्रोतों की पुस्तक है, और विशेष रूप से जन्मों की पुस्तक है। यह पीढ़ियों की पुस्तक है: स्वर्ग, पृथ्वी और मनुष्य की वंशावली। उत्पत्ति 3:15 में नया जन्म भी सुझाया गया है, जिसमें एक उद्धारकर्ता का पहला उल्लेख है।
उत्पत्ति शुरुआत की पुस्तक है: सृष्टि, पुरुष, स्त्री, सब्त, विवाह, परिवार, कार्य, पाप, हत्या, बलिदान, नस्लों, भाषाओं, संस्कृति, सभ्यता और मुक्ति की शुरुआत। यह दो प्राकृतिक विभाजनों में आती है — उत्पत्ति 2:4 (स्वर्ग और पृथ्वी के जन्म की पुस्तक) और उत्पत्ति 5:1 (पुरुषों के जन्म की पुस्तक)।
मुख्य शब्द: पीढ़ियाँ। उद्देश्य: हमें परिवार देना — उत्पत्ति 12:3; 22:18; 28:13–14; प्रेरितों के काम 3:25; गलातियों 3:6, 9, 16। पहले 11 अध्याय कम से कम 2,000 वर्षों को कवर करते हैं; अध्याय 12 से अध्याय 50 तक, समय केवल 350 वर्ष है। यह विरोधाभास हमारा ध्यान आकर्षित करना चाहिए — अध्याय 12 में रिकॉर्ड नाटकीय रूप से धीमा हो जाता है क्योंकि व्यक्तियों को परमेश्वर के लिए विश्व की घटनाओं की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
टिप्पणी: अब्राहम परमेश्वर के लिए ब्रह्मांड से अधिक महत्वपूर्ण है। परमेश्वर एक परिवार के इतिहास के 350 वर्षों को 39 अध्यायों में समर्पित करते हैं, जबकि विश्व इतिहास के पहले 2,000+ वर्षों को केवल 11 अध्यायों में कवर करते हैं। चार सुसमाचारों में, वही सिद्धांत प्रकट होता है: चार अध्याय यीशु के जीवन के पहले 30 वर्षों को कवर करते हैं, जबकि 85 अध्याय अंतिम तीन वर्षों को कवर करते हैं, और 27 अध्याय अंतिम आठ दिनों को कवर करते हैं। जोर हमेशा उस पर होता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — और उत्पत्ति में, वह एक चुने हुए परिवार के माध्यम से परमेश्वर की मुक्ति योजना है।
उत्पत्ति बनाम बेबीलोनियन विवरण: बेबीलोनियन सृष्टि की गोलियों के साथ तुलना बाइबिल के रिकॉर्ड की श्रेष्ठता को प्रकट करती है। बेबीलोनियन गोलियाँ अराजकता से शुरू होती हैं; बाइबिल ब्रह्मांड और पूर्णता से शुरू होती है। बेबीलोनियन विवरण स्वर्गीय पिंडों को देवताओं के रूप में मानता है; बाइबिल उन्हें पदार्थ के रूप में प्रस्तुत करती है। बेबीलोनियन पाठ बहुदेववादी है; उत्पत्ति एकेश्वरवादी है। बेबीलोनियन गोलियाँ एक शिल्पकार के काम को दर्शाती हैं; उत्पत्ति में, परमेश्वर ने बात की। बेबीलोनियन विवरण बचपन और विकृति की विशेषता है; बाइबिल एक पवित्र सृष्टिकर्ता की भव्य और गंभीर वास्तविकताओं को प्रस्तुत करती है जो एक उद्धारकर्ता भी है। जबकि बेबीलोनियन विवरण विज्ञान के साथ सामंजस्य में नहीं है, उत्पत्ति का रिकॉर्ड विज्ञान के अनुरूप है — इतना अधिक कि कई वैज्ञानिक विश्वासी हैं।
रूपरेखा
I. पृथ्वी पर पाप का प्रवेश (अध्याय 1-11)
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A. सृष्टि, अध्याय 1-2
- स्वर्ग और पृथ्वी, 1:1 — “सृष्टि” (बारा) केवल 3 बार आता है (पद 1, 21, 27)
- पृथ्वी उजाड़ और शून्य हो गई, 1:2
- पुनः-सृष्टि, 1:3-2:25
- a. पहला दिन — प्रकाश, 1:3-5
- b. दूसरा दिन — वायुमंडल (आकाश), 1:6-8
- c. तीसरा दिन — सूखी भूमि प्रकट होती है और वनस्पति जीवन, 1:9-13
- d. चौथा दिन — सूर्य, चंद्रमा, तारे प्रकट होते हैं, 1:14-19
- e. पाँचवाँ दिन — पशु जीवन (जीव विज्ञान), 1:20-23
- f. छठा दिन — सृष्टि की उर्वरता और मनुष्य की सृष्टि, 1:24-31
- g. सातवाँ दिन — सब्त, 2:1-3
- h. मनुष्य की सृष्टि का पुनर्कथन, 2:4-25 (पुनरावृत्ति का नियम)
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B. पतन, अध्याय 3-4
- पाप की जड़ — परमेश्वर पर संदेह करना और उसकी अवज्ञा करना
- पाप का फल — “हृदय से … हत्याएँ निकलती हैं …” (मत्ती 15:19)
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C. जलप्रलय, अध्याय 5-9
- आदम की पीढ़ियों की पुस्तक — सेथ के माध्यम से — मनुष्य के इतिहास की शुरुआत — मृत्युलेख, अध्याय 5
- जलप्रलय-पूर्व सभ्यता — जलप्रलय का कारण और सन्दूक का निर्माण, अध्याय 6
- जलप्रलय का न्याय, अध्याय 7
- जलप्रलय-पश्चात सभ्यता — जलप्रलय के बाद, अध्याय 8
- जलप्रलय-पश्चात जीवन — नई शुरुआत, अध्याय 9
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D. बाबुल का बुर्ज और भाषाओं का भ्रम, अध्याय 10-11
- जाति विज्ञान — नूह के पुत्र, अध्याय 10
- बाबुल का बुर्ज, अध्याय 11 (पेंटेकोस्ट के दिन के विपरीत)
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रूपरेखा (वंशावली के अनुसार):
- उत्पत्ति 1:1–2:6 — स्वर्ग और पृथ्वी की पीढ़ियों की पुस्तक — सृष्टि का दिव्य काव्य — परमेश्वर का रचनात्मक कार्य
- उत्पत्ति 2:7–6:8 — आदम की पीढ़ियों की पुस्तक (पुरुष, मानव) — आदम को बनाया गया था, लेकिन उसे बच्चे पैदा हुए
- उत्पत्ति 6:9–9:29 — नूह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 10:1–11:9 — नूह के पुत्रों की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 11:10-26 — शेम के पुत्रों की पीढ़ियाँ (अन्यजाति)
- उत्पत्ति 11:27–25:11 — तेरह की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:12-18 — इश्माएल की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 25:19–35:29 — इसहाक की पीढ़ियाँ (“इसहाक में तेरा वंश कहलाएगा” — उत्पत्ति 21:12; इब्रानियों 11:8-9; रोमियों 9:7)
- उत्पत्ति 36:1–37:1 — एसाव की पीढ़ियाँ
- उत्पत्ति 37:2–50:26 — याकूब की पीढ़ियाँ (अस्वीकृत वंश पहले दिया गया, चुना हुआ वंश अंत में — cf. 1 कुरिन्थियों 15:46)
II. समस्त मानवजाति के उद्धारकर्ता के आगमन की तैयारी (अध्याय 12-50)
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A. अब्राहम (विश्वास), अध्याय 12-23
(परमेश्वर के सात दर्शनों द्वारा विश्वास का विकास)
- अब्राम को परमेश्वर का बुलावा और वादा — विश्वास की कमी से उसकी प्रतिक्रिया, अध्याय 12
- अब्राम मिस्र से भूमि पर लौटता है — लूत से अलग होता है — परमेश्वर अब्राम को तीसरी बार दर्शन देता है, अध्याय 13
- पहला युद्ध — अब्राम लूत को बचाता है; पहला याजक — अब्राम को मेल्कीसेदेक द्वारा आशीष मिलती है, अध्याय 14
- परमेश्वर अब्राम को स्वयं को और अधिक पूरी तरह से प्रकट करता है — अपने वादों की पुष्टि करता है, अध्याय 15
- साराई और अब्राम का अविश्वास — इश्माएल का जन्म, अध्याय 16
- परमेश्वर अब्राहम के साथ वाचा बनाता है (अब्राम अब्राहम बन जाता है) — एक पुत्र के बारे में वादे की पुष्टि करता है, अध्याय 17
- परमेश्वर अब्राहम को सदोम के आने वाले विनाश को प्रकट करता है — अब्राहम मध्यस्थता करता है, अध्याय 18
- दूत लूत को चेतावनी देते हैं — लूत सदोम छोड़ देता है — परमेश्वर मैदान के शहरों को नष्ट कर देता है, अध्याय 19
- अब्राहम सारा के संबंध में गेरार में पाप दोहराता है, अध्याय 20
- इसहाक का जन्म — हागार और इश्माएल को बाहर निकाला जाता है — अब्राहम बेर्शेबा में, अध्याय 21
- परमेश्वर अब्राहम को इसहाक को बलिदान करने का आदेश देता है — उसे रोकता है — वाचा की पुनः पुष्टि करता है, अध्याय 22
- सारा की मृत्यु — अब्राहम दफन स्थान के लिए मखपेला की गुफा खरीदता है, अध्याय 23
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B. इसहाक (प्रिय पुत्र), अध्याय 24-26
(एक दुल्हन का चुनाव मसीह और कलीसिया से तुलना करता है)
- अब्राहम इसहाक के लिए दुल्हन के लिए नौकर भेजता है — रेबेका लौटती है — इसहाक की दुल्हन बनती है, अध्याय 24
- अब्राहम की मृत्यु — एसाव और याकूब (जुड़वाँ) का जन्म — एसाव याकूब को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बेचता है, अध्याय 25
- परमेश्वर इसहाक को वाचा की पुष्टि करता है — इसहाक रेबेका के साथ संबंध को गलत बताता है — इसहाक गेरार में कुआँ खोदता है, अध्याय 26
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C. याकूब (“जिसे प्रभु प्यार करता है उसे वह अनुशासित करता है”), अध्याय 27-36
- याकूब और रेबेका एसाव के लिए इच्छित आशीष प्राप्त करने के लिए षड्यंत्र करते हैं, अध्याय 27
- याकूब घर छोड़ता है — बेतेल में परमेश्वर उसे दर्शन देता है — अब्राहमिक वाचा की पुष्टि करता है, अध्याय 28
- याकूब हारान पहुँचता है — राहेल और चाचा लाबान से मिलता है — राहेल के लिए सेवा करता है — लेआ से शादी करने के लिए धोखा दिया जाता है, अध्याय 29
- याकूब के पुत्रों का जन्म — याकूब लाबान को छोड़ने की तैयारी करता है — याकूब का सौदा सफल होता है, अध्याय 30
- याकूब हारान से भागता है — लाबान उसे पकड़ लेता है — याकूब और लाबान मिजपा वाचा बनाते हैं, अध्याय 31
- याकूब के जीवन में संकट: पेनीएल में एक व्यक्ति उससे कुश्ती करता है — याकूब का नाम बदलकर इस्राएल कर दिया जाता है, अध्याय 32
- याकूब एसाव से मिलता है — याकूब शालेम की यात्रा करता है, अध्याय 33
- याकूब के परिवार में घोटाला: दीना को अपवित्र किया जाता है — भाई हामोर के पुरुषों को मारकर बदला लेते हैं, अध्याय 34
- याकूब बेतेल लौटता है — राहेल बेतलेहेम में मर जाती है — इसहाक हेब्रोन में मर जाता है, अध्याय 35
- एसाव का परिवार जो एदोम राष्ट्र बन जाता है, अध्याय 36
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D. यूसुफ (दुख और महिमा), अध्याय 37-50
- याकूब कनान में रहता है — यूसुफ को गुलामी में बेच दिया जाता है, अध्याय 37
- यहूदा का पाप और शर्म, अध्याय 38
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मिस्र में अपमान, अध्याय 39-40
- पोतीफर के घर में overseer — पोतीफर की पत्नी द्वारा प्रलोभित और फिर फंसाया गया — कैद किया गया, अध्याय 39
- यूसुफ जेल में बेकर और बटलर के सपनों की व्याख्या करता है, अध्याय 40
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मिस्र में उत्थान, अध्याय 41-48
- यूसुफ फिरौन के सपनों की व्याख्या करता है — मिस्र का overseer बनाया गया — असेनाथ से शादी करता है — मनश्शे और एप्रैम का जन्म, अध्याय 41
- याकूब अपने दस बेटों को अनाज के लिए मिस्र भेजता है — यूसुफ से मुलाकात — शिमोन को बंधक के रूप में छोड़ता है — अनाज और वापस किए गए पैसे के साथ घर लौटता है, अध्याय 42
- याकूब बेटों (बेंजामिन सहित) को फिर से मिस्र भेजता है — यूसुफ के घर में मनोरंजन किया जाता है (अपनी पहचान प्रकट नहीं करता), अध्याय 43
- यूसुफ भाइयों को घर भेजता है — steward द्वारा गिरफ्तार किया जाता है — बेंजामिन के बोरे में कप मिलता है — यहूदा बेंजामिन के लिए विनती करता है, अध्याय 44
- यूसुफ अपनी पहचान प्रकट करता है — भाइयों के साथ भावुक पुनर्मिलन — याकूब और पूरे परिवार को मिस्र आमंत्रित करता है, अध्याय 45
- याकूब परिवार (70) के साथ मिस्र चला जाता है — याकूब और यूसुफ का पुनर्मिलन, अध्याय 46
- याकूब और भाई गोशेन में रहते हैं — फिरौन के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं — अकाल मिस्रियों को भूमि बेचने के लिए मजबूर करता है — यूसुफ शपथ लेता है कि वह याकूब को कनान में दफनाएगा, अध्याय 47
- याकूब मृत्युशय्या पर यूसुफ के बेटों को आशीष देता है, अध्याय 48
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याकूब और यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 49-50
- याकूब 12 बेटों के लिए मृत्युशय्या पर आशीष और भविष्यवाणी देता है, अध्याय 49
- कनान में याकूब की मृत्यु और दफन — मिस्र में यूसुफ की मृत्यु और दफन, अध्याय 50
